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Wednesday, 20 May 2026
विश्व

ट्रंप ईरान समझौते से दुनिया में शांति लाने का दावा

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Komal
संवाददाता
📅 21 April 2026, 6:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 812 views
ट्रंप ईरान समझौते से दुनिया में शांति लाने का दावा
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी विदेश नीति की रणनीति को सामने रखते हुए दावा किया है कि ईरान के साथ नए समझौते से पूरी दुनिया में शांति आएगी। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ईरान के साथ पिछली सरकारों के द्वारा किए गए समझौतों की गलतियों को सुधारने के लिए काम कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में ईरान के साथ किए गए परमाणु समझौते की तीव्र आलोचना की है।

राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि जेसीपीओए (संयुक्त व्यापक कार्ययोजना) के नाम से जाने जाने वाले पुराने समझौते को पूर्व सरकारों ने अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लिया था। उन्होंने कहा कि इस समझौते के कारण ईरान को अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर मिल गया था। ट्रंप के अनुसार, ओबामा-बाइडन प्रशासन ने ईरान को बहुत अधिक छूट दी थी, जिससे तेहरान अपनी महत्वाकांक्षी परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में सक्षम रहा।

नई समझौते की रणनीति और अमेरिकी दृष्टिकोण

राष्ट्रपति ट्रंप की सरकार ने पिछले कुछ महीनों में ईरान के साथ नए समझौते की ओर सकारात्मक कदम उठाने की बात कही है। ट्रंप के अनुसार, यह नया समझौता पुरानी व्यवस्था से कहीं अधिक कठोर और प्रभावी होगा। उन्होंने कहा कि इस नए समझौते में अमेरिका और उसके सहयोगी राष्ट्र ईरान की परमाणु गतिविधियों पर अधिक कड़ी निगरानी रख सकेंगे। ट्रंप का दावा है कि उनकी सरकार ईरान को ऐसी शर्तें देगी जो न केवल अमेरिका के हित में होंगी बल्कि पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होंगी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि उनका मानना है कि मजबूत और सतर्क कूटनीति के माध्यम से ईरान के साथ एक स्थायी समझौता संभव है। वह विश्वास करते हैं कि यदि सही तरीके से वार्ता की जाए और सख्त शर्तें रखी जाएं, तो ईरान एक जिम्मेदार अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में व्यवहार करने के लिए तैयार हो सकता है। ट्रंप की सरकार का यह भी मानना है कि एक सफल ईरान समझौता मध्य पूर्व के क्षेत्र में स्थिति को काफी हद तक शांतिपूर्ण बना सकता है।

ओबामा-बाइडन की नीतियों की आलोचना

ट्रंप ने अपने भाषण में पिछली सरकारों की ईरान नीति के प्रति अपनी कड़ी आलोचना जारी रखी है। उन्होंने कहा कि ओबामा और बाइडन प्रशासन ने ईरान को बहुत अधिक भरोसा दिया था और उसके बदले में कुछ नहीं मांगा। ट्रंप के अनुसार, पिछली सरकारों ने ईरान के साथ समझौता करते समय अमेरिका की लंबे समय की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया था।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके पहले कार्यकाल के दौरान जब उन्होंने 2018 में जेसीपीओए से अमेरिका को अलग किया था, तो उसका सही निर्णय था। उन्होंने कहा कि इस फैसले के कारण ईरान को दबाव में आना पड़ा था और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को एहसास हुआ कि अमेरिका गंभीर है। ट्रंप का मानना है कि मजबूत राजनीतिक रुख दिखाना और आवश्यकता पड़ने पर सख्त कदम उठाना ही बेहतर कूटनीति है।

विश्व शांति के लिए दीर्घकालीन दृष्टिकोण

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने वक्तव्य में कहा कि ईरान समझौता केवल अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की परमाणु समस्या को सही तरीके से हल किया जाए, तो मध्य पूर्व के क्षेत्र में काफी हद तक स्थिरता आ सकती है। ट्रंप का विश्वास है कि एक सफल ईरान नीति अन्य अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में भी मदद कर सकती है।

ट्रंप ने यह भी जोर दिया कि उनकी सरकार न केवल ईरान के साथ बल्कि अन्य देशों के साथ भी अमेरिका के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समझौते करेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था बनाना चाहता है जहां शांति और स्थिरता हो। राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि उनकी सरकार 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को भी समझती है।

कुल मिलाकर, ट्रंप की ईरान समझौते की नई रणनीति पिछली सरकारों के दृष्टिकोण से काफी अलग है। वह अधिक कड़ी शर्तें रखने और ईरान पर ज्यादा दबाव बनाने की बात कर रहे हैं। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ और कूटनीतिविद् इस बात पर नजर रख रहे हैं कि क्या ट्रंप की नई रणनीति वास्तव में ईरान के साथ एक स्थायी और प्रभावी समझौते की ओर ले जा सकेगी। अगले कुछ महीनों में इस मुद्दे पर विकास निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होगा।