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Thursday, 21 May 2026
समाचार

मथुरा नाव हादसा: लाइव वीडियो और चश्मदीद की कहानी

author
Komal
संवाददाता
📅 11 April 2026, 5:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 288 views
मथुरा नाव हादसा: लाइव वीडियो और चश्मदीद की कहानी
📷 aarpaarkhabar.com

मथुरा के वृंदावन घाट पर शुक्रवार दोपहर एक भयानक हादसा हुआ जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। यमुना रिवर फ्रंट विकास परियोजना के तहत पांटून पुल को हटाए जाने के दौरान एक मोटरबोट पलट गई और इस त्रासदी में दस लोगों की जान चली गई। यह हादसा न केवल एक दुर्घटना थी बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा उपायों की पूर्ण अवहेलना का प्रमाण साबित हुआ।

जो लाइव वीडियो सामने आया है उससे पूरी घटना का क्रम स्पष्ट हो गया है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि जेसीबी की खुरपी से जबरदस्ती पीपों को खींचते हुए हटाया जा रहा था। इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी कोई सुरक्षा उपाय नहीं दिखता। न तो उस क्षेत्र को प्रतिबंधित किया गया था और न ही किसी को आगाह किया गया था कि वहां खतरनाक काम चल रहा है। लोग और नाविक पूरी तरह से इस काम की जानकारी से बेखबर थे।

चश्मदीद की जुबानी पूरी कहानी

घटनास्थल पर मौजूद कई गवाहों ने जो बातें बताई हैं वो रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। एक गवाह के अनुसार सब कुछ कुछ ही सेकंड में हुआ। पहले तो कोई समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। जेसीबी से अचानक जोरदार झटका लगा और मोटरबोट पलट गई। पानी में गिरे लोग चीख-पुकार कर रहे थे लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

एक अन्य चश्मदीद ने बताया कि उस समय घाट पर काफी भीड़ थी क्योंकि शुक्रवार का दिन था और श्रद्धालु यमुना में स्नान करने आए थे। जब नाव पलटी तो लोग घबरा गए। कुछ लोग तुरंत पानी में कूद गए बचाव के लिए लेकिन अंधेरे पानी और तेज बहाव के कारण सभी को बचाना संभव नहीं हो सका। स्थानीय युवाओं और नाविकों की तत्परता से कुछ लोगों को तो बचा लिया गया लेकिन दस लोगों का कोई पता नहीं चल सका।

सुरक्षा उपायों की कमी का सवाल

यह हादसा पूरी तरह से रोका जा सकता था अगर सही सुरक्षा प्रबंध किए गए होते। जब यमुना रिवर फ्रंट परियोजना के तहत ऐसे खतरनाक निर्माण कार्य चल रहे हों तो उस क्षेत्र को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर देना चाहिए। घाट पर नाविकों को पहले से ही अवगत कराया जाना चाहिए था कि आने वाले घंटों में कोई भी नाव उस क्षेत्र से नहीं निकलेगी।

चश्मदीदों की बातों से यह भी साफ हो गया कि न तो कोई पुलिस की सुरक्षा थी और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी उस समय घाट पर मौजूद थे। पांटून पुल को हटाने का काम पूरी तरह से ठेकेदारों के जिम्मे छोड़ दिया गया था। इन ठेकेदारों को सुरक्षा का न तो कोई ज्ञान था और न ही उन्होंने कोई सावधानी बरती।

जांच और जवाबदेही की मांग

इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है। सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो वायरल हो गया है और लोग जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जिला प्रशासन और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच अपने हाथ में ले लिया है।

हालांकि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ठेकेदार कंपनी ने सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया। प्रशासन की ओर से कहा जा रहा है कि इस परियोजना की निगरानी के लिए कोई भी अधिकारी नियुक्त नहीं था। यह एक गंभीर चूक थी जिसकी कीमत दस लोगों की जान से चुकानी पड़ी।

मथुरा के जिलाधिकारी ने कहा है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी और सभी दोषियों को सजा दी जाएगी। पर्यावरण विभाग भी इस परियोजना की समीक्षा कर रहा है। यमुना रिवर फ्रंट विकास कार्य को अभी के लिए रोक दिया गया है जब तक सभी सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित नहीं किया जाता।

इस हादसे से सीख लेते हुए राज्य सरकार को सभी बड़ी विकास परियोजनाओं पर पुनः विचार करना चाहिए। यदि यमुना घाट पर इतनी बड़ी भीड़ न होती या यदि उस क्षेत्र को प्रतिबंधित कर दिया गया होता तो यह त्रासदी नहीं होती। चश्मदीदों की गवाही से यह साफ है कि यह एक पूर्वनिर्धारित लापरवाही थी जिसकी कीमत बेकसूर लोगों को चुकानी पड़ी।

लाइव वीडियो में जो दृश्य हैं वह पूरी तरह से दर्शाते हैं कि कैसे एक छोटी सी सावधानी से इतने सारे जीवन बचाए जा सकते थे। मथुरा के इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे को हमेशा एक चेतावनी के तौर पर याद रखा जाना चाहिए कि विकास के नाम पर जनता की जान से कभी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए।