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Sunday, 04 October 2026
टेक

बच्चों में फोन से ऑटिज्म का खतरा – AIIMS की चेतावनी

author
Komal
संवाददाता
📅 02 May 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 628 views
बच्चों में फोन से ऑटिज्म का खतरा – AIIMS की चेतावनी
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली के एम्स यानी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने एक चिंताजनक स्टडी सामने रखी है जो हर माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। इस शोध में पाया गया है कि जो बच्चे एक साल की उम्र से पहले ही अधिक स्क्रीन टाइम के संपर्क में आते हैं, उनमें तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर जैसे लक्षण दिखने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यह अध्ययन बताता है कि आजकल के डिजिटल युग में बच्चों की सेहत के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।

मोबाइल फोन, टैबलेट और टीवी की स्क्रीन आजकल हर घर में मिल जाती है। छोटे बच्चों को शांत रखने के लिए माता-पिता उन्हें इन उपकरणों के सामने बैठा देते हैं। लेकिन यह आदत बच्चों के मस्तिष्क के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। AIIMS की इस स्टडी ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात सामने लाई है कि स्क्रीन एक्सपोजर केवल आंखों के लिए नुकसानदेह नहीं है, बल्कि यह बच्चों के तंत्रिका तंत्र और मानसिक विकास पर भी असर डालता है।

स्क्रीन टाइम और बाल विकास का खतरनाक रिश्ता

बचपन वह अवस्था है जब बच्चे के मस्तिष्क में तेजी से विकास होता है। जन्म से लेकर तीन साल की उम्र तक बच्चे के मस्तिष्क में सबसे ज्यादा तंत्रिका कनेक्शन बनते हैं। यह अवधि बेहद संवेदनशील मानी जाती है। इसी समय अगर बच्चा अधिक स्क्रीन के सामने बैठता है तो इसका असर उसके सामाजिक कौशल, भाषा विकास और संज्ञात्मक क्षमता पर पड़ता है।

AIIMS के विशेषज्ञों के मुताबिक, स्क्रीन से निकली नीली रोशनी और तेज रंग बच्चों के दिमाग को अत्यधिक उत्तेजित करते हैं। इससे उनके मस्तिष्क में केमिकल असंतुलन हो सकता है। जब बच्चा छोटा होता है तो उसे अपने आसपास के लोगों के साथ संपर्क और खेल-कूद की जरूरत होती है। लेकिन स्क्रीन के सामने बैठा बच्चा इन महत्वपूर्ण गतिविधियों से वंचित हो जाता है। यही कारण है कि इस तरह के बच्चों में सामाजिक कौशल की कमी देखी जाती है, जो ऑटिज्म का एक प्रमुख लक्षण है।

शोध में पाया गया है कि जो बच्चे प्रतिदिन तीन घंटे से अधिक स्क्रीन देखते हैं, उनमें ऑटिज्म जैसी समस्याओं का जोखिम सामान्य बच्चों की तुलना में दोगुना हो जाता है। इसके अलावा इन बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी कम होती है और वे चिड़चिड़े स्वभाव के हो जाते हैं।

ऑटिज्म के शुरुआती लक्षण और पहचान

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे को सामाजिक संचार और व्यवहार संबंधी समस्याएं होती हैं। AIIMS के विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर आप अपने बच्चे में निम्नलिखित लक्षण देखें तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लें।

पहला लक्षण यह है कि बच्चा दूसरे लोगों की आंखों में देखकर बात नहीं करता। दूसरा, वह अपने नाम का जवाब नहीं देता या देर से देता है। तीसरा, बच्चा अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाता और न ही दूसरों की भावनाओं को समझ पाता है। चौथा, बच्चे की बोली में देरी हो सकती है या वह दोहराव वाले शब्दों का प्रयोग करता है। पांचवां, बच्चा बार-बार एक ही काम को दोहराता रहता है और नए काम सीखने में दिलचस्पी नहीं दिखाता।

माता-पिता के लिए विशेषज्ञों की सलाह

AIIMS के शोधकर्ताओं का स्पष्ट संदेश है कि माता-पिता को अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के अनुसार, दो साल से कम उम्र के बच्चों को कोई भी स्क्रीन नहीं दिखाना चाहिए। दो से पांच साल की उम्र के बच्चों को प्रतिदिन एक घंटे से अधिक स्क्रीन नहीं दिखना चाहिए।

बजाय इसके माता-पिता को अपने बच्चों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए। उन्हें खेल-कूद में प्रोत्साहित करना चाहिए, उनके साथ किताबें पढ़नी चाहिए और उनसे बातचीत करनी चाहिए। बाहर के वातावरण में समय बिताना बच्चों के विकास के लिए बेहद जरूरी है।

एक और महत्वपूर्ण सलाह यह है कि खाने के समय, सोने से पहले और शयनकक्ष में कोई भी स्क्रीन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। माता-पिता को अपने बच्चों के साथ मजेदार गतिविधियां करनी चाहिए, संगीत सुनना चाहिए और कहानियां सुनानी चाहिए।

यह AIIMS की स्टडी हर माता-पिता को एक गंभीर संदेश देती है। हमें अपने बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने वाली इस आदत को तुरंत छोड़ना चाहिए। बचपन जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दौर है और हमें इसे स्वस्थ और खुश बनाने का प्रयास करना चाहिए। तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है।