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Wednesday, 20 May 2026
राजनीति

पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आज: असम, बंगाल, तमिलनाडु

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Komal
संवाददाता
📅 04 May 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 862 views
पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आज: असम, बंगाल, तमिलनाडु
📷 aarpaarkhabar.com

चार मई का दिन भारतीय राजनीति के लिए ऐतिहासिक साबित होने वाला है। इसी दिन पांच महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगे। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में हुए इन चुनावों को लेकर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। इन पांचों राज्यों में शक्तिशाली मुख्यमंत्री हैं जिनकी राजनीतिक भविष्य आज के नतीजों से तय होगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन, असम के हिमंत बिस्व सरमा, केरल के पिनाराई विजयन और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री इन सभी की किस्मत का फैसला आज हो जाएगा। गत कुछ महीनों में हुए चुनावी प्रचार से लेकर एग्जिट पोल तक, सभी ने एक रोचक राजनीतिक महाकाव्य रचा है। अब समय आ गया है जब इस महाकाव्य का अंत कौन लिखेगा, यह स्पष्ट हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल में ममता की लड़ाई

पश्चिम बंगाल की राजनीति पिछले दशक भर से ममता बनर्जी के नाम पर चल रही है। सीपीएम के लंबे शासन के बाद जब ममता ने राज्य में सत्ता संभाली, तो उन्होंने अपने नेतृत्व में बंगाल को एक नया रूप दिया। लेकिन इस बार की राजनीति इतनी सरल नहीं रही। भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा ने पश्चिम बंगाल में जबरदस्त दखल बढ़ाया है। कई राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर चुनाव प्रचार हुआ है।

एग्जिट पोल में विभिन्न संस्थाओं ने अलग-अलग राय दी है। कुछ पोल ममता की वापसी का संकेत दे रहे हैं, तो कुछ भाजपा की जबरदस्त वापसी की बात कह रहे हैं। पश्चिम बंगाल में २९४ विधानसभा सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए १४८ सीटें जीतना जरूरी है। इस बार की लड़ाई में वाम मोर्चा और कांग्रेस जैसी शक्तियां काफी कमजोर हो गई हैं। अब मुकाबला मुख्य रूप से ममता की तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच है।

तमिलनाडु में स्टालिन की चुनौती

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से ही द्रविड़ आंदोलन के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इस बार स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक के खिलाफ भाजपा के साथ एडीएमके की मजबूत चुनौती है। तमिलनाडु की २३४ विधानसभा सीटों के लिए चुनाव हुए हैं। राज्य में भाषा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे हमेशा राजनीति का केंद्र रहे हैं।

इस बार की राजनीति में हिंदी भाषा का मुद्दा भी काफी केंद्रीय रहा है। द्रमुक ने परंपरागत रूप से तमिल भाषा और संस्कृति की रक्षा का नारा दिया है। एडीएमके भी इसी मुद्दे पर काम कर रहा है। भाजपा यहां अपनी सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी राजनीति को आगे बढ़ा रहा है। तमिलनाडु के नतीजे पूरे दक्षिण भारत की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

असम, केरल और पुडुचेरी: अन्य महत्वपूर्ण मुकाबले

असम में हिमंत बिस्व सरमा ने भाजपा के नेतृत्व में पिछली बार सरकार बनाई थी। इस बार फिर से भाजपा को अपनी सरकार बनाए रखनी है। असम की १२६ विधानसभा सीटें हैं। यहां की राजनीति में आव-भाव, आतंकवाद, शरणार्थी मुद्दे और आर्थिक विकास जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं।

केरल भारत का इकलौता राज्य है जहां साम्यवादी सरकार काफी मजबूती से अपना शासन चला पाई है। पिनाराई विजयन की सीपीएम के नेतृत्व में सरकार पिछली बार जीती थी। इस बार फिर से सीपीएम को जीतना होगा। केरल की १४० विधानसभा सीटें हैं। यहां की राजनीति वर्ग संघर्ष, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहती है।

पुडुचेरी एक केंद्रशासित प्रदेश है, लेकिन वहां भी विधानसभा चुनाव हुए हैं। पुडुचेरी की राजनीति में भी अपने-अपने क्षेत्रीय दल सक्रिय हैं। यहां भी नतीजे राजनीतिक महत्व रखते हैं।

चुनावी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब बस मतों की गिनती का इंतजार है। दोपहर से लेकर शाम तक आने वाले नतीजे भारतीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे। विभिन्न एग्जिट पोल अलग-अलग राय दे रहे हैं, इसलिए यह मान लेना गलत होगा कि नतीजा पहले से ही तय है। मतदाताओं की शक्ति ही अंतिम फैसला करेगी।

ये पांचों राज्य न केवल अपनी-अपनी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इन राज्यों के नतीजों से भविष्य के राष्ट्रीय चुनावों के संकेत भी मिलेंगे। इसलिए आज के नतीजों को लेकर पूरे देश में उत्सुकता और बेचैनी की स्थिति है।

जनता के मताधिकार का प्रयोग हो चुका है। अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से आएंगे नतीजे। ये नतीजे साधारण नतीजे नहीं होंगे, बल्कि ये भारतीय राजनीति की दिशा को निर्धारित करेंगे। अभी तक का सफर रोचक रहा है, और आने वाले नतीजे इससे भी अधिक रोचक साबित होने वाले हैं।