🔴 ब्रेकिंग
विराट कोहली जॉर्डन कॉक्स का मेंटर, फोन पर सदा मिलते हैं|शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026: साढ़ेसाती से राहत|पुरानी जींस से बनाएं प्रोडक्ट्स और कमाएं पैसे|लखनऊ सिपाही को नाम के कारण गिरफ्तार किया गया|विनेश फोगाट का BJP पर तीखा हमला, बृजभूषण को बताया गुंडा|नेतन्याहू का ममदानी पर बड़ा राजनीतिक वार|सोने की खदान धंसी, 30 खनिकों की मौत|दिल्ली की हवा और यमुना प्रदूषण पर समिति की रिपोर्ट|ईरान-ओमान समझौता: ट्रंप की धमकी क्यों?|असीम और अनुज लुगुन की कविता – मेरी बाँहें आसमान|विराट कोहली जॉर्डन कॉक्स का मेंटर, फोन पर सदा मिलते हैं|शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026: साढ़ेसाती से राहत|पुरानी जींस से बनाएं प्रोडक्ट्स और कमाएं पैसे|लखनऊ सिपाही को नाम के कारण गिरफ्तार किया गया|विनेश फोगाट का BJP पर तीखा हमला, बृजभूषण को बताया गुंडा|नेतन्याहू का ममदानी पर बड़ा राजनीतिक वार|सोने की खदान धंसी, 30 खनिकों की मौत|दिल्ली की हवा और यमुना प्रदूषण पर समिति की रिपोर्ट|ईरान-ओमान समझौता: ट्रंप की धमकी क्यों?|असीम और अनुज लुगुन की कविता – मेरी बाँहें आसमान|
Wednesday, 19 August 2026
समाचार

महिलाओं में UTI का खतरा: लक्षण और घरेलू उपाय

author
Komal
संवाददाता
📅 20 May 2026, 6:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 330 views
महिलाओं में UTI का खतरा: लक्षण और घरेलू उपाय
📷 aarpaarkhabar.com

महिलाओं में यूरिन इंफेक्शन यानी यूटीआई एक बेहद आम समस्या बन गई है। इस समस्या की सबसे परेशानी वाली बात यह है कि चाहे आप कितनी भी साफ-सफाई रखें, फिर भी आप इससे ग्रस्त हो सकती हैं। आजकल के दौर में युवा महिलाओं से लेकर मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं तक में यूटीआई की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आइए समझते हैं कि आखिर क्या हैं इसके कारण, लक्षण और इससे कैसे बचा जा सकता है।

महिलाओं में UTI के मुख्य कारण

यूरिन इंफेक्शन होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं और ज्यादातर महिलाएं इन कारणों से अनजान रहती हैं। सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात है हमारे शरीर की बनावट। महिलाओं का मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में काफी छोटा होता है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से संक्रमण कर सकते हैं। यह शारीरिक अंतर ही महिलाओं को यूटीआई का ज्यादा शिकार बनाता है।

दूसरा प्रमुख कारण है पर्याप्त पानी न पीना। जब हम पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते, तो हमारा मूत्र गाढ़ा हो जाता है। यह गाढ़ा मूत्र बैक्टीरिया के लिए एक आदर्श माहौल बनाता है। इसलिए पानी की कमी से यूटीआई का खतरा बढ़ जाता है।

हार्मोनल बदलाव भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। महिलाओं में मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोनल बदलाव होते हैं जो योनि के पीएच स्तर को प्रभावित करते हैं। इससे बैक्टीरिया के विकास में मदद मिलती है।

रासायनिक उत्पादों का उपयोग भी एक अहम कारण है। सुगंधित साबुन, डियोडरेंट, पाउडर और अन्य केमिकल प्रोडक्ट्स का अत्यधिक उपयोग योनि के प्राकृतिक बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया का विकास होता है। इसके अलावा तंग कपड़े पहनना, नियमित व्यायाम न करना और तनाव भी यूटीआई के कारण बन सकते हैं।

यूरिन इंफेक्शन के शुरुआती लक्षण

यूटीआई के लक्षण आमतौर पर बेहद स्पष्ट होते हैं और इन्हें पहचानना बिल्कुल मुश्किल नहीं है। सबसे पहला लक्षण है मूत्र त्याग के समय दर्द और जलन महसूस होना। यह दर्द हल्का या तीव्र दोनों हो सकता है।

दूसरा महत्वपूर्ण लक्षण है बार-बार मूत्र त्याग की इच्छा होना, खासकर रात के समय। आप सामान्य से कहीं अधिक बार बाथरूम जाना पड़ता है। मूत्र का रंग गहरा या बादल जैसा हो सकता है, और मूत्र से तीव्र गंध आ सकती है।

कई महिलाओं को निचले पेट में दर्द, पीठ के निचले हिस्से में दर्द या पेड़ू में दबाव महसूस होता है। कुछ मामलों में बुखार और ठंड लगने जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। यदि संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए, तो गंभीर बुखार, उल्टी और पीठ में तीव्र दर्द हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है।

UTI से बचने के प्रभावी घरेलू उपाय

यूटीआई से बचने के लिए कुछ सरल लेकिन बेहद असरदार घरेलू उपाय हैं। सबसे पहले तो अपने पानी की खपत बढ़ाएं। दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी पिएं। अधिक पानी पीने से मूत्र अधिक पतला रहता है और बैक्टीरिया आसानी से बाहर निकल जाते हैं।

क्रैनबेरी का रस यूटीआई के इलाज में बेहद प्रभावी है। क्रैनबेरी में प्रोएंथोसायनिडिन नामक तत्व होता है जो बैक्टीरिया को मूत्राशय की दीवारों से चिपकने से रोकता है। रोजाना एक गिलास क्रैनबेरी जूस पिएं, लेकिन सुनिश्चित करें कि यह शुद्ध और चीनी रहित हो।

लहसुन का सेवन भी बेहद लाभकारी है क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। रोजाना एक कली कच्चा लहसुन खाएं या इसे अपने भोजन में शामिल करें। बेकिंग सोडा का घोल भी मूत्र को कम अम्लीय बनाकर दर्द कम करने में मदद करता है। एक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर दिन में एक बार पिएं।

व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना भी अत्यंत जरूरी है। मूत्र त्याग के बाद आगे की ओर से पीछे की ओर पोंछें, न कि उल्टा। कृत्रिम रासायनिक उत्पादों का उपयोग कम से कम करें। सूती अंतरंग पहनें और तंग कपड़ों से बचें। नियमित व्यायाम और योग भी इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं।

विटामिन सी की खपत बढ़ाएं क्योंकि यह मूत्र को अधिक अम्लीय बनाता है, जिससे बैक्टीरिया के विकास में बाधा आती है। संतरा, नींबू, कीवी और अन्य साइट्रिक फल खाएं। तुलसी की चाय भी बेहद लाभकारी है और इसे दिन में दो बार पिया जा सकता है।

यदि लक्षण लगातार बने रहें या गंभीर हों, तो बिना देरी किए चिकित्सक से परामर्श लें। समय पर उपचार संक्रमण को गंभीर स्थिति तक पहुंचने से रोकता है। याद रखें कि यूटीआई एक आम समस्या है लेकिन इसे नजरअंदाज करना कभी भी सही नहीं है। अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।