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Thursday, 05 November 2026
राजनीति

सुनील बंसल भाजपा के साइलेंट गेमचेंजर बंगाल चुनाव

author
Komal
संवाददाता
📅 05 May 2026, 5:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 566 views
सुनील बंसल भाजपा के साइलेंट गेमचेंजर बंगाल चुनाव
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है और इस बदलाव के पीछे एक शख्स का नाम बार-बार सुनाई दे रहा है। वह शख्स हैं भाजपा के रणनीतिकार सुनील बंसल, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की चुनावी रणनीति को पूरी तरह नई दिशा दी है। उन्हें भाजपा का साइलेंट गेमचेंजर कहा जा रहा है क्योंकि उनके काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है। जहां दूसरे नेता सार्वजनिक मंचों पर खड़े होकर बातें करते हैं, वहीं सुनील बंसल जमीन पर काम करते हैं।

"बांचते चाईं बीजेपी ताई का दिया नारा" - यह नारा बंगाल की जनता के बीच तेजी से फैल रहा है। इसी नारे के जरिए भाजपा ने बंगाल के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। लेकिन इस नारे के पीछे भी सुनील बंसल की रणनीति ही काम कर रही है। वे समझते हैं कि बंगाल की जनता को स्थानीय भाषा, स्थानीय संस्कृति और स्थानीय मुद्दों से ही जोड़ा जा सकता है।

सुनील बंसल का जन्म और पृष्ठभूमि ऐसी है कि वे बंगाल की राजनीति को गहराई से समझते हैं। उन्होंने कई राजनीतिक अभियानों में सफलतापूर्वक काम किया है। लेकिन उनकी विशेषता यह है कि वे किसी भी तरह की तनावपूर्ण परिस्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभालते हैं। अमित शाह के पास सुनील बंसल को भेजना एक सही निर्णय साबित हुआ है क्योंकि उन्होंने भाजपा के संगठन को मजबूत किया है।

बंगाल की चुनावी रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव

पश्चिम बंगाल में भाजपा को सफल बनाने के लिए सुनील बंसल ने जो रणनीति बनाई है, वह बिल्कुल नई और अलग है। उन्होंने समझा कि बंगाल की जनता को भाजपा की राष्ट्रीय नीतियों से ज्यादा अपने स्थानीय समस्याओं की चिंता है। इसलिए उन्होंने हर जिले, हर गांव और हर शहर के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई। बिहार के चुनाव में जो काम किया गया था, वह बंगाल के लिए सीधे लागू नहीं हो सकता क्योंकि यहां की सामाजिक संरचना, संस्कृति और राजनीतिक परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं।

सुनील बंसल ने बंगाल में जाकर पहले स्थानीय नेताओं, जमीनी कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों से मुलाकात की। वे समझ गए कि बंगाल में साम्यवादी पार्टियों की जड़ें इतनी गहरी हैं कि सीधे टक्कर लेना काम नहीं आएगा। इसलिए उन्होंने एक अलग दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने बंगाल की स्थानीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सम्मान देते हुए भाजपा को पेश किया।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण है "बांचते चाईं बीजेपी ताई का दिया नारा" जो शुद्ध बांग्ला भाषा में है। यह नारा बंगाली जनता के दिलों को छू गया। इसमें "ताई" शब्द का प्रयोग बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बंगाली परंपरा में "ताई" का मतलब बहन होता है और यह शब्द एक आत्मीय भाव जगाता है। सुनील बंसल ने समझा कि राजनीति भी भावनाओं से ही जुड़ी होती है।

जमीनी संगठन को मजबूत करने की कला

सुनील बंसल की सबसे बड़ी ताकत है जमीनी स्तर पर काम करना। उन्होंने बंगाल में भाजपा के संगठन को बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया है। हर पंचायत में, हर गांव में, हर मोहल्ले में भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता नियुक्त किए गए। इन कार्यकर्ताओं को स्थानीय मुद्दों की समझ दी गई और उन्हें यह सिखाया गया कि कैसे जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाए।

भाजपा के नेताओं ने माना है कि सुनील बंसल ने बंगाल में जो जमीनी काम किया है, वह पिछले दस सालों में किसी और ने नहीं किया। उन्होंने महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा, किसानों से सीधे बातचीत की, और दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ विश्वास का संबंध बनाया। यह काम बहुत नाजुक था और इसे करने के लिए बहुत ही संवेदनशीलता की जरूरत थी।

सुनील बंसल ने प्रत्येक समूह के लिए अलग-अलग संदेश तैयार किए। किसानों को उन्होंने बताया कि भाजपा कृषि में सुधार के लिए क्या कर रही है। महिलाओं को उन्होंने महिला सशक्तिकरण के बारे में बताया। दलितों और पिछड़े वर्गों को उन्होंने सामाजिक न्याय के बारे में जानकारी दी। इसी तरह उन्होंने हर वर्ग के साथ विश्वास का रिश्ता बनाया।

अमित शाह का विश्वसनीय और सफल सहयोगी

सुनील बंसल अमित शाह के सबसे करीबी और विश्वसनीय सहयोगियों में से एक हैं। अमित शाह ने उन्हें बंगाल जैसे कठिन राज्य में भेजना उनके प्रति अपने विश्वास का प्रमाण है। बिहार के चुनावों में सुनील बंसल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी। वहां उन्होंने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को बदलने में मदद की। बंगाल में भी वे इसी तरह की सफलता हासिल कर रहे हैं।

अमित शाह की रणनीति है कि हर राज्य में सही व्यक्ति को भेजा जाए। सुनील बंसल बंगाल के लिए सही व्यक्ति साबित हुए हैं क्योंकि वे बंगाल की राजनीति को समझते हैं। उन्हें पता है कि बंगाल की जनता को कैसे संबोधित किया जाए। उन्हें पता है कि स्थानीय राजनीतिक नेताओं के साथ कैसे काम किया जाए।

बंगाल के चुनाव में भाजपा की जो प्रगति हुई है, उसका एक बड़ा हिस्सा सुनील बंसल के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी रणनीति का परिणाम है। उन्होंने साबित कर दिया है कि राजनीति में सफलता के लिए सार्वजनिक होना जरूरी नहीं है। पर्दे के पीछे से भी काम किया जा सकता है और वह काम अक्सर सबसे प्रभावशाली साबित होता है। सुनील बंसल भाजपा के लिए एक असली गेमचेंजर हैं।