रोहित से पहले पहला हिटमैन आर्थर वेलार्ड
आज के दौर में रोहित शर्मा का नाम छक्कों के साथ जुड़ा हुआ है। भारतीय क्रिकेट के इस धाकड़ बल्लेबाज ने लाखों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में अपनी जगह बना ली है। उनके छक्कों की मारक क्षमता और आक्रामक बल्लेबाजी का अंदाज़ा ही अलग है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोहित शर्मा छक्कों के असली 'हिटमैन' नहीं हैं? असल में, इस भूमिका को पहली बार निभाने का श्रेय एक अंग्रेजी क्रिकेटर को जाता है, जिसका नाम आर्थर वेलार्ड था। यह कहानी लगभग नब्बे साल पुरानी है, जिसने क्रिकेट के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
आर्थर वेलार्ड कौन थे और उन्होंने क्रिकेट जगत में क्या क्रांति ली आई? यह सवाल कई क्रिकेट प्रेमियों के मन में आता है। लेकिन उनकी कहानी जानने से पहले हमें यह समझना जरूरी है कि क्रिकेट का विकास किस तरह से हुआ। जब आर्थर वेलार्ड खेलते थे, उस समय क्रिकेट बेहद रूढ़िवादी खेल माना जाता था। बल्लेबाज़ों से उम्मीद की जाती थी कि वे सावधानीपूर्वक खेलें, रक्षात्मक तरीके अपनाएं और कभी भी अनावश्यक जोखिम न लें।
आर्थर वेलार्ड: क्रिकेट के आक्रामक क्रांतिकारी
आर्थर वेलार्ड का जन्म सोमरसेट की एक छोटी सी जगह पर हुआ था। वह एक ऐसे समय में पैदा हुए थे जब क्रिकेट का खेल पूरी तरह से अलग था। लेकिन वेलार्ड के पास एक अलग ही सोच थी। वह क्रिकेट को सिर्फ बचाव का खेल नहीं मानते थे। उनका मानना था कि बल्लेबाज़ को आक्रामक होना चाहिए, साहसिक निर्णय लेने चाहिए और विरोधी टीम को दबाव में रखना चाहिए।
1930 के दशक में जब वेलार्ड अपने खेल की चोटी पर थे, तब उन्होंने ऐसी छक्कों की बारिश की जो उस समय के लिए बिल्कुल अभूतपूर्व थी। उन्होंने पांच सौ से अधिक छक्के जड़े, जो उस समय के लिए एक अकल्पनीय संख्या थी। जब आप इस बात को समझते हैं कि कैसे क्रिकेट खेला जाता था, तो वेलार्ड की उपलब्धि और भी प्रभावशाली लगती है।
वेलार्ड की बल्लेबाज़ी का अंदाज़ा इसी बात से लगा सकते हैं कि वह हर गेंद को मारने की कोशिश करते थे। उन्होंने डर नहीं दिखाया, न ही किसी गेंदबाज़ को सम्मान के साथ रक्षा की नीति अपनाई। बल्कि वह तो सीधे आगे बढ़कर गेंद को लंबे छक्कों में तब्दील कर देते थे। यह अंग्रेजी क्रिकेट के लिए एक बिल्कुल नई और क्रांतिकारी बात थी।
वेलार्ड के समय में क्रिकेट की परिस्थितियां
1930 के दशक की क्रिकेट का माहौल आज के समय से बिल्कुल अलग था। उस समय पिच की गुणवत्ता आज जैसी अच्छी नहीं होती थी। क्षेत्ररक्षण की रणनीति भी बिल्कुल अलग थी। लेकिन इन सभी चुनौतियों के बावजूद, आर्थर वेलार्ड ने यह साबित कर दिया कि सही प्रतिभा और साहस हो, तो कोई भी असंभव नहीं है।
वेलार्ड के समय में क्रिकेट के अधिकांश स्टेडियम छोटे-छोटे थे। लेकिन फिर भी उन्होंने इतनी दूरी तक गेंदें मारीं कि दर्शकों के बीच एक अलग ही उत्साह का माहौल बन गया। उनके छक्के देखकर युवा खिलाड़ियों में एक नई प्रेरणा जगी। क्रिकेट को सिर्फ रक्षात्मक खेल के रूप में नहीं, बल्कि एक आक्रामक और मनोरंजक खेल के रूप में देखने की परंपरा शुरू हुई।
वेलार्ड की विरासत और आधुनिक क्रिकेट
आज जब हम रोहित शर्मा को देखते हैं, तो असल में हम आर्थर वेलार्ड की परंपरा को देखते हैं। रोहित, विराट कोहली, डेविड वार्नर और अन्य आधुनिक खिलाड़ियों की आक्रामक बल्लेबाज़ी की नींव वेलार्ड ने ही तैयार की थी। वह वह आदमी थे जिन्होंने क्रिकेट को बदला और नई दिशा दी।
वेलार्ड की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे इंसान की कहानी है जो अपने समय से आगे सोचता था। जो परंपराओं को चुनौती देता था और नई संभावनाओं को तलाशता था। उनके इसी साहस और दूरदर्शिता के कारण क्रिकेट का खेल आज वह रूप ले पाया है, जिसमें हिंसक और आक्रामक बल्लेबाज़ी को न सिर्फ स्वीकृति दी गई है, बल्कि सराहा भी जाता है।
आज का क्रिकेट आधुनिक, तेज़ और रोमांचकारी है। टी-टwenty क्रिकेट ने आक्रामक खेल की परंपरा को और भी मजबूत किया है। लेकिन इसकी शुरुआत कहीं न कहीं आर्थर वेलार्ड से ही हुई थी। उन्होंने जो बीज बोया था, वह आज एक विशाल वृक्ष बन गया है।
रोहित शर्मा आजकल के सर्वश्रेष्ठ छक्का मारने वाले खिलाड़ी हो सकते हैं, लेकिन असल में पहला 'हिटमैन' तो आर्थर वेलार्ड ही थे। उनकी यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी। क्रिकेट का इतिहास, जब भी लिखा जाएगा, आर्थर वेलार्ड का नाम ज़रूर दर्ज होगा। क्योंकि वह वह आदमी थे जिन्होंने साबित किया कि खेल में नई चीजों की गुंजाइश हमेशा होती है।




