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Wednesday, 19 August 2026
राजनीति

बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे: अमित शाह

author
Komal
संवाददाता
📅 15 April 2026, 5:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 301 views
बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बनने देंगे: अमित शाह
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से तूफान मच गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक आक्रामक बयान देते हुए कहा है कि अगर भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आती है, तो बंगाल में किसी भी परिस्थिति में बाबरी मस्जिद जैसी किसी भी मस्जिद का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने इस मुद्दे को चुनावी अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है और ममता बनर्जी की सरकार पर जमकर निशाना साधा है।

अमित शाह के इस बयान से बंगाल की राजनीति में एक नया आयाम जुड़ गया है। उन्होंने सीधे-सीधे हुमायूं कबीर को ममता बनर्जी का एजेंट बताया है और कहा है कि वह केवल ममता की इच्छा पूरी करने के लिए ही काम कर रहे हैं। शाह का मानना है कि हुमायूं कबीर की इस तरह की योजनाएं राज्य में धार्मिक ध्रुवीकरण पैदा करने के लिए डिजाइन की गई हैं।

अमित शाह का कड़ा बयान और राजनीतिक रणनीति

अमित शाह ने अपने बयान में साफ कहा है कि कोई भी आत्मसम्मान वाला नागरिक ऐसी किसी भी योजना को बर्दाश्त नहीं कर सकता जो पश्चिम बंगाल में सामाजिक सद्भावना को नुकसान पहुंचाए। उन्होंने यह भी जोर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी राज्य में कानून और व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। शाह का मानना है कि ममता बनर्जी की सरकार राज्य में अराजकता को बढ़ावा दे रही है और ऐसे विवादास्पद प्रस्तावों के माध्यम से राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश कर रही है।

इस बयान को राजनीतिक विश्लेषकों की तरफ से भाजपा की एक सुचिंतित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को उठाकर भाजपा अपना वोट बेस बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अमित शाह के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट है कि भाजपा इस चुनाव में अपने धार्मिक एजेंडा को प्रमुखता दे रही है।

शाह ने अपने भाषण में कई बार यह जोर दिया है कि भाजपा राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक शांति के मामले में कोई समझौता नहीं कर सकती। उनके अनुसार, ममता बनर्जी की सरकार अल्पसंख्यकों को तुष्ट करने के लिए ऐसी योजनाओं को मंजूरी दे रही है जो दीर्घकालीन समाज को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

हुमायूं कबीर और ममता बनर्जी पर निशाना

अमित शाह के आरोपों के अनुसार, हुमायूं कबीर केवल ममता बनर्जी के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। शाह का कहना है कि कबीर की यह मस्जिद निर्माण योजना पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है। उन्होंने कहा है कि ममता बनर्जी अपनी सरकार के विफलता को छिपाने के लिए ऐसे धार्मिक मुद्दों को उठा रहीं हैं।

शाह के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि भाजपा ममता बनर्जी की सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों को चुनौती दे रही है। उनके अनुसार, ममता की सरकार विकास और रोजगार के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक मुद्दों को इस्तेमाल कर रही है। शाह का यह दावा है कि इस तरह की नीतियां पश्चिम बंगाल को विभाजित और कमजोर कर रही हैं।

हुमायूं कबीर, जो दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हैं, के खिलाफ शाह की आलोचना बेहद तीव्र है। शाह ने कहा है कि कबीर अपने मंत्रिपद का उपयोग करके ममता को राजनीतिक रूप से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। यह आरोप काफी गंभीर है क्योंकि यह एक केंद्रीय मंत्री के खिलाफ सरकार के भीतर ही विभाजन को दर्शाता है।

चुनावी परिदृश्य और सामाजिक प्रभाव

पश्चिम बंगाल के आसन्न विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा एक केंद्रीय भूमिका निभाने वाला प्रतीत हो रहा है। अमित शाह के इस कड़े बयान से भाजपा अपने समर्थकों को लामबंद करने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह एक ऐसी रणनीति है जो पहले के चुनावों में भाजपा के लिए कामयाब साबित हुई है।

दूसरी ओर, ममता बनर्जी की सरकार और उनके समर्थक इस बयान को भाजपा की धार्मिक राजनीति का एक उदाहरण मानते हैं। वे यह भी कहते हैं कि भाजपा पश्चिम बंगाल को विभाजित करने की कोशिश कर रही है और हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।

अमित शाह के इस बयान का पश्चिम बंगाल के समाज पर गहरा असर पड़ा है। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं हैं। कुछ संगठनों ने शाह की आलोचना की है, जबकि अन्य ने उनके बयान का समर्थन किया है।

यह स्पष्ट है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति अब धार्मिक ध्रुवीकरण की ओर अग्रसर हो रही है। अमित शाह के इस कड़े बयान ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा चुनावी परिणामों को किस तरह प्रभावित करता है।