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Friday, 05 June 2026
राजनीति

संगरूर: AAP के गुटों में टकराव, हाईवे जाम

author
Komal
संवाददाता
📅 26 April 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 538 views
संगरूर: AAP के गुटों में टकराव, हाईवे जाम
📷 aarpaarkhabar.com

पंजाब के संगरूर जिले में आम आदमी पार्टी के दो गुटों के बीच भीषण संघर्ष देखा गया। भवानीगढ़ के ट्रक यूनियन के प्रधान पद को लेकर हुए इस विवाद में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रदर्शनकारियों को बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे को जाम करना पड़ा। इस दौरान पुलिस पर भी पथराव की घटना सामने आई, जिससे मामला पूरी तरह राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ा हुआ बन गया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रक यूनियन के प्रधान पद के लिए चुनावी प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में मतभेद सामने आया। एक गुट ने मालविंदर सिंह माला को सर्वसम्मति से प्रधान घोषित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे कई कार्यकर्ताओं ने स्वीकार किया। हालांकि, विधायक नरेंद्र कौर भराज के समर्थक इस निर्णय से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि इस प्रकार की एकतरफा घोषणा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है और उचित नहीं है।

मालविंदर सिंह माला की घोषणा और विरोध

भवानीगढ़ के ट्रक यूनियन में जब मालविंदर सिंह माला को सर्वसम्मति से प्रधान घोषित किया गया, तो यह निर्णय सभी को सहमत नहीं लगा। विधायक नरेंद्र कौर भराज के पहुंचने के तुरंत बाद उनके समर्थकों ने इस प्रक्रिया को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि ट्रक यूनियन के प्रधान का चयन करने के लिए एक उचित और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, न कि किसी को सीधे घोषित कर दिया जाए।

भराज के समर्थकों ने इस कदम को केवल राजनीतिक षड्यंत्र बताया। उन्होंने अपना विरोध दर्ज करने के लिए तुरंत एक अलग उम्मीदवार का नाम घोषित कर दिया। इससे आंतरिक विवाद और भी गहरा हो गया और दोनों गुट आमने-सामने हो गए। यह स्थिति बहुत जल्दी ही सड़कों पर उतर गई, जहां समर्थकों ने अपना गुस्सा प्रकट करना शुरू कर दिया।

हाईवे जाम करना और पुलिस पर पथराव

जब विवाद गंभीर होने लगा, तो प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे को जाम करने का फैसला किया। बठिंडा-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर हजारों की तादाद में लोग इकट्ठा हो गए और यातायात को पूरी तरह रोक दिया गया। इस हाईवे पर दोनों तरफ से भारी ट्रैफिक रोक दिया गया, जिससे आम जनता को भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।

पुलिस ने जब भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया, तो स्थिति और भी बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरों से हमला करना शुरू कर दिया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए और पुलिस को भी सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। इस घटना के कारण पूरे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

राजनीति और कानून-व्यवस्था का मुद्दा

यह पूरा प्रकरण न केवल एक आंतरिक पार्टी विवाद रह गया, बल्कि यह राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन गया। आम आदमी पार्टी के इस आंतरिक संघर्ष ने जिले की कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है। पार्टी के अधिकारियों को इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना होगा और दोनों गुटों के बीच सुलह-समझौता करवाना होगा।

इस घटना का मतलब यह भी है कि आम आदमी पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। विधायक नरेंद्र कौर भराज के समर्थकों का तर्क कि प्रक्रिया अलोकतांत्रिक थी, को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पार्टी को अपने भीतरी विवादों को लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाने की जरूरत है, न कि सड़कों पर उतारने की।

पुलिस ने इस घटना के बाद जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, सभी दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संगरूर के जिला प्रशासन ने भी इस मामले पर ध्यान दिया है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह घटना न केवल आम आदमी पार्टी के लिए शर्मनाक है, बल्कि पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में भी एक गंभीर संकेत है। राजनीतिक दलों को अपने आंतरिक मतभेदों को सुलझाने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और कभी भी हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए। सभी पक्षों को शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए।