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Friday, 05 June 2026
राजनीति

ईरान युद्ध: भारत यूरिया के लिए दोगुनी कीमत चुका रहा

author
Komal
संवाददाता
📅 24 April 2026, 7:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 385 views
ईरान युद्ध: भारत यूरिया के लिए दोगुनी कीमत चुका रहा
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को एक नया झटका लगा है। इस बार समस्या ऊर्जा की नहीं, बल्कि कृषि के लिए आवश्यक यूरिया उर्वरक की है। भारत सरकार को इस महत्वपूर्ण खाद के लिए पिछले सौदों की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है। इस कारण सरकार ने एक ही टेंडर के माध्यम से रिकॉर्ड स्तर पर 25 लाख टन यूरिया आयात का आदेश दिया है।

भारतीय कृषि पर यूरिया उर्वरक की निर्भरता बहुत अधिक है। देश की हरित क्रांति में यूरिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियां भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतें आसमान छू गई हैं, और भारत को इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।

राष्ट्रीय रासायनिक और उर्वरक सीमित कंपनी तथा अन्य सरकारी एजेंसियों के माध्यम से भारत सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर यूरिया उपलब्ध कराना और कृषि उत्पादन को प्रभावित होने से बचाना है। लेकिन कीमतों में यह इजाफा निश्चित रूप से सरकारी खजाने पर दबाव डालेगा।

पश्चिम एशिया का संकट और भारत पर प्रभाव

ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव इस पूरी परिस्थिति का मूल कारण है। ईरान दुनिया के प्रमुख यूरिया उत्पादकों में से एक है। इसके अतिरिक्त, रूस और यूरोप के बीच चल रहे संघर्ष ने भी बाजार को अस्थिर कर दिया है। इन सभी कारकों के कारण यूरिया की वैश्विक आपूर्ति में कमी आई है।

भारत को अपनी 40 से 50 प्रतिशत यूरिया की जरूरत आयात के माध्यम से पूरी करनी पड़ती है। देश के कुल उर्वरक खपत में यूरिया का हिस्सा सबसे ज्यादा है। ऐसी स्थिति में जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तो भारत को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

इस बार सरकार को जो कीमत देनी पड़ी है, वह कुछ महीने पहले दिए गए सौदों से लगभग दोगुनी है। प्रति टन आधार पर यह बढ़ोत्तरी काफी महत्वपूर्ण है। जब 25 लाख टन जैसी विशाल मात्रा के लिए बात की जाए, तो कुल अतिरिक्त खर्च सैकड़ों करोड़ रुपये में पहुंच जाता है।

रिकॉर्ड आयात आदेश की आवश्यकता

भारत सरकार ने इतने बड़े पैमाने पर यूरिया आयात का आदेश देने का निर्णय क्यों लिया? इसके पीछे एक तार्किक कारण है। मानसून आने वाले महीनों में भारतीय किसान खेतों की तैयारी शुरू करेंगे। इस समय यूरिया की मांग अपने शिखर पर होती है। सरकार को आशंका है कि अगर अभी आयात नहीं किया गया, तो आने वाले समय में और भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

इसके अलावा, देश में घरेलू यूरिया उत्पादन पर्याप्त नहीं है। भारत के कई उर्वरक संयंत्र पुराने पड़ चुके हैं और उन्हें आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। अतः, आयात के बिना कोई विकल्प नहीं है।

रिकॉर्ड आयात का मतलब है कि सरकार ने सभी विकल्प को तौला है और यही सबसे व्यावहारिक कदम समझा है। इससे एक सकारात्मक बात यह है कि यूरिया की कमी से किसानों को पीड़ा न झेलनी पड़ेगी। नकारात्मक बात यह है कि राजकोष पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

भारतीय किसान और आम जनता पर असर

यूरिया की कीमत में बढ़ोत्तरी का सीधा असर भारतीय किसानों पर पड़ता है। हालांकि, सरकार यूरिया पर सब्सिडी देती है, ताकि किसानों को इसकी कीमत कम देनी पड़े। लेकिन जब अंतर्राष्ट्रीय कीमतें इतनी अधिक बढ़ जाती हैं, तो सब्सिडी का बोझ भी बढ़ जाता है।

इस अतिरिक्त व्यय को सरकार को कहीं से अन्य राशि में कटौती करके या अतिरिक्त राजस्व के माध्यम से पूरा करना होगा। यह सीधे तौर पर केंद्रीय बजट को प्रभावित करता है। अन्य विकास कार्यक्रमों के लिए आवंटित राशि में कटौती हो सकती है।

आम जनता के लिए भी यह चिंता का विषय है। यदि खाद्य उत्पादन प्रभावित होता है, तो अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। खाद्य मुद्रास्फीति से आम लोगों की कीमत क्षमता और भी कम हो जाएगी।

इस संकट से निपटने के लिए सरकार को दीर्घकालीन समाधान भी खोजने होंगे। घरेलू यूरिया उत्पादन बढ़ाने के लिए पुरानी इकाइयों का आधुनिकीकरण और नई इकाइयों की स्थापना आवश्यक है। इसके साथ ही, कृषि में यूरिया के अत्यधिक उपयोग को कम करने के लिए किसानों को जैव-उर्वरकों और जैविक खेती के बारे में शिक्षित करना भी जरूरी है।

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। किसान भारत की रीढ़ की हड्डी हैं। ऐसी परिस्थिति में, यूरिया जैसे महत्वपूर्ण संसाधन के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर रहना कोई दीर्घकालीन समाधान नहीं है। सरकार को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए, घरेलू उर्वरक उत्पादन को मजबूत करना चाहिए। केवल तभी भारत को ऐसे अंतर्राष्ट्रीय संकटों से सुरक्षा मिल सकती है।