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Wednesday, 19 August 2026
राजनीति

पश्चिम बंगाल चुनाव: सीआरपीएफ को संवेदनशील बूथ

author
Komal
संवाददाता
📅 21 April 2026, 5:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 738 views
पश्चिम बंगाल चुनाव: सीआरपीएफ को संवेदनशील बूथ
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हिंसा की घटनाओं को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। खुफिया विभाग की संवेदनशील सूचना और चुनाव की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य के अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की सुरक्षा सीआरपीएफ को सौंपने का निर्णय लिया गया है। यह कदम पूरे राज्य में चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और स्वतंत्र बनाने के लिए उठाया गया है।

पश्चिम बंगाल के चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, गत चुनावों में विभिन्न मतदान केंद्रों पर हिंसा, धमकाधमकी और अन्य प्रकार की गड़बड़ियां देखी गई थीं। इसी के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय, निर्वाचन आयोग और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से ऐसे बूथों की पहचान की है, जहां चुनाव के दौरान हिंसा का खतरा अधिक है। ये बूथ बांग्लादेश सीमावर्ती क्षेत्रों, माओवादी प्रभावित इलाकों और सांप्रदायिक तनाव वाले इलाकों में स्थित हैं।

सीआरपीएफ को दिए गए आदेश के अनुसार, इन संवेदनशील मतदान केंद्रों पर बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। सीआरपीएफ के जवान मतदान से पहले, मतदान के दौरान और मतदान के बाद पूरे समय इन बूथों पर तैनात रहेंगे। इसके अलावा, इन स्थानों पर अतिरिक्त निगरानी कैमरे लगाए जाएंगे और डिजिटल रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी की जाएगी।

सीआरपीएफ की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था

सीआरपीएफ की टीमें इन संवेदनशील बूथों पर तैनात होकर मतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करेंगी। हर बूथ पर कम से कम दो सीआरपीएफ जवान मुख्य द्वार के पास तैनात रहेंगे, जबकि अतिरिक्त जवान आसपास के क्षेत्र में गश्त करते हुए नजर रखेंगे। निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार, सीआरपीएफ की टीमें बूथों से कम से कम पचास मीटर की दूरी पर एक नियंत्रण कक्ष भी स्थापित करेंगी।

इन नियंत्रण कक्षों से सभी आवश्यक सूचनाएं तुरंत जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजी जाएंगी। किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में तुरंत सुदृढ़ सहायता मंगवाई जा सकेगी। सीआरपीएफ के जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है कि वे किस प्रकार भीड़ को नियंत्रित करें, किस प्रकार मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किस प्रकार चुनावी कार्मिकों की सहायता करें।

खुफिया सूचना के आधार पर पहचान

पश्चिम बंगाल में कुल लगभग बत्तीस हजार मतदान केंद्र हैं, जिनमें से खुफिया विभाग ने करीब ढाई हजार बूथों को अति संवेदनशील और संवेदनशील श्रेणी में रखा है। इन बूथों की पहचान करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय, स्थानीय पुलिस विभाग और खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से काम किया है। विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह सूची तैयार की गई है।

इन संवेदनशील बूथों के आसपास के क्षेत्रों में गत चुनावों में हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई थीं। कहीं मतदाताओं के बीच झड़पें हुई थीं, तो कहीं चुनावी कार्मिकों को धमकाया गया था। कुछ इलाकों में बूथ कैप्चरिंग की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसी के अनुसार सीआरपीएफ को इन सभी बूथों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन और निर्वाचन आयोग के तालमेल

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जिला प्रशासकों ने सीआरपीएफ के साथ नियमित बैठकें करके चुनाव सुरक्षा की योजना तैयार की है। हर जिले में अलग-अलग कमांडो टीम तैनात की जाएंगी, जो तत्काल किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में कार्रवाई कर सकेंगी। राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीआरपीएफ के साथ पूर्ण सहयोग करें।

मतदान के दिन जिला प्रशासन के पास रियल टाइम रिपोर्टिंग सिस्टम होगा, जहां हर घंटे संवेदनशील बूथों से रिपोर्ट मिलेगी। इस व्यवस्था से चुनाव आयोग को तुरंत पता चल जाएगा कि कहां कोई समस्या है और वहां आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी। निर्वाचन आयोग ने साफ कहा है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण होंगे।

सीआरपीएफ की इस बड़ी तैनाती से यह संदेश जाता है कि कानून व्यवस्था में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मतदाताओं को पूरी सुरक्षा और स्वतंत्रता के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अधिकार है। राज्य के चुनावी अधिकारी और सुरक्षा बलों का मानना है कि इस कदम से चुनाव के दौरान होने वाली हिंसा में काफी कमी आएगी और मतदान प्रक्रिया बेहद शांतिपूर्ण रहेगी।