ईरान ने 2 जहाज जब्त किए, 22 भारतीय नाविक फायरिंग में
बुधवार को ईरान की सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बड़ी कार्रवाई की जिसमें दो अंतरराष्ट्रीय जहाजों को जब्त कर लिया गया। इन जहाजों पर भारत के 22 नाविक सवार थे जिनकी जान को खतरा पैदा हो गया था। ईरानी सेना द्वारा की गई फायरिंग की वजह से ये सभी नाविक एक खतरनाक परिस्थिति का सामना कर रहे थे। हालांकि भारत सरकार ने जल्द ही घोषणा की कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क स्थापित कर लिया गया है।
यह घटना अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए एक गंभीर मुद्दा बन गई है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक है। इस इलाके से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल का परिवहन होता है और यहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अंतर्गत सुनिश्चित की जानी चाहिए। ईरान की यह कार्रवाई न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गई है।
ईरान की कार्रवाई और नाविकों की सुरक्षा
ईरानी सेना ने जो दोनों जहाज जब्त किए हैं, उनके नाम और पूरी जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ये दोनों जहाज वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए काम में लिए जा रहे थे। इन जहाजों पर 22 भारतीय नाविकों के अलावा अन्य देशों के भी नाविक सवार थे। जब ईरानी सेना ने अपनी फायरिंग शुरू की तो सभी नाविकों में भय का माहौल व्याप्त हो गया। ये नाविक अपनी जानों की सुरक्षा के लिए चिंतित हो गए थे।
भारत के विदेश मंत्रालय ने तुरंत इस घटना पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह इस मामले की गंभीरता से निरीक्षण कर रहा है। भारतीय राजदूत और राजनयिक अधिकारियों को सभी 22 नाविकों की सुरक्षा और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। भारत सरकार ने ईरानी सरकार से भी सभी नाविकों की तुरंत रिहाई की मांग की है। भारत के अनुसार, ये सभी नाविक मानवतावादी कारणों से तुरंत रिहा किए जाने चाहिए क्योंकि वो केवल अपने काम पर थे।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य पिछले कई महीनों से एक विवादास्पद क्षेत्र बन गया है जहां विभिन्न शक्तियों के बीच तनाव बना हुआ है। अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सामरिक उपस्थिति बनाई हुई है जबकि ईरान भी अपने अधिकार का दावा करता है। इस बीच में आने वाले व्यापारिक जहाजों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई बार ईरान ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए जहाजों को रोका है और कभी-कभी उन पर गोलीबारी भी की है।
यह पहली बार नहीं है कि ईरान ने किसी जहाज को जब्त किया है। पिछले कुछ सालों में ईरान ने कई बार अंतर्राष्ट्रीय जहाजों को पकड़ा है और उनके चालक दल को बंधक बनाया है। इन घटनाओं से होर्मुज जलडमरूमध्य में से गुजरने वाली शिपिंग कंपनियों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठनों ने भी इस क्षेत्र में व्यापार करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।
भारत की कूटनीतिक पहल
भारत सरकार ने इस मामले में अपनी राजनीतिक चैनलों को सक्रिय किया है और ईरान से सीधे वार्ता शुरू की है। भारतीय विदेश मंत्री ने ईरान के विदेश मंत्री से संपर्क किया है और सभी नाविकों की तुरंत रिहाई की मांग की है। भारत का कहना है कि ये नाविक कानूनी तरीके से काम कर रहे थे और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी में नहीं फंसाया जाना चाहिए। भारत ने यह भी जोर दिया है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुसार सभी जहाजों को स्वतंत्र रूप से अंतर्राष्ट्रीय जल में चलने का अधिकार है।
भारत के रक्षा मंत्रालय ने भी इस स्थिति को गंभीरता से लिया है और भारतीय नौसेना को सतर्क किया गया है। भारतीय नौसेना अरब सागर में अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रही है ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। भारत के पड़ोसी देशों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और भारत के साथ एकजुट होकर खड़े हुए हैं।
इस घटना के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली भारतीय शिपिंग कंपनियों में भी चिंता का माहौल है। कई कंपनियां अपने जहाजों को अन्य सुरक्षित मार्गों से भेजने पर विचार कर रही हैं। भारत सरकार ने इन कंपनियों को आश्वास दिया है कि वह सभी नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी और जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालेगी।




