नोएडा हिंसा का ब्लू प्रिंट हिमांशु की डायरी में
नोएडा में हुई हिंसा के मामले में पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली से गिरफ्तार किए गए हिमांशु ठाकुर के घर से एक डायरी बरामद की गई है, जिसमें नोएडा हिंसा का संपूर्ण ब्लू प्रिंट दर्ज है। यह डायरी न केवल नोएडा के विरोध प्रदर्शन से जुड़ी है, बल्कि इसमें देश के कई राज्यों में होने वाले विभिन्न आंदोलनों का भी विस्तृत जिक्र पाया गया है।
जांच से यह भी पता चला है कि हिमांशु ठाकुर विभिन्न कॉलेजों में जाकर छात्रों को संगठित करने का काम करता था। वह इन छात्रों को अपने विचारों के अनुसार ब्रेनवॉश करता था और उन्हें हिंसक आंदोलनों में भाग लेने के लिए प्रेरित करता था। पुलिस के अनुसार, हिमांशु के पास एक विस्तृत नेटवर्क था जो कई राज्यों में फैला हुआ था।
नोएडा हिंसा का ब्लू प्रिंट
हिमांशु ठाकुर की डायरी में मिले विवरण से पता चलता है कि नोएडा में हुई हिंसा पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई थी। डायरी में प्रदर्शन के स्थानों, समय, भीड़ को भड़काने के तरीकों और हिंसा को अंजाम देने की सूक्ष्म रणनीति का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसके अलावा, डायरी में यह भी दर्ज है कि कैसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके लोगों को इकट्ठा किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, डायरी में प्रदर्शनकारियों को भीड़ में पत्थरबाजी और आगजनी करने के निर्देश भी दिए गए थे। इसमें यह भी लिखा था कि कैसे पुलिस की पहचान को गुमराह किया जा सकता है और कैसे आंदोलन को बड़े पैमाने पर हिंसक बनाया जा सकता है। डायरी के पन्नों से साफ पता चलता है कि यह सब कुछ पहले से ही सुनियोजित था।
छात्रों के ब्रेनवॉशिंग का तरीका
हिमांशु ठाकुर अलग-अलग कॉलेजों में जाता था और वहां के छात्रों को अपने विचारों से प्रभावित करता था। पुलिस की जांच में यह पता चला है कि वह छात्रों को धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारों की ओर ले जाता था। सबसे पहले वह उन्हें सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूकता देता था, फिर धीरे-धीरे उन्हें आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित करता था।
डायरी में इसका विस्तृत विवरण मिला है। हिमांशु के पास एक खास रणनीति थी - पहले वह युवा छात्रों को सामाजिक कार्यों में शामिल करता था, फिर उन्हें धीरे-धीरे अधिक आक्रामक गतिविधियों की ओर मोड़ता था। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह ब्रेनवॉशिंग की एक सुचिंतित प्रक्रिया थी जो महीनों में पूरी होती थी।
छात्रों को मनोवैज्ञानिक दबाव के माध्यम से भी प्रभावित किया जाता था। हिमांशु उन्हें बताता था कि समाज बदलना उनका दायित्व है और इसके लिए किसी भी हद तक जाना पड़ सकता है। उसके छात्र समूह का एक अलग 'ग्रुप चैट' भी होता था जहां केवल विश्वसनीय सदस्यों को ही जोड़ा जाता था। इस चैट में ही हिंसक गतिविधियों की योजना और निर्देश दिए जाते थे।
बहु-राज्यीय नेटवर्क
डायरी में न केवल नोएडा की हिंसा का ही विवरण था, बल्कि इसमें देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले आंदोलनों का भी जिक्र पाया गया। पुलिस को पता चला है कि हिमांशु का एक व्यापक नेटवर्क था जो महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब तक फैला हुआ था। हर राज्य में उसके समन्वयकारी थे जो स्थानीय स्तर पर छात्रों को संगठित करते थे।
डायरी से पता चलता है कि हिमांशु नियमित रूप से विभिन्न शहरों का दौरा करता था और वहां अपने संचालकों से मिलता था। इन मीटिंगों में वह आने वाले आंदोलनों की रणनीति बनाता था। डायरी में कई तारीखें और शहरों के नाम दर्ज थे जहां भविष्य में आंदोलन की योजना बनाई गई थी। पुलिस को आशंका है कि अगर हिमांशु को समय पर गिरफ्तार न किया जाता, तो देश के कई हिस्सों में समन्वित हिंसक प्रदर्शन हो सकते थे।
एसटीएफ की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है। हिमांशु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का सूत्रधार था। उसके नेतृत्व में सैकड़ों छात्र विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय थे। डायरी से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस अन्य षड्यंत्रकारियों को भी ढूंढ निकालने में जुटी है।
इस पूरे प्रकरण ने सुरक्षा एजेंसियों को चेता दिया है। डायरी में मिले विवरणों से साफ है कि कुछ तत्व युवा छात्रों को भटकाकर हिंसक गतिविधियों में लगा रहे हैं। पुलिस ने कॉलेजों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है ताकि ऐसे तत्वों को समय पर पहचाना जा सके। अभी पुलिस की जांच जारी है और डायरी के बाकी पन्नों का विश्लेषण किया जा रहा है।




