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Thursday, 21 May 2026
विश्व

अमेरिका ने ईरानी मूल के लोगों का ग्रीन कार्ड रद्द किया

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Komal
संवाददाता
📅 12 April 2026, 7:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 507 views
अमेरिका ने ईरानी मूल के लोगों का ग्रीन कार्ड रद्द किया
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिका की कड़ी नीति का शिकार हो रहे हैं ईरानी मूल के लोग

एक बेहद चिंताजनक और विवादास्पद कदम में अमेरिका ने ईरानी मूल के लोगों के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत अमेरिका में रह रहे ईरान से संबंध रखने वाले लोगों का ग्रीन कार्ड रद्द किया जा रहा है और उन्हें देश से निकाले जाने की तैयारी की जा रही है। यह एक बहुत ही विचित्र स्थिति है क्योंकि एक तरफ तो अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ताएं चल रही हैं, और दूसरी तरफ अमेरिका उन लोगों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है जिनका ईरान से कोई न कोई संबंध है।

इस मुद्दे को लेकर अमेरिकी सरकार की नीति काफी सख्त बनाई गई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जो भी व्यक्ति ईरान से किसी भी तरह का संबंध रखता है या ईरान के साथ किसी भी प्रकार की आर्थिक या राजनीतिक गतिविधि में लिप्त है, उसके ग्रीन कार्ड को रद्द किया जा सकता है। यह नीति काफी सामान्य शर्तों पर लागू की जा रही है, जिससे हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं।

जो लोग अमेरिका में बसे हुए हैं और वर्षों से यहां अपना जीवन यापन कर रहे हैं, उनके लिए यह एक बेहद कठोर निर्णय है। कई परिवार ऐसे भी हैं जिनके सदस्य ईरान से होने के कारण अब अपनी नागरिकता खोने का सामना कर रहे हैं। यह एक बहुत ही गंभीर मानवाधिकार का मुद्दा भी बन गया है।

डिपोर्टेशन की प्रक्रिया और इसके परिणाम

अमेरिकी सरकार ने इन लोगों को डिपोर्ट करने की पूरी तैयारी कर ली है। इस प्रक्रिया में अमेरिकी इमिग्रेशन विभाग बहुत ही सख्त रुख अपना रहा है। जिन लोगों का ग्रीन कार्ड रद्द किया जा रहा है, उन्हें कुछ महीनों में देश छोड़ने के लिए नोटिस दिया जा रहा है। कोई भी इस आदेश के खिलाफ अपील नहीं कर सकता है, और न ही कोई छूट दी जा रही है।

डिपोर्टेशन की इस प्रक्रिया के कारण कई परिवार बिखर रहे हैं। उन लोगों के पास अपने अमेरिकी पति-पत्नी और बच्चे भी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें देश छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। यह एक मानवीय त्रासदी है जिसका कोई हल नजर नहीं आ रहा है।

अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों के अनुसार, वे इस नीति को पूरी सख्ती से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा है कि कोई भी ऐसा व्यक्ति जो ईरान से किसी भी प्रकार से जुड़ा हुआ है, वह अमेरिका में रहने के लिए योग्य नहीं है। इस नीति के तहत पहले ही हजारों लोगों के ग्रीन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं।

शांति वार्ता और यह विरोधाभास

जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ताएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका अपने देश में ईरानी मूल के लोगों को निकालने की नीति अपना रहा है। यह एक बहुत ही विचित्र और विरोधाभासी स्थिति है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, यह अमेरिका की ईरान के प्रति दोहरी नीति को दर्शाता है।

शांति वार्ता में अमेरिका एक शांतिप्रिय देश का रुख अपना रहा है, जबकि घरेलू स्तर पर वह ईरानी मूल के लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहा है। यह बिल्कुल समझ से परे है कि अमेरिका एक तरफ तो ईरान से बातचीत करना चाहता है और दूसरी तरफ ईरानी लोगों को अपने देश से निकालना चाहता है।

इस नीति से अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचा है। विश्व के कई देशों ने इस कदम की आलोचना की है और कहा है कि यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र भी इस मुद्दे पर अमेरिका को नोटिस दे चुका है और कहा है कि यह नीति अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा नुकसान उन मासूम लोगों को हो रहा है जो वर्षों से अमेरिका में रह रहे हैं और अपनी जीविका भी यहीं कमा रहे हैं। उनके परिवार यहां पर हैं, उनके बच्चे यहीं पर स्कूल जाते हैं, लेकिन आज उन्हें सब कुछ छोड़कर जाना पड़ रहा है। यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जिसमें किसी को कोई विकल्प नहीं दिया जा रहा है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक विवाद होने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका को इस नीति के लिए काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन अमेरिकी सरकार अभी अपने इस निर्णय पर अटल है और किसी भी तरह की पीछे हटने की बात नहीं कर रही है। यह एक गंभीर मानवाधिकार का विषय है जिसपर विश्व स्तर पर ध्यान दिया जाना चाहिए।