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Wednesday, 20 May 2026
राजनीति

केरल CM सस्पेंस: सुधाकरन दिल्ली पहुंचे, बोम्मई का तंज

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Komal
संवाददाता
📅 12 May 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 567 views
केरल CM सस्पेंस: सुधाकरन दिल्ली पहुंचे, बोम्मई का तंज
📷 aarpaarkhabar.com

केरल की राजनीति में एक बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को शानदार जीत मिली है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर जो खींचतान चल रही है, वह पार्टी की आंतरिक कमजोरियों को उजागर कर रही है। चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद से ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में भारी असहमति दिख रही है।

यूडीएफ ने कुल 140 विधानसभा सीटों में से 102 पर अपना कब्जा जमाया है, जो स्पष्ट बहुमत दर्शाता है। चार मई को जब परिणाम घोषित किए गए, तब से ही सवाल उठने लगे कि आखिरकार कौन अगला मुख्यमंत्री बनेगा? लेकिन आज तक न तो कांग्रेस इस बारे में कोई निर्णय ले सकी है और न ही किसी ने स्पष्ट करा दिया है कि नेतृत्व किसके हाथ में जाएगा।

दिल्ली पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुधाकरन

इसी बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके सुधाकरन ने दिल्ली की यात्रा करी है। यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण बताई जा रही है क्योंकि माना जा रहा है कि वह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से मुख्यमंत्री पद को लेकर बातचीत करने जा रहे हैं। सुधाकरन का दिल्ली जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि केरल कांग्रेस में किसी तरह का समझौता नहीं हो पा रहा है और अब सब कुछ राज्य से बाहर निर्णय होने वाला है।

दिल्ली पहुंचने से पहले सुधाकरन ने मीडिया से बातचीत की और बताया कि वह पार्टी के उच्च नेतृत्व से मुख्यमंत्री पद को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा करने जा रहे हैं। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सुधाकरन खुद भी मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदारों में माने जाते हैं। ऐसे में उनका दिल्ली जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

भाजपा का तंज - पार्टी दूसरों के सहारे चल रही है

कांग्रेस की इस आंतरिक खींचतान को देखते हुए भाजपा ने तीव्र प्रहार किए हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस पार्टी को लेकर कठोर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब अपने दम पर चल नहीं सकती और उसे हमेशा दूसरों का सहारा लेना पड़ता है।

बोम्मई के अनुसार, जब भी कांग्रेस को किसी तरह का राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ता है, तब वह दूसरे दलों के कंधों पर सवार हो जाती है। केरल में भी उसी का उदाहरण दिख रहा है। यूडीएफ के तहत विभिन्न पार्टियों के साथ गठबंधन के बावजूद कांग्रेस अपने ही लोगों में सहमति नहीं बना पा रही है। यह पार्टी की कमजोरी को दर्शाता है।

भाजपा नेता ने आगे कहा कि एक बार फिर से केरल के मामले में कांग्रेस पार्टी का असली चेहरा दिखाई दे रहा है। जहां एक तरफ पार्टी जनता से कहती है कि वह विकास के लिए काम करेगी, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अंदर ही गुटबाजी है और नेताओं के बीच असहमति है। यह जनता को गुमराह करने के समान है।

राजनीतिक संकट की गहराई

केरल में जो परिस्थितियां बन गई हैं, वह न केवल कांग्रेस के लिए बल्कि पूरे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक हैं। एक तरफ जनता ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को शानदार जनादेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी इतनी बड़ी बातों में उलझी हुई है कि मुख्यमंत्री पद तय नहीं कर पा रही है।

इस देरी का एक और असर भी दिखाई दे रहा है। राज्य में एक अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। कौन सा नीति निर्माण होगा, किस दिशा में राज्य की विकास की योजनाएं बनेंगी, यह सब कुछ अभी अनिश्चित है। ऐसी परिस्थिति में राज्य के विकास में बाधा आना स्वाभाविक है।

कांग्रेस पार्टी को अब तुरंत फैसला लेना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि मुख्यमंत्री पद किसे दिया जाएगा। अगर पार्टी अब भी समय बर्बाद करती है, तो जनता का विश्वास भी संकट में पड़ सकता है। भाजपा के आलोचनात्मक बयान के बाद अब सभी की निगाहें कांग्रेस के दिल्ली केंद्रीय नेतृत्व पर हैं।

केरल की राजनीति में यह मोड़ काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। अगर कांग्रेस जल्दी फैसला नहीं लेती है, तो न केवल पार्टी के लिए बल्कि पूरे यूडीएफ गठबंधन के लिए यह मुद्दा बड़ी समस्या बन सकता है। सुधाकरन की दिल्ली यात्रा इसी सवाल का जवाब देने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी कि आखिरकार कौन अगला मुख्यमंत्री होगा और केरल की राजनीति में इस अनिश्चितता का अंत कब होगा।