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Thursday, 21 May 2026
समाचार

नोएडा हिंसा: सॉफ्टवेयर इंजीनियर की साजिश का खुलासा

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Komal
संवाददाता
📅 19 April 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 598 views
नोएडा हिंसा: सॉफ्टवेयर इंजीनियर की साजिश का खुलासा
📷 aarpaarkhabar.com

नोएडा में हुई भीषण हिंसा की पूरी साजिश एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने रची थी। यह खुलासा पुलिस की जांच के दौरान सामने आया है। मास्टरमाइंड आदित्य आनंद नाम के इस इंजीनियर ने एक विस्तृत योजना बनाई थी कि कैसे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक भीड़ में तब्दील किया जाए। पुलिस के अनुसार, आदित्य ने 30 मार्च से लेकर 1 अप्रैल तक लगातार कई बैठकें अपने फ्लैट पर आयोजित की थीं।

नोएडा के सेक्टर 37 में स्थित अरुण विहार कॉलोनी में जो हिंसक घटनाएं हुईं, उनके पीछे यही सॉफ्टवेयर इंजीनियर मुख्य कारण था। आदित्य एक प्रमुख तकनीकी कंपनी में काम करता था, लेकिन वह अपने काम के समय को सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने में लगा रहा था। उसके द्वारा तैयार की गई योजना बेहद परिष्कृत और सुव्यवस्थित थी।

साजिश का पूरा खुलासा

जांच एजेंसियों ने बताया कि आदित्य ने तीन दिनों में कुल पाँच बैठकें आयोजित की थीं। इन बैठकों में विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल थे। हर बैठक में एक विशेष एजेंडा होता था। पहली बैठक में प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की गई, दूसरी में भीड़ को भड़काने के तरीके सीखाए गए, और तीसरी बैठक में हिंसा को अंजाम देने की व्यावहारिक रणनीति बनाई गई। आदित्य ने अपनी तकनीकी कौशल का उपयोग करके सोशल मीडिया पर एक व्यापक प्रचार अभियान चलाया था।

इसके लिए उसने फेक अकाउंट्स बनाए और विभिन्न समूहों में भड़काऊ संदेश भेजे। उसके मेसेजिंग में इतनी तकनीकी पारदर्शिता थी कि आम लोगों को पता ही नहीं चल पाया कि वे किसी की प्रोग्रामिंग का हिस्सा बन रहे हैं। आदित्य ने अपने कंप्यूटर स्किल्स का गलत इस्तेमाल करके हजारों लोगों को निशाना बनाया।

यह पूरी योजना इतनी संगठित थी कि पुलिस को शुरुआत में इसके पीछे एक बड़े संगठन के होने का संदेह था। लेकिन जब आदित्य की गिरफ्तारी हुई और उसके फ्लैट और डिवाइसों की तलाशी ली गई, तो सभी सबूत मिल गए। उसके लैपटॉप में साजिश की पूरी चेन मिली, जिसमें टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो संदेश शामिल थे।

आदित्य की पृष्ठभूमि और प्रेरणा

आदित्य आनंद उत्तर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित परिवार से आता था। उसके माता-पिता व्यवसायी थे और उसका परिवार समाज में सम्मानित माना जाता था। फिर भी, कहीं न कहीं इस युवा की मानसिकता में कहीं विकृति आ गई थी। पुलिस की जांच के अनुसार, आदित्य किसी विशेष विचारधारा से प्रभावित था। उसने कई समाचार चैनलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उकसाऊ सामग्री देखी थी, जिसने उसके विचारों को प्रभावित किया।

आदित्य के डिजिटल फुटप्रिंट्स से पता चलता है कि वह विभिन्न अलगाववादी समूहों के ऑनलाइन मंचों पर सक्रिय था। उसने बहुत समय इंटरनेट पर झूठी जानकारी फैलाने में बिताया। यह युवा, जो आईटी क्षेत्र में काम करता था और अच्छी आय अर्जित करता था, उसके पास हिंसा के लिए कोई वास्तविक कारण नहीं था। लेकिन ऑनलाइन प्रोपेगेंडा का असर इतना गहरा था कि उसने वास्तविक जीवन में भी हिंसक कार्य करने का फैसला किया।

हिंसा की घटना और परिणाम

30 मार्च की शाम को नोएडा के सेक्टर 37 में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहा था। सैकड़ों लोग एक सार्वजनिक समस्या के विरुद्ध अपनी आवाज उठा रहे थे। लेकिन आदित्य के निर्देश पर कुछ लोगों ने अचानक भीड़ को भड़काना शुरू कर दिया। पहले शांतिपूर्ण नारे लगाए जा रहे थे, फिर अचानक कुछ लोगों ने दुकानों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद, हिंसा नियंत्रण से बाहर हो गई।

इस घटना में कई दुकानें तोड़ी गईं, कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचा, और अनेक व्यक्तियों को चोटें आईं। पुलिस को तीन बार लाठीचार्ज करना पड़ा। कुल मिलाकर, करीब पचास लोग इस हिंसा में घायल हुए। आदित्य की योजना पूरी तरह से कामयाब हो गई थी - एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक दंगे में तब्दील कर दिया गया।

पुलिस की जांच और गिरफ्तारी

नोएडा पुलिस ने घटना के तुरंत बाद जांच शुरू कर दी। शुरुआत में तो सभी को लगा कि यह सहज भीड़ का आवेग था, लेकिन जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखे और गवाहों की पूछताछ की, तो एक संगठित साजिश का संकेत मिलने लगा। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर की गई गतिविधियों को ट्रैक करते हुए, पुलिस आदित्य तक पहुंच गई।

आदित्य की गिरफ्तारी के बाद, पुलिस के पास उसके सभी डिजिटल डिवाइस हैं। इन उपकरणों में पाई गई जानकारी से साजिश का पूरा तांता खुल गया है। आदित्य ने अपने विभिन्न ग्रुप्स में भेजे गए संदेशों में हिंसा को प्रोत्साहित करने के लिए सांप्रदायिक भाषा का इस्तेमाल किया था। उसके कुछ संदेशों में सीधे निर्देश दिए गए थे कि कहां पत्थरबाजी करनी है और कहां आग लगानी है।

यह मामला एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि कैसे तकनीकी ज्ञान का उपयोग समाज को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। आदित्य जैसे अच्छी शिक्षा प्राप्त और आर्थिक रूप से सक्षम युवाओं के लिए भी चरमपंथ का खतरा है। इस घटना से यह भी पता चलता है कि सोशल मीडिया पर अनियंत्रित प्रोपेगेंडा समाज में कितना बड़ा खतरा बन सकता है। पुलिस अब आदित्य के अन्य संपर्कों की जांच कर रही है और अतिरिक्त गिरफ्तारियों की संभावना है।