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Friday, 05 June 2026
व्यापार

सांवलिया सेठ मंदिर में 41 करोड़ का रिकॉर्ड दान

author
Komal
संवाददाता
📅 02 May 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 913 views
सांवलिया सेठ मंदिर में 41 करोड़ का रिकॉर्ड दान
📷 aarpaarkhabar.com

सांवलिया सेठ में टूटे दान के सभी रिकॉर्ड

राजस्थान के प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों की आस्था और श्रद्धा का नया कीर्तिमान स्थापित हुआ है। अप्रैल के महीने में इस मंदिर को 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपए का अभूतपूर्व चढ़ावा प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा मंदिर के इतिहास में सबसे बड़ा दान साबित हुआ है। भक्तों की अपार श्रद्धा और विश्वास का यह परिणाम है कि हर दिन हजारों श्रद्धालु ठाकुरजी को अपने प्रेम और भक्ति का प्रमाण देते हैं।

सांवलिया सेठ मंदिर न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे भारत में भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यहां के ठाकुरजी को मंदिर और धन के देवता माना जाता है। हजारों भक्त हर साल यहां आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए ठाकुरजी को दान समर्पित करते हैं। इस बार जो चढ़ावा मिला है वह सभी पिछले रिकॉर्डों को तोड़ देता है।

सोना और चांदी का भी भारी दान

अप्रैल माह में भक्तों की श्रद्धा केवल नकद रुपयों तक सीमित नहीं रही। मंदिर को कीमती धातुओं का भी विशाल दान मिला है। भक्तों ने ठाकुरजी को लगभग 1 करोड़ रुपए मूल्य का 660 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना अर्पित किया है। यह सोना विभिन्न रूपों में दान दिया गया है जिसमें सोने के गहने, सिक्के और अन्य कलात्मक वस्तुएं शामिल हैं।

इसके अलावा मंदिर को लगभग 2 करोड़ रुपए मूल्य की 84 किलो 620 ग्राम चांदी भी दान दी गई है। यह मात्रा अत्यंत प्रभावशाली है और दर्शाती है कि भक्त कितनी भक्ति और समर्पण के साथ ठाकुरजी को दान देते हैं। चांदी की यह मात्रा मंदिर के खजाने में एक महत्वपूर्ण योगदान साबित होगी।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, सभी दान को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जा रहा है। सोने और चांदी को मंदिर के सोने-चांदी के भंडार में रखा गया है। नकद राशि को भी सुरक्षित बैंक खातों में जमा किया गया है। मंदिर की व्यवस्थापक समिति ने घोषणा की है कि यह धन मंदिर के विकास और रखरखाव के लिए उपयोग किया जाएगा।

भक्तों की अपार श्रद्धा का प्रतीक

सांवलिया सेठ मंदिर को प्राप्त यह अभूतपूर्व दान भारतीय संस्कृति और परंपरा में मंदिरों के महत्व को दर्शाता है। भक्तों की आस्था और विश्वास ही है जो मंदिरों को शक्तिशाली बनाता है। यह दान मात्र आर्थिक योगदान नहीं है, बल्कि यह भक्तों के दिलों में बसे भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रमाण है।

मंदिर के महंत और प्रबंधकों ने इस विशाल दान के लिए सभी भक्तों को धन्यवाद दिया है। उन्होंने बताया कि ऐसी आस्था और भक्ति देखकर उन्हें भी एहसास होता है कि ठाकुरजी की कृपा हर दिन बढ़ रही है। मंदिर का मानना है कि यह धन समाज के कल्याण के लिए उपयोग किया जाएगा।

अप्रैल का महीना सांवलिया सेठ मंदिर के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। इस माह में मंदिर को जो दान मिला है वह न केवल संख्या में बड़ा है, बल्कि भक्तों की भावनात्मक संपत्ति का भी प्रतीक है। हर साल हजारों भक्त अपनी शुभकामनाओं के साथ यहां आते हैं और ठाकुरजी को अर्पित करते हैं।

यह खबर साबित करती है कि हमारी संस्कृति में भक्ति और आस्था कितनी गहरी है। सांवलिया सेठ मंदिर का यह रिकॉर्ड दान भारतीय धार्मिक परंपरा की शक्ति को भी दर्शाता है। भक्तों की लगन और समर्पण से ही मंदिर जीवंत रहते हैं और उनके माध्यम से समाज में आध्यात्मिकता और सद्भावना का प्रसार होता है।