पेट्रोल डीजल के दाम बढ़े, 3 रुपये की बढ़ोतरी
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण विश्व बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू गई हैं और भारत भी इसका असर झेल रहा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता परेशान हो गई है। यह वृद्धि सीधे तौर पर वैश्विक राजनीतिक हालात का परिणाम है और इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने वाला है।
देश भर में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। लोग अपनी गाड़ियों में ईंधन भरवाने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। छोटे व्यापारी और ऑटो-रिक्शा चालक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं क्योंकि उनका सीधा खर्च बढ़ गया है।
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल
विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले कुछ हफ्तों में लगातार बढ़ रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी राजनीतिक तनाव के कारण ऐसा हुआ है। जब दो बड़ी शक्तियां आपस में उलझती हैं, तो पूरी दुनिया को इसका कीमत चुकानी पड़ता है। मध्य-पूर्व में किसी भी प्रकार की अस्थिरता सीधे तौर पर तेल की आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करती है।
कच्चे तेल की कीमत बैरल प्रति सौ डॉलर के करीब पहुंच गई है। यह कीमत पिछले कई महीनों में सबसे अधिक है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यह स्थिति बहुत ही नाजुक है और किसी भी समय और बदतर हो सकती है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात करता है।
भारतीय उपभोक्ताओं पर सीधा प्रभाव
पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का मतलब है कि आम आदमी की जेब से सीधे पैसे निकलेंगे। परिवहन, डिलीवरी, किराया - सब कुछ महंगा हो जाएगा। दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाएंगी क्योंकि उन्हें ले जाने के लिए ईंधन का खर्च बढ़ेगा।
बस, ट्रक और ऑटो-रिक्शा चलाने वाले सबसे पहले किराया बढ़ा देंगे। यह महंगाई आखिरकार गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों तक पहुंचेगी। दूध, सब्जी, अनाज - सब कुछ महंगा हो जाएगा। स्कूल जाने वाले बच्चों का किराया बढ़ेगा। कल-कारखानों में माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी।
रेल और हवाई परिवहन भी प्रभावित होंगे। लेकिन रेलवे और एयरलाइंस की कीमतें तुरंत नहीं बढ़ती हैं, इसलिए उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। सरकार को भी इस माहौल में सावधानी से कदम उठाने होंगे। यदि वह पेट्रोल और डीजल पर टैक्स बढ़ा दे, तो महंगाई और भी तेज हो जाएगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही वैश्विक मंदी से जूझ रही है। ऐसे समय में तेल की कीमतें बढ़ना और भी नुकसानदेह है। जीडीपी की वृद्धि दर पहले से ही धीमी हो चुकी है। महंगाई दर बढ़ने से रिज़र्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव हो सकता है।
उद्योग जगत भी परेशान है। विनिर्माण क्षेत्र में लागत बढ़ेगी, जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। बड़ी कंपनियां अपने लाभ मार्जिन कम करने के बजाय कीमतें बढ़ाएंगी। छोटे और मझोले उद्योग तो और भी बुरे हाल में हैं। कई छोटे कारोबारी अपना व्यवसाय बंद भी कर सकते हैं।
कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा। ट्रैक्टर चलाने का खर्च बढ़ेगा, कीटनाशक और उर्वरक महंगे हो जाएंगे। किसानों की लागत बढ़ेगी, लेकिन अगर फसल की कीमत नहीं बढ़ी, तो वे नुकसान उठाएंगे।
निर्यात भी प्रभावित होगा। भारतीय उत्पाद विश्व बाजार में महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यात कम हो सकता है। यह विदेशी मुद्रा भी प्रभावित करेगा और चालू खाता घाटा और भी बढ़ेगा।
सरकार को अभी से ही दीर्घकालीन रणनीति बनानी चाहिए। तेल की खपत कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर देना चाहिए। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहिए। ऐसा करने से ही भारत इस तरह के संकटों से बच सकेगा।
फिलहाल, आम जनता को अपना बजट सावधानी से बनाना होगा। ईंधन की बचत करनी होगी। सरकारी परिवहन का उपयोग करना चाहिए। पड़ोसी को लिफ्ट देकर पेट्रोल शेयर करना चाहिए। ऐसी छोटी-छोटी चीजें भी इस संकट को कम करने में मदद कर सकती हैं।




