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Saturday, 03 October 2026
राजनीति

महिला आरक्षण पर पीएम मोदी की विपक्ष को आलोचना

author
Komal
संवाददाता
📅 19 April 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 530 views
महिला आरक्षण पर पीएम मोदी की विपक्ष को आलोचना
📷 aarpaarkhabar.com

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के संशोधन विधेयक के गिरने के बाद से पूरे देश में राजनीतिक गहमागहमी मची हुई है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए इस महत्वपूर्ण बिल के गिरने की जिम्मेदारी विपक्षी दलों पर डाली है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक अवसर था जिसे विपक्ष ने खो दिया है।

पीएम ने सबसे ज्यादा कड़ी टिप्पणी भारतीय जनता पार्टी के मुख्य विरोधी दल कांग्रेस पर की है। मोदी जी ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस का मुख्य काम तो यही है कि राष्ट्रीय महत्व के बिलों को लटकाना, अटकाना और भटकाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं के उत्थान में बाधा डालने का काम कर रहा है और राष्ट्र के विकास में रुकावट पैदा कर रहा है।

यह पूरा संकट तब खड़ा हुआ जब लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को मतदान के लिए प्रस्तुत किया गया। बिल को पास करने के लिए सदन में आवश्यक संख्या में सांसद मौजूद नहीं रहे, जिससे मतदान प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा। इस पूरी स्थिति को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि यह एक षड्यंत्र है जो महिलाओं के अधिकारों को छीनने के लिए किया जा रहा है।

महिला आरक्षण बिल का महत्व और उद्देश्य

भारतीय संसद में महिला आरक्षण का विषय कई वर्षों से लंबित पड़ा है। इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करना है। यह बिल आने के बाद से देश में महिला सशक्तिकरण के सवाल पर व्यापक बहस हो रही है।

पीएम मोदी की सरकार का यह बिल महिलाओं को राजनीति में अधिक हिस्सेदारी दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। सरकार का मानना है कि यदि महिलाओं को संसद में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले, तो वे न केवल महिलाओं के हित की बात करेंगी, बल्कि देश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी।

आंकड़ों के अनुसार, भारतीय लोकसभा में महिला सांसदों का प्रतिशत अभी भी बेहद कम है। वर्तमान समय में लोकसभा की कुल सीटों में से केवल 10 से 15 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं बैठी हैं। यह आंकड़ा विकसित और विकासशील दोनों देशों के मुकाबले बहुत कम है। महिला आरक्षण बिल इसी अंतर को पाटने का एक प्रयास है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और चिंताएं

विपक्षी दलों ने इस बिल के विरुद्ध कई तरह की आपत्तियां उठाई हैं। कुछ विपक्षी सांसदों का कहना है कि महिला आरक्षण के साथ-साथ अन्य पिछड़े वर्गों के लिए भी आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए। वे इसे अधूरा समाधान मानते हैं और पूरी समस्या को बहु-आयामी तरीके से देखने की मांग कर रहे हैं।

कुछ दलों की आपत्ति यह भी है कि महिला आरक्षण बिल को अगर वर्तमान समय में पास कर दिया जाएगा, तो यह आने वाले चुनावों को प्रभावित करेगा और राजनीतिक समीकरण बदल देगा। विपक्ष का यह भी मानना है कि बिल को पास करने से पहले सभी पक्षों से पर्याप्त सहमति लेनी चाहिए।

हालांकि, पीएम मोदी के अनुसार विपक्ष की ये सभी आपत्तियां महज बहाने हैं। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष सच में महिला सशक्तिकरण में विश्वास करता है, तो उसे इस बिल को पास करने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। पीएम का मानना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं के अधिकारों को बलि चढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

भविष्य में आने वाली चुनौतियां और संभावनाएं

बिल के गिरने के बाद से सरकार इसे फिर से लोकसभा में प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि इस बार बिल को पास करवाने के लिए पर्याप्त संख्या में सांसद सदन में उपस्थित हों। पीएम मोदी ने विपक्ष को पुनः आगाह किया है कि यह फैसला उनकी राजनीतिक विरासत को प्रभावित करेगा।

देश के विभिन्न महिला संगठनों ने इस बिल के पक्ष में अपनी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि महिला आरक्षण एक दीर्घकालीन और जरूरी कदम है जो भारतीय संसद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाएगा। महिला कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस बिल के गिरने से महिला आंदोलन को एक बड़ा झटका लगा है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बिल को फिर से कैसे लाती है और विपक्ष का रवैया क्या रहता है। पीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह मुद्दा अब केवल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और राजनीतिक समझदारी के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है। महिला आरक्षण बिल निश्चित रूप से आने वाले समय में भारतीय राजनीति का एक प्रमुख विषय बना रहेगा।