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Friday, 05 June 2026
धर्म

जानकी नवमी 2026: पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

author
Komal
संवाददाता
📅 25 April 2026, 6:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 817 views
जानकी नवमी 2026: पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त
📷 aarpaarkhabar.com

जानकी नवमी को सीता नवमी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बेहद महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माता सीता का जन्म माना जाता है। जानकी नवमी राम नवमी के लगभग एक महीने बाद आती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान राम का जन्म चैत्र मास में पुष्य नक्षत्र में हुआ था और माता सीता का प्राकट्य भी इसी पवित्र नक्षत्र के प्रभाव में हुआ था। यह एक बहुत ही विशेष और पवित्र दिन माना जाता है।

माता जानकी या सीता का नाम उनके पिता राजा जनक के नाम पर पड़ा। राज्य जनकपुर में राजा जनक की बेटी के रूप में माता सीता का जन्म हुआ था। माता सीता को धरती की देवी माना जाता है। उन्हें लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। जानकी नवमी के दिन भक्त माता सीता की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद पाते हैं।

जानकी नवमी का धार्मिक महत्व और पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में जानकी नवमी का बेहद महत्व है। इस दिन माता सीता का जन्म हुआ था जो भगवान राम की पत्नी थीं। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा जनक को यज्ञ करते समय धरती से माता सीता प्राप्त हुई थीं। यज्ञ की पवित्र भूमि से माता सीता का आविर्भाव हुआ था। इसी कारण उन्हें धरती की पुत्री माना जाता है।

माता सीता को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी का अवतार थीं। उन्होंने भगवान राम को प्राप्त करने के लिए स्वयंवर का आयोजन किया था। इसी स्वयंवर में राम जी ने शिव धनुष को तोड़ा था और माता सीता को पत्नी के रूप में प्राप्त किया था।

जानकी नवमी के दिन माता सीता के गुणों को याद किया जाता है। माता सीता को भक्ति, धर्म, साहस और पतिव्रत का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने भगवान राम के साथ वनवास की कठिन यात्रा की थी। उन्होंने सभी कष्टों को झेला और अपना धर्म निभाया। माता सीता की कथा आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।

जानकी नवमी की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

जानकी नवमी के दिन माता सीता की पूजा करने की विधि काफी महत्वपूर्ण है। भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। घर को सफाई करके पवित्र बना लेना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थान को सजाया जाता है।

पूजा के समय माता सीता की मूर्ति या तस्वीर को पूजा स्थान पर रखा जाता है। माता को फूलों की माला से सजाया जाता है। उन्हें फल, मिठाई और अन्य भोग का प्रसाद दिया जाता है। भक्त माता सीता के आरती गीत गाते हैं और उनसे आशीर्वाद मांगते हैं।

जानकी नवमी पर व्रत रखने का भी महत्व है। कई भक्त इस दिन पूरा व्रत रखते हैं। कुछ लोग आंशिक व्रत भी रखते हैं। व्रत के दौरान फल, दूध और खीर का सेवन किया जाता है। शाम को माता की आरती की जाती है और प्रसाद बांटा जाता है।

जानकी नवमी 2026 में वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाएगी। इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह के समय रहेगा। भक्तों को सुबह के समय ही पूजा करनी चाहिए। पूजा का समय सूर्योदय से लेकर दोपहर तक रहता है।

जानकी नवमी मनाने के लाभ और घरेलू परंपराएं

जानकी नवमी मनाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। माता सीता की पूजा करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस दिन भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें आशीर्वाद मिलता है।

कई घरों में जानकी नवमी के दिन विशेष भोग बनाए जाते हैं। खीर, पूरी, हलवा और अन्य मिठाइयां बनाई जाती हैं। घर के सभी सदस्य एक साथ बैठकर पूजा करते हैं और प्रसाद खाते हैं।

जानकी नवमी के दिन दान-पुण्य का भी महत्व है। भक्तों को इस दिन जरूरतमंद लोगों को खिलाना चाहिए। गरीबों को कपड़े और खाने का सामान दिया जाता है। इससे माता सीता का आशीर्वाद मिलता है।

जानकी नवमी एक पवित्र त्योहार है जो माता सीता के प्रति भक्तों की श्रद्धा को प्रदर्शित करता है। इस दिन घर-घर में माता की पूजा की जाती है। माता सीता की कथा सुनी और सुनाई जाती है। यह त्योहार हमें धर्म, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों की याद दिलाता है। इसी कारण जानकी नवमी को हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।