इस्राइल का रिकॉर्ड बजट: नेतन्याहू की राजनीतिक जीत
इस्राइल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने देश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट पास करने में सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ ही देश में होने वाले संभावित चुनाव भी अब टल गए हैं।
यह बजट न केवल अपने आकार के लिए चर्चा में है, बल्कि इसमें रक्षा क्षेत्र को दिए गए रिकॉर्ड आवंटन के कारण भी सुर्खियों में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नेतन्याहू सरकार की एक रणनीतिक जीत है, जो उनकी स्थिति को और मजबूत बनाएगी।
रक्षा क्षेत्र को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
इस नए बजट की सबसे खास बात यह है कि रक्षा मंत्रालय को सबसे ज्यादा फंड आवंटित किया गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, रक्षा बजट में लगभग 15% की वृद्धि की गई है। इसमें नई रक्षा प्रौद्योगिकी, सैन्य उपकरणों की खरीद, और सुरक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए बड़ी राशि आवंटित की गई है।
दिलचस्प बात यह है कि इस बजट को लेकर नेतन्याहू के गठबंधन के अंदर भी काफी बहस हुई थी। कुछ सहयोगी दलों का मानना था कि सामाजिक कल्याण और शिक्षा के लिए भी अधिक फंड होना चाहिए था।
राजनीतिक संकट से निकली सरकार
पिछले कुछ महीनों से नेतन्याहू सरकार राजनीतिक संकट से गुजर रही थी। न्यायिक सुधार के मुद्दे पर देश में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे थे, और विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा था।
ऐसे में इस बजट का पास होना नेतन्याहू के लिए एक बड़ी राहत है। इससे न केवल उनकी सरकार स्थिर हुई है, बल्कि चुनाव का खतरा भी टला है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेतन्याहू की कुशल राजनीतिक रणनीति का परिणाम है।
गठबंधन के भीतर के मतभेदों को सुलझाने के लिए नेतन्याहू ने कई समझौते किए हैं। धार्मिक दलों को कुछ रियायतें दी गई हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा के मुद्दे पर सभी को एकजुट करने में वह कामयाब रहे हैं।
विपक्षी नेता यायर लापिड ने इस बजट की आलोचना करते हुए कहा है कि यह सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ के लिए बनाया गया है। उनका कहना है कि आम लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है।
आर्थिक चुनौतियों के बीच बड़ा कदम
इस्राइल की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ समय से कई चुनौतियों का सामना कर रही है। वैश्विक महंगाई, आवास संकट, और कोविड के बाद के प्रभावों से निपटना आसान नहीं था।
ऐसे में इतना बड़ा बजट पास करना एक जोखिम भरा कदम माना जा रहा है। हालांकि, सरकार का कहना है कि यह निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न देगा।
अर्थशास्त्रियों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। कुछ का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में निवेश से तकनीकी विकास होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। दूसरी तरफ, कुछ विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं कि यह वित्तीय घाटे को बढ़ा सकता है।
इस बजट में स्वास्थ्य सेवा के लिए
