ट्रंप का ईरान पर सबसे खतरनाक मिलिट्री एक्शन प्लान
मध्य पूर्व में तनाव के बादल फिर से गहरा रहे हैं। अमेरिका ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे खतरनाक मिलिट्री ऑपरेशन की योजना बना रहा है - 450 किलोग्राम यूरेनियम को जब्त करने का मिशन। यह वो कदम है जो दोनों देशों को युद्ध के कगार पर ला सकता है।
पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, यह ऑपरेशन इतना जटिल और जोखिम भरा है कि इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे कठिन मिशनों में से एक माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह कूटनीतिक समाधान की आखिरी उम्मीद को भी खत्म कर देगा?
क्यों इतना अहम है यह यूरेनियम भंडार?
ईरान के पास मौजूद 450 किलोग्राम यूरेनियम सिर्फ एक संख्या नहीं है - यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, यह मात्रा कई परमाणु हथियार बनाने के लिए काफी है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान इस यूरेनियम को 20% से अधिक समृद्ध कर चुका है, जो हथियार-ग्रेड यूरेनियम के बेहद करीब है। एक वरिष्ठ पेंटागन अधिकारी ने गुमनाम रहते हुए कहा, "यह वो लाल लकीर है जिसे हम पार नहीं होने दे सकते।"
यूरेनियम समृद्धीकरण की प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल है, लेकिन ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। नतांज़ और फोर्डो जैसी सुविधाओं में चल रहे काम से अमेरिकी नीति निर्माता बेहद चिंतित हैं।
मिलिट्री ऑपरेशन का खाका
सूत्रों के अनुसार, यह ऑपरेशन तीन चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करना, दूसरे में यूरेनियम भंडारण सुविधाओं पर कब्जा करना, और तीसरे में सुरक्षित निकासी करना।
अमेरिकी नेवी SEALs, मरीन फोर्स, और एयर फोर्स की संयुक्त टीम इस मिशन के लिए तैयार की जा रही है। खास बात यह है कि इस ऑपरेशन में किसी भी परमाणु सुविधा को नुकसान पहुंचाए बिना यूरेनियम को सुरक्षित निकालना होगा।
एक सेवानिवृत्त जनरल ने बताया, "यह किसी हॉलीवुड फिल्म जैसा नहीं है। एक छोटी सी गलती पूरे क्षेत्र में रेडिएशन फैला सकती है।" यही वजह है कि इस मिशन को अब तक स्थगित रखा गया है।
पेंटागन ने इस ऑपरेशन के लिए विशेष उपकरण और हजमत सूट्स की भी व्यवस्था की है। यूरेनियम को सुरक्षित तरीके से पैक करने और ट्रांसपोर्ट करने के लिए विशेष कंटेनर्स भी तैयार किए गए हैं।
दुनिया पर क्या होगा असर?
इस ऑपरेशन के परिणाम सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे। इज़राइल इस योजना का मुखर समर्थक है और उसने अपनी वायु सेना को तत्परता में रखा है। वहीं रूस और चीन ने इसे "अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन" करार दिया है।
सऊदी अरब जैसे अमेरिकी सहयोगी भी इस कदम को लेकर दुविधा में हैं। एक तरफ वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम से चिंतित हैं, दूसरी तरफ इस ऑपरेशन से पूरे क्