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Tuesday, 18 August 2026
टेक

मुंबई नर्स को ₹299 ड्रेस खरीदते समय 1 लाख का नुकसान

author
Komal
संवाददाता
📅 26 April 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 470 views
मुंबई नर्स को ₹299 ड्रेस खरीदते समय 1 लाख का नुकसान
📷 aarpaarkhabar.com

मुंबई में एक दर्दनाक घटना सामने आई है जहां एक अनुभवी नर्स को ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान साइबर ठगों का शिकार बना दिया गया। महज ₹299 की सस्ती ड्रेस खरीदने की कोशिश करते हुए इस महिला ने अपनी पूरी 1 लाख रुपये की बचत खो दी। यह घटना हमें यह सिखाती है कि इंटरनेट पर कितनी सावधानी से काम लेना चाहिए। आइए जानते हैं कि यह ठगी कैसे हुई और इससे हम क्या सीख सकते हैं।

₹299 की ड्रेस का जाल

यह घटना मुंबई के एक निजी अस्पताल में काम करने वाली नर्स के साथ घटी। उसे सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन मिला जिसमें बहुत ही आकर्षक कीमत पर कपड़े बिक रहे थे। विज्ञापन में एक सुंदर ड्रेस को मात्र ₹299 में दिखाया जा रहा था। कीमत इतनी कम थी कि किसी भी खरीदारी प्रेमी को आकर्षित करना आसान था। नर्स को भी यह डील बहुत अच्छा लगा और उसने तुरंत इस लिंक पर क्लिक कर दिया।

जब वह खरीदारी की प्रक्रिया में आगे बढ़ी, तो उसे एक फर्जी वेबसाइट पर ले जाया गया। यह वेबसाइट बिल्कुल असली ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल जैसी दिख रही थी। सभी कुछ वास्तविक लग रहा था - लोगो, डिजाइन, पेमेंट विकल्प सब कुछ। धीरे-धीरे यह ठगी का खेल गहरा होता गया। एक बार जब नर्स ने अपना पहला भुगतान कर दिया, तो ठगों की भूख बढ़ गई।

शिपिंग और जीपीएस के नाम पर फ्रॉड

आदेश देने के बाद नर्स को कई तरह के अतिरिक्त चार्ज का सामना करना पड़ा। सबसे पहले उसे शिपिंग चार्ज देने के लिए कहा गया। भारत में ऑनलाइन शॉपिंग में शिपिंग चार्ज आम बात है, इसलिए वह इसे समझदारी से समझ गई। लेकिन यहीं पर असली समस्या शुरू हुई।

जब शिपिंग चार्ज दिया गया, तो एक नया चार्ज दिखाई दिया - जीपीएस ट्रैकिंग चार्ज। ठगों ने कहा कि पार्सल को ट्रैक करने के लिए जीपीएस सुविधा के पैसे भी देने होंगे। यह बातें बिल्कुल झूठी थीं क्योंकि असली ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर ट्रैकिंग बिल्कुल मुफ्त होती है। लेकिन नर्स को यह पता नहीं था और उसने यह राशि भी भेज दी।

एक के बाद एक नए बहाने आते रहे। कभी कस्टम्स क्लीयरेंस के नाम पर पैसे मांगे गए, तो कभी बीमा के नाम पर। हर बार नर्स सोचती थी कि यह आखिरी भुगतान है और उसे अपना सामान मिल जाएगा। लेकिन ठगों का खेल कभी खत्म ही नहीं हुआ। वे बार-बार नए बहाने बनाते रहे और हर बार नए पैसे मांगते रहे।

कैसे बढ़ता गया नुकसान

हिसाब लगाने के बाद पता चला कि नर्स ने इन ठगों को कुल ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) भेज दिए थे। इसमें से कुछ राशि तो ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से गई, कुछ गूगल प्ले कार्ड के जरिए और कुछ अन्य तरीकों से। ठगों ने बहुत चतुराई से पैसे निकलवाए ताकि ट्रेस करना मुश्किल हो जाए।

जब नर्स को एक महीने बाद भी पार्सल नहीं मिला, तो उसे संदेह हुआ। उसने वह फोन नंबर ढूंढने की कोशिश की जिस पर वह बात कर रही थी, लेकिन वह नंबर रीचेबल नहीं था। तब उसे एहसास हुआ कि वह एक विशाल ठगी का शिकार बन गई है। उसने तुरंत पुलिस को रिपोर्ट दर्ज की।

आइए सीखें सावधानियां

यह घटना हमें कई महत्वपूर्ण सबक सिखाती है। सबसे पहले, हमें केवल विश्वसनीय और प्रसिद्ध ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स से खरीदारी करनी चाहिए। यदि कीमत बहुत ही कम दिख रही हो, तो उसे दुबारा जांच लेनी चाहिए। ऑनलाइन शॉपिंग में शिपिंग के अलावा कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं होना चाहिए।

दूसरा, कभी भी अपने यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या बैंक खाते की जानकारी किसी को नहीं देनी चाहिए। असली वेबसाइट्स कभी भी ऐसी जानकारी नहीं मांगते। तीसरा, यदि कोई अजीब सी बातें हों, तो तुरंत खरीदारी रोक देनी चाहिए। चौथा, व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप्स के जरिए मिली लिंक्स पर कभी क्लिक नहीं करना चाहिए।

इस घटना के बाद मुंबई पुलिस ने भी सार्वजनिक रूप से लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। साइबर ठगों का एक संगठित नेटवर्क है और वे बहुत ही चतुराई से अपने शिकार को फंसाते हैं। हमें इस तरह की घटनाओं से सीखना चाहिए और अपने प्रियजनों को भी सचेत करना चाहिए। ऑनलाइन खरीदारी सुविधाजनक है, लेकिन सावधानी बरतना हमारी जिम्मेदारी है।