🔴 ब्रेकिंग
रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|रांची छात्रों का हाई कोर्ट में विरोध, सीएम का पुतला फूंकेंगे|बक्करवाला एनकाउंटर: भाऊ गैंग के दो शूटर गिरफ्तार|आज की टॉप न्यूज: सीमा सुरक्षा और खाप समाचार|गोविंदा दूसरी शादी करने वाले थे: सुनीता आहूजा का खुलासा|पाकिस्तान से खतरा, चीन से असली टक्कर: नरवणे|यूपी शहीद परिवार छात्राओं को स्कूटी योजना|हरियाणा खाप लिव-इन रिलेशन के खिलाफ लव मैरिज समर्थक|ईरान पर अमेरिका के कड़े प्रतिबंध और चीन की भूमिका|प्याज का रस से बालों का झड़ना रोकें – जावेद हबीब का नुस्खा|UP में 9 IPS अफसरों का बड़ा तबादला, 7 जिलों के SP-SSP बदले|
Saturday, 03 October 2026
राजनीति

दिल्ली प्रदूषण फंड: 80 करोड़ में से सिर्फ 16 करोड़ खर्च

author
Komal
संवाददाता
📅 31 March 2026, 4:54 PM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
दिल्ली प्रदूषण फंड: 80 करोड़ में से सिर्फ 16 करोड़ खर्च
📷 Unsplash

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण: 80 करोड़ का फंड, महज 16 करोड़ का इस्तेमाल

प्रदूषण से जूझ रही राजधानी दिल्ली के लिए एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदूषण कम करने के लिए आवंटित 80.65 करोड़ रुपए में से अब तक सिर्फ 16 करोड़ रुपए का ही उपयोग हो सका है। यह आंकड़ा इस बात का सबूत है कि नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन के बीच एक बड़ी खाई है।

स्विस कंपनी IQAir की विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश बना हुआ है। उत्तर प्रदेश का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जहां PM2.5 का स्तर 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया है।

दिल्ली प्रदूषण फंड: 80 करोड़ में से सिर्फ 16 करोड़ खर्च

NCR में प्रदूषण का बढ़ता स्तर

नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का हाल और भी चिंताजनक है। दिल्ली में PM2.5 का स्तर 99.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है। यह स्थिति तब है जब सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए भारी धनराशि आवंटित की गई है।

लोनी के बाद बिर्निहाट और दिल्ली का नंबर आता है। NCR के कई अन्य शहर भी प्रदूषण की सूची में ऊपरी स्थान पर हैं। यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि केवल पैसा आवंटित करना काफी नहीं है, बल्कि उसका सही उपयोग भी जरूरी है।

फंड के धीमे उपयोग के कारण

| विवरण | राशि (करोड़ में) | प्रतिशत |

------------------------------------
कुल आवंटित राशि80.65100%
खर्च की गई राशि16.0019.8%
शेष राशि64.6580.2%

विशेषज्ञों का मानना है कि फंड के धीमे उपयोग के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ी समस्या है नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन के बीच समन्वय की कमी। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी भी इसका एक प्रमुख कारण है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाई गई योजनाओं का धरातल पर सही तरीके से अमल नहीं हो पा रहा। तकनीकी समस्याएं, नौकरशाही की देरी और स्थानीय स्तर पर जागरूकता की कमी भी इसमें बाधक बन रही है।

प्रदूषण से स्वास्थ्य पर प्रभाव

PM2.5 के बढ़ते स्तर का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस की बीमारियां, दिल की समस्याएं और फेफड़ों के रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों पर इसका गंभीर प्रभाव देखने को मिल रहा है।

डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली और NCR में रहने वाले लोगों की जीवन प्रत्याशा प्रदूषण के कारण कम हो रही है। यह स्थिति न केवल व्यक्तिगत स्तर पर चिंताजनक है, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बजट पर भी अतिरिक्त दबाव डाल रही है।

आगे की राह

अब सवाल यह है कि बची हुई 64.65 करोड़ रुपए की राशि का बेहतर उपयोग कैसे किया जाए। पर्यावरण विशेषज्ञों का सुझाव है कि तत्काल एक टास्क फोर्स का गठन होना चाहिए जो फंड के उपयोग की निगरानी करे।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक समयबद्ध कार्य योजना बनानी होगी। इसमें वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना, औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण, और निर्माण गतिविधियों से उठने वाली धूल को रोकना शामिल है।

साथ ही, जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाना जरूरी है। सामुदायिक भागीदारी के बिना प्रदूषण नियंत्रण का कोई भी प्रयास अधूरा रह जाता है। समय आ गया है कि सिर्फ योजनाएं बनाने के बजाय उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने पर फोकस किया जाए।