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Wednesday, 20 May 2026
समाचार

अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू में आतंकी गतिविधियां बढ़ीं

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Komal
संवाददाता
📅 20 May 2026, 6:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू में आतंकी गतिविधियां बढ़ीं
📷 aarpaarkhabar.com

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में आतंकवादियों की गतिविधियां चिंताजनक रूप से बढ़ गई हैं। अमरनाथ पवित्र यात्रा से पहले सुरक्षा एजेंसियां उच्च स्तर पर अलर्ट हो गई हैं। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुंछ, राजोरी, किश्तवाड़, डोडा और ऊधमपुर के दुर्गम जंगलों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आतंकवादियों की गतिविधि तेजी से बढ़ रही है।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) के समीपवर्ती कृष्णा घाटी सेक्टर में हाल ही में घुसपैठ की कोशिश का प्रयास किया गया था। इस घटना के बाद से ही सुरक्षा बलों में सर्तकता का माहौल व्याप्त है। रक्षा मंत्रालय और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियां इस खतरे को गंभीरता से ले रही हैं क्योंकि आने वाले दिनों में लाखों श्रद्धालु अमरनाथ के पवित्र गुफा मंदिर के दर्शन के लिए यात्रा करने वाले हैं।

सुरक्षा व्यवस्था में तेजी

जम्मू-कश्मीर के प्रशासन और सेना ने अभी से ही सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय ले लिया है। यात्रा मार्गों पर चेकपोस्ट की संख्या बढ़ाई जा रही है। सेना के विशेष बल और सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया जा रहा है। डोडा और किश्तवाड़ जिलों में विशेष ऑपरेशन शुरू किए गए हैं ताकि आतंकवादियों को सफलता न मिल सके।

स्थानीय पुलिस बल भी अपनी गश्तों को बढ़ाया गया है। गाओं-गलियों में सुरक्षा संबंधी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। सामान्य नागरिकों से कहा जा रहा है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा बलों को दें। स्थानीय सूचना नेटवर्क को भी सक्रिय किया गया है जो आतंकवादियों की मूवमेंट के बारे में रीयल-टाइम जानकारी देते हैं।

पुंछ जिले के प्रशासक ने कहा है कि सभी सीमावर्ती गांवों में सतर्कता बरती जा रही है। रात्रिकालीन गश्त को भी तेज किया गया है। ड्रोन निगरानी का भी उपयोग किया जा रहा है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके। नागरिकों से आवाजाही के समय सावधानी बरतने का भी आग्रह किया गया है।

घुसपैठ के खतरे में इजाफा

आतंकवादी संगठन अक्सर बड़ी धार्मिक यात्राओं के दौरान घुसपैठ और आतंकवादी कार्रवाई की कोशिश करते हैं। अमरनाथ यात्रा एशिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा मानी जाती है। इसमें हर साल लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। ऐसे में आतंकवादियों के लिए यह एक बड़ा लक्ष्य बन जाता है।

पिछले वर्षों में कई बार आतंकवादियों ने यात्रा मार्गों पर हमले करने की कोशिश की है। २०१६ में यात्रा के दौरान एक बड़ा हमला हुआ था जिसमें कई श्रद्धालु मारे गए थे। उसके बाद से ही सुरक्षा में और भी सुधार किए गए हैं। लेकिन आतंकवादी संगठन लगातार नई रणनीति अपना रहे हैं।

बर्ड फ्लू, कोविड और अन्य स्वास्थ्य कारणों से पिछले कुछ सालों में यात्रा में कुछ कमी आई थी, लेकिन इस बार पूर्ण स्वास्थ्य के साथ यात्रा संभव है। इसलिए श्रद्धालुओं की संख्या में भी भारी वृद्धि की संभावना है। ऐसे में सुरक्षा का दायित्व और भी बढ़ जाता है।

आतंकवाद विरोधी अभियान में तेजी

सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान को काफी तेज कर दिया है। राजोरी और पुंछ क्षेत्र में पिछले महीने में कई आतंकवादी मार गिराए गए थे। लेकिन अभी भी कुछ आतंकवादी सक्रिय हैं जो नई घुसपैठ करना चाहते हैं। पाकिस्तान की ओर से भी नई भर्ती होने का संदेह किया जा रहा है।

भारतीय सेना के अनुसार, इस साल जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी कार्रवाई में कुछ वृद्धि हुई है। विशेष रूप से ग्रीष्मकाल में जब घुसपैठ के रास्ते खुल जाते हैं, तब आतंकवादियों की गतिविधि बढ़ जाती है। सेना ने घाटियों और दर्रों में अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियां तैनात की हैं।

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) भी एलओसी पर अपनी निगरानी को और सख्त बना दिया है। ड्रोन निगरानी और थर्मल इमेजिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। पाकिस्तान की ओर से आने वाली किसी भी संदिग्ध हरकत को तुरंत पकड़ने के लिए सतर्कता बरती जा रही है।

यात्रा शुरू होने से पहले पूरे रूट को सुरक्षित बनाने के लिए एक व्यापक सफाई अभियान चलाया जाएगा। यात्रा के दौरान हर प्रवेश बिंदु पर कड़ाई से चेकिंग की जाएगी। श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखा जाएगा।

आशा की जाती है कि इस बार की अमरनाथ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुरक्षित रहेगी। लेकिन सुरक्षा बलों की सतर्कता और जनता के सहयोग के बिना यह संभव नहीं हो सकता। सभी को मिलकर आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होना होगा।