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Thursday, 21 May 2026
समाचार

धरणी और हरिवंशराय बच्चन की प्रसिद्ध कविता

author
Komal
संवाददाता
📅 15 April 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 473 views
धरणी और हरिवंशराय बच्चन की प्रसिद्ध कविता
📷 aarpaarkhabar.com

आज का शब्द: धरणी और हरिवंशराय बच्चन की कविता

हिंदी साहित्य के इतिहास में हरिवंशराय बच्चन का नाम अत्यंत सम्मान और श्रद्धा के साथ लिया जाता है। वे न केवल एक महान कवि थे बल्कि एक संवेदनशील साहित्यकार, अनुवादक और विचारक भी थे। उनकी कविताओं में जीवन के विविध रंग, भावनाओं की गहराई और मानवीय संवेदनशीलता का अद्भुत मिश्रण मिलता है। आज का शब्द हमें उनकी प्रसिद्ध कविता 'धरणी', 'मयूरी' और 'नाच' जैसी कालजयी रचनाओं की ओर ले जाता है जो आज भी पाठकों के मन को छूती हैं।

हरिवंशराय बच्चन का जन्म सन 1907 में इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने अपने काव्य में छायावाद और आधुनिकता का सुंदर समन्वय किया। उनकी कविताएं पढ़ने से लगता है कि कवि सीधे आपके हृदय से बातें कर रहा है। 'धरणी' शब्द का अर्थ पृथ्वी से है, और बच्चन ने इस शब्द को अपनी कविता में किस प्रकार जीवंत बनाया है, यह सचमुच अद्भुत है।

धरणी: पृथ्वी का प्रेम और भावुकता

बच्चन की कविता 'धरणी' में पृथ्वी को एक माता के रूप में दर्शाया गया है जो सभी जीवों को पालन-पोषण करती है। इस कविता में कवि ने धरणी के प्रति अपना प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त की है। वह बताते हैं कि कैसे यह पृथ्वी हमारे पूर्वजों की कब्र भी है और हमारे भविष्य की नींव भी। धरणी की इस द्वैत भूमिका को दर्शाना बच्चन की काव्य कला का एक अनूठा उदाहरण है।

कविता में बच्चन जीवन और मृत्यु के चक्र को समझाते हैं। वे दिखाते हैं कि कैसे धरणी सभी को अपनी गोद में लेती है, सभी को अपना हिस्सा बनाती है। यह कविता न केवल पर्यावरण के प्रति चेतना जगाती है बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि हम सब इस पृथ्वी के साथ एक अभिन्न संबंध रखते हैं। बच्चन की भाषा सरल है फिर भी उसमें गहरी अर्थवत्ता है।

मयूरी और नाच: प्रकृति का उत्सव

'मयूरी' कविता में बच्चन ने एक मयूरी के नृत्य को केंद्रबिंदु बनाया है। यह कविता प्रकृति के सौंदर्य और जीवन के आनंद का एक अद्भुत चित्रण है। मयूर की सुंदरता और उसके नाचने की मुद्राएं कवि को आत्मविभोर कर देती हैं। इस कविता में बच्चन ने प्रकृति और मानव भावनाओं के बीच एक गहरा संबंध स्थापित किया है।

'नाच' कविता बच्चन की एक और उत्कृष्ट रचना है जहां नृत्य को जीवन की गतिविधि का प्रतीक बनाया गया है। यह कविता सृजनशीलता, आनंद और मुक्ति का एक अद्भुत विवरण है। कवि कहता है कि नाच ही जीवन है, नाच ही मुक्ति है। इस कविता के माध्यम से बच्चन ने दिखाया कि कैसे मानवीय अभिव्यक्ति का सबसे शुद्ध रूप नृत्य में मिलता है।

बच्चन की इन कविताओं में 'मगन-मन नाच' का कहना बहुत गहरा अर्थ रखता है। जब मन पूरी तरह मगन हो जाता है, जब वह बाहरी जगत की परवाह न करके अपने आंतरिक आनंद में लीन हो जाता है, तब उसका नाच सबसे सुंदर होता है। यह बच्चन की काव्य दर्शन का सार है।

आज का शब्द: साहित्य और हमारा जीवन

हरिवंशराय बच्चन की कविताएं केवल साहित्य नहीं हैं, बल्कि वे हमारे जीवन दर्शन का एक अभिन्न अंग बन जाती हैं। उन्होंने जीवन के हर पहलू को अपनी कविता में समेटने का प्रयास किया। धरणी, मयूरी, नाच जैसी कविताएं हमें याद दिलाती हैं कि जीवन कितना सुंदर है और हमें इसे पूरी तरह जीने की जरूरत है।

बच्चन की भाषा शैली इतनी सरल और प्रभावशाली थी कि आम आदमी भी उनकी कविताओं को समझ सकता था। उन्होंने संस्कृत के कठिन शब्दों का उपयोग न करके हिंदी की सहज और मधुर भाषा का प्रयोग किया। इसीलिए उनकी कविताएं युगों से आगे निकल गईं और आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।

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हिंदी साहित्य की इस यात्रा में आप भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बच्चन की विरासत को समझें, उनकी कविताओं को पढ़ें और अपने मन के भावों को कविता के माध्यम से व्यक्त करें। हर दिन एक नया शब्द, एक नई कविता, एक नया विचार लेकर आता है। आइए, इस सुंदर काव्य यात्रा को एक साथ जारी रखें।