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Wednesday, 19 August 2026
खेल

नीरज चोपड़ा ने कोच पर लगाए मानसिक उत्पीड़न के आरोप

author
Komal
संवाददाता
📅 18 April 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 812 views
नीरज चोपड़ा ने कोच पर लगाए मानसिक उत्पीड़न के आरोप
📷 aarpaarkhabar.com

भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने अपने कोच के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। नीरज ने कहा है कि उनके कोच ने उन्हें मानसिक रूप से उत्पीड़ित किया है। यह खबर खेल जगत में एक बड़ा विवाद बन गई है। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले इस खिलाड़ी की आवाज सुनी जानी चाहिए।

नीरज चोपड़ा का खेल में योगदान अतुलनीय है। वह भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। टोक्यो ओलंपिक 2020 में उन्होंने भाला फेंक में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था। यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। पूरे देश ने उनके इस प्रदर्शन की प्रशंसा की थी। हालांकि, पेरिस ओलंपिक 2024 में उन्हें रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा।

पेरिस ओलंपिक में नीरज का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। वह स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद में गए थे। लेकिन दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद से नीरज के मन में कई सवाल उठे। उन्होंने महसूस किया कि उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। इसी क्रम में उन्होंने अपने कोच पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

कोच के खिलाफ आरोप

नीरज चोपड़ा ने बताया है कि उनके कोच का व्यवहार उनके साथ बिल्कुल उचित नहीं था। वह उन्हें लगातार दबाव में रखते थे। कोच की आलोचना हमेशा नकारात्मक और अपमानजनक होती थी। नीरज के अनुसार, कोच ने उन्हें कभी भी सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। बल्कि वह हमेशा नकारात्मक बातें ही कहते रहे। इस कारण नीरज का आत्मविश्वास प्रभावित हुआ।

खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा आजकल बहुत महत्वपूर्ण है। कोच का व्यवहार खिलाड़ी के प्रदर्शन पर सीधा प्रभाव डालता है। अगर कोच सकारात्मक और सहायक है, तो खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता है। लेकिन यदि कोच केवल आलोचना करता है, तो खिलाड़ी का आत्मविश्वास टूटने लगता है। नीरज के साथ भी यही हुआ। उनके कोच की नकारात्मक रवैया उनके खेल को प्रभावित करने लगा।

नीरज ने कहा कि उनके कोच उन्हें प्रशिक्षण के दौरान ही नहीं, बल्कि अन्य समय में भी परेशान करते थे। वह उन्हें निजी तरीके से भी अपमानित करते थे। इससे नीरज के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा। उन्होंने अपने प्रदर्शन में गिरावट महसूस की। यह मानसिक उत्पीड़न का ही परिणाम था। नीरज का मानना है कि अगर उन्हें सही मार्गदर्शन और समर्थन मिलता, तो वह पेरिस में स्वर्ण पदक जीत सकते थे।

भारतीय खेल प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

नीरज चोपड़ा के आरोप भारतीय खेल प्रणाली में एक गंभीर समस्या को उजागर करते हैं। भारत में कोचिंग सिस्टम में सुधार की आवश्यकता है। कोचों को न केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के मानसिक विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। एक अच्छा कोच खिलाड़ी को प्रेरित करता है, अपमानित नहीं करता। वह उन्हें उनकी गलतियों से सीखने में मदद करता है, न कि उन्हें हीन महसूस कराता है।

भारतीय खेल मंत्रालय को इस मामले में गंभीरता से विचार करना चाहिए। राष्ट्रीय खेल संस्थानों में कोचों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मानसिक स्वास्थ्य और खिलाड़ी-कोच संबंधों पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए। खिलाड़ियों को भी शिकायत दर्ज करने के लिए एक सुरक्षित और निष्पक्ष तंत्र प्रदान किया जाना चाहिए।

नीरज चोपड़ा के मामले में जांच होनी चाहिए। अगर आरोप सच साबित होते हैं, तो कोच के खिलाफ उचित कदम उठाए जाने चाहिए। इससे अन्य कोचों को भी सचेत किया जा सकेगा। साथ ही, भारतीय खेल प्रणाली में सुधार भी हो सकेगा।

अन्य खिलाड़ियों की समान समस्याएं

नीरज चोपड़ा के आरोप अकेले नहीं हैं। भारत में कई खिलाड़ियों ने अपने कोचों की कठोर और अपमानजनक रवैये की शिकायत की है। सुमित अंतिल जैसे खिलाड़ियों ने पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीते हैं, लेकिन उन्हें भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारतीय खेल प्रणाली में बदलाव की जरूरत है। खिलाड़ियों के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

इस बात को समझना जरूरी है कि खेल केवल शारीरिक प्रशिक्षण नहीं है। यह मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास का भी हिस्सा है। एक खिलाड़ी को विश्वास, समर्थन और सकारात्मक प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। नीरज चोपड़ा की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इससे भारतीय खेल को बेहतर बनाने का मौका मिल सकता है। नीरज के जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सही समर्थन दिया जाए, तो वह आगे चलकर और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। भारत को अपने खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर ध्यान देना चाहिए।