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Saturday, 03 October 2026
राजनीति

बलोच नेता की नेतन्याहू को चिट्ठी, पाकिस्तान पर आरोप

author
Komal
संवाददाता
📅 11 April 2026, 5:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
बलोच नेता की नेतन्याहू को चिट्ठी, पाकिस्तान पर आरोप
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम एशिया के गहराते संकट के बीच बलोच और सिंधी कार्यकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक पत्र भेजा है जिसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक चालों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित कर रहा है और साथ ही चरमपंथी संगठनों को संरक्षण प्रदान कर रहा है।

बलोच और सिंधी कार्यकर्ताओं की ओर से भेजे गए इस पत्र की सामग्री अत्यंत गंभीर और विचारणीय है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की सरकार अपनी राजनीतिक स्वार्थों के लिए अंतरराष्ट्रीय मामलों में हस्तक्षेप कर रही है। इस पत्र के माध्यम से इन कार्यकर्ताओं ने विश्व के प्रभावशाली नेताओं का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।

पाकिस्तान की द्वैध नीति पर कड़ा प्रहार

पत्र में पाकिस्तान की द्वैध नीति को लेकर कड़े शब्दों में आलोचना की गई है। बलोच कार्यकर्ताओं ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच शांति की बातचीत में मध्यस्थता की भूमिका निभाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर वह हमास और अन्य चरमपंथी संगठनों को न केवल आश्रय दे रही है बल्कि उन्हें संरक्षण भी प्रदान कर रही है।

इस पत्र के अनुसार, पाकिस्तान की यह द्वैध नीति क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। जिन संगठनों को पाकिस्तान आश्रय दे रहा है, वे न केवल इस्राइल के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए एक खतरा हैं। बलोच कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपनी इस नीति से नहीं हटता, तब तक पश्चिम एशिया में कोई स्थायी शांति संभव नहीं है।

भारत की भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव

पत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण बात कही गई है कि भारत की भागीदारी के बिना क्षेत्र में कोई भी शांति प्रक्रिया सफल नहीं हो सकती। बलोच और सिंधी कार्यकर्ताओं का तर्क है कि भारत इस क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण राष्ट्र है और दक्षिण एशिया की राजनीति में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। पश्चिम एशिया की शांति प्रक्रिया में भारत को शामिल किए बिना कोई भी प्रयास अधूरा माना जा सकता है।

कार्यकर्ताओं के अनुसार, भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र है जो अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति के सिद्धांतों पर विश्वास रखता है। वह न केवल इस क्षेत्र की शांति के लिए बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए एक सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। इसीलिए उन्होंने भारत को इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में शामिल होने का आह्वान किया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

इस पत्र में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी एक महत्वपूर्ण अपील की गई है। बलोच और सिंधी कार्यकर्ताओं ने विश्व के सभी लोकतांत्रिक राष्ट्रों से आग्रह किया है कि वे पाकिस्तान की द्वैध नीति को गंभीरता से लें और उस पर दबाव डालें ताकि वह अपने रवैये में बदलाव लाए।

कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने अंदर के चरमपंथ को नियंत्रित नहीं करता, तब तक न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरा विश्व असुरक्षित रहेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी कहा है कि वह पाकिस्तान की कूटनीतिक चालों से सचेत रहे और किसी भी शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

यह पत्र न केवल एक राजनीतिक बयान है बल्कि एक गंभीर चेतावनी भी है। इसमें बलोच और सिंधी कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभवों और तथ्यों के आधार पर पाकिस्तान की नीतियों की आलोचना की है। उनका विश्वास है कि उनकी इस आवाज को विश्व के प्रभावशाली नेताओं को सुनना चाहिए और इसे गंभीरता से लेना चाहिए। पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए न केवल राजनीतिक समझदारी बल्कि सच्ची मध्यस्थता और पारदर्शी नीतियों की जरूरत है जो वर्तमान में पाकिस्तान से प्रदर्शित नहीं हो रही है।