शहबाज शरीफ ने पेजेश्कियान को फोन, इस्लामाबाद टॉक 2.0
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को फोन पर संपर्क किया है। यह बातचीत इस्लामाबाद में होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता के संदर्भ में बेहद अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर चर्चा का यह सिलसिला काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। शहबाज शरीफ की इस पहल से साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान इस्लामाबाद वार्ता के दूसरे दौर में ईरान को शामिल करने के लिए कितना गंभीर है।
इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इसके पहले जो बातचीत हुई थी, उससे सभी पक्षों में सकारात्मक संकेत मिले थे। अब शहबाज शरीफ की ईरानी राष्ट्रपति से सीधी बातचीत से यह स्पष्ट हो रहा है कि पाकिस्तान ईरान को इस प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा बनाना चाहता है। ईरान इस क्षेत्र में एक शक्तिशाली खिलाड़ी है और इसकी भागीदारी किसी भी समझौते को अधिक प्रभावी बना सकती है।
ईरान की भूमिका और क्षेत्रीय महत्व
ईरान का भू-राजनीतिक स्थान इस क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के बीच संबंधों को देखते हुए ईरान की भागीदारी इस्लामाबाद वार्ता को काफी मजबूत बना सकती है। शहबाज शरीफ ने पेजेश्कियान से जो बातचीत की है, उसमें संभवत: इसी महत्व को ध्यान में रखा गया है। ईरान के पास क्षेत्रीय मामलों में व्यापक प्रभाव है और इसके विचारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्षेत्र में आतंकवाद, सीमावर्ती मुद्दों, व्यापार और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां हैं। ईरान इन सभी मुद्दों में अपना महत्वपूर्ण हित रखता है। पाकिस्तान यह समझता है कि बिना ईरान की सहमति और सहयोग के कोई भी दीर्घकालीन समाधान संभव नहीं हो सकता। इसलिए शहबाज शरीफ की यह पहल राजनीतिक समझदारी को दर्शाती है। ईरान के साथ सकारात्मक संबंध रखना पाकिस्तान के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि अन्य पड़ोसी देशों के साथ।
ईरान और पाकिस्तान के बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवादी गतिविधियां भी एक बड़ी चुनौती रही हैं। दोनों देश बलूचिस्तान क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करते आए हैं। इस्लामाबाद वार्ता में ईरान की भागीदारी इस तरह के मुद्दों पर भी एक समन्वित दृष्टिकोण विकसित करने में मदद कर सकती है।
शहबाज शरीफ की कूटनीतिक रणनीति
शहबाज शरीफ की यह पहल पाकिस्तान की बदली हुई क्षेत्रीय नीति को दर्शाती है। पाकिस्तान अब अकेले कार्य करने की बजाय एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाना चाहता है। इस्लामाबाद वार्ता को सफल बनाने के लिए क्षेत्रीय शक्तियों को साथ लेना आवश्यक है। शहबाज शरीफ ने पेजेश्कियान से सीधी बातचीत कर यह संकेत दिया है कि पाकिस्तान गंभीर है।
कूटनीति के दृष्टिकोण से देखें तो शहबाज शरीफ की यह कार्रवाई कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, यह पाकिस्तान की विदेश नीति में नई दिशा दर्शाता है। दूसरा, यह यह सुनिश्चित करता है कि क्षेत्रीय शक्तियां इस प्रक्रिया में शामिल हों। तीसरा, यह ईरान को संदेश देता है कि पाकिस्तान उसे महत्व देता है। फोन पर बातचीत की यह औपचारिकता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों नेताओं के बीच सीधे संवाद को दर्शाती है।
पेजेश्कियान पिछले कुछ सालों में ईरान की विदेश नीति को अधिक व्यावहारिक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। वे क्षेत्रीय सहयोग में विश्वास रखते हैं। ऐसे में शहबाज शरीफ की बातचीत पेजेश्कियान के विचारों के अनुरूप है। दोनों नेता समझते हैं कि क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान केवल सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से संभव है।
इस्लामाबाद टॉक 2.0 की सफलता की संभावनाएं
शहबाज शरीफ की यह पहल इस्लामाबाद टॉक 2.0 की सफलता की संभावनाओं को बढ़ाती है। अगर ईरान दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होता है तो यह वार्ता अधिक प्रभावी और व्यापक हो सकती है। ईरान की भागीदारी से अफगानिस्तान, तालिबान और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर भी अधिक सार्थक चर्चा संभव हो सकती है।
इस्लामाबाद वार्ता की पहली बैठक में जो सकारात्मक नतीजे निकले थे, वे दूसरे दौर में और गहरे हो सकते हैं। ईरान की भागीदारी से क्षेत्रीय स्थिरता और साझा हित के विषयों पर अधिक प्रभावी ढंग से बातचीत की जा सकेगी। आतंकवाद, ड्रग तस्करी, सीमावर्ती सुरक्षा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ईरान के दृष्टिकोण को समझना अत्यावश्यक है।
शहबाज शरीफ की इस कूटनीतिक पहल से साफ है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय सहयोग को लेकर गंभीर है। ईरान भी इस तरह की पहल का स्वागत करने की संभावना रखता है क्योंकि यह ईरान के क्षेत्रीय हितों के अनुरूप है। आने वाले समय में इस्लामाबाद वार्ता के दूसरे दौर में ईरान की भागीदारी क्षेत्र की शांति और समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।




