ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम, समझौता न हो तो कड़ी कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बहुत ही कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सीधे शब्दों में ईरान को यह संदेश दिया है कि यदि वह नई परमाणु डील पर हस्ताक्षर नहीं करता है तो अमेरिका गंभीर और कठोर कार्रवाई के लिए तैयार है। ट्रंप का यह बयान दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत के संवेदनशील दौर में आया है। वर्तमान समय में दोनों पक्षों के बीच बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अंतिम निर्णय होने वाला है।
अमेरिकी राष्ट्रपति की यह चेतावनी बहुत ही गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इससे यह स्पष्ट है कि अमेरिका ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर कितना संजीदा है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा है कि समझौता तो सबके लिए अच्छा है, लेकिन यदि ईरान समझौते पर सहमत नहीं होता है तो अमेरिका को अपनी सुरक्षा के लिए कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान पारदर्शिता के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदी लगाए और अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षकों को पूरी छूट दे।
ईरान के साथ परमाणु मुद्दे की पृष्ठभूमि
ईरान के साथ परमाणु समझौता वर्षों से एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। 2015 में ईरान और छह प्रमुख शक्तियों - अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी - के बीच एक परमाणु समझौता हुआ था। इस समझौते को Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) कहा जाता था। लेकिन ट्रंप की पहली कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने इस समझौते से अपने आप को अलग कर लिया था। अब ट्रंप दोबारा अपने दूसरे कार्यकाल में इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं।
ट्रंप का मानना है कि पिछला समझौता बहुत कमजोर था और ईरान को बहुत अधिक छूट दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नजरिया रखना चाहिए ताकि वह परमाणु हथियार न बना सके। इसी कारण से वर्तमान समय में दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत चल रही है और एक नए समझौते की ओर प्रयास किए जा रहे हैं।
वर्तमान बातचीत के महत्वपूर्ण पहलू
वर्तमान बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर सहमति बनानी है। पहला मुद्दा ईरान के परमाणु संवर्धन (enrichment) की सीमा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से पारदर्शी बनाए और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (IAEA) को पूरी छूट दे। दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा अर्थनीति प्रतिबंधों को लेकर है। अमेरिका को चाहिए कि ईरान पर लगे प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाए, लेकिन केवल तभी जब ईरान समझौते की सभी शर्तें पूरी करे।
तीसरा महत्वपूर्ण पहलू ईरान के साथ मिसाइल कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका का मानना है कि ईरान की मिसाइलें भी परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हो सकती हैं, इसलिए इन पर भी नियंत्रण होना चाहिए। लेकिन ईरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम शुद्ध रूप से रक्षात्मक है और इसमें अंतर्राष्ट्रीय समझौते की बातचीत में शामिल नहीं होना चाहिए।
ईरान की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
ईरान की ओर से अब तक कहा गया है कि वह एक न्यायसंगत और पारस्परिक समझौते के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान किसी भी दबाव या धमकी में नहीं आएगा। वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दृढ़ रहेगा। लेकिन साथ ही ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि बातचीत के लिए वह खुला है, बशर्ते अमेरिका भी अपनी मांग को थोड़ा नरम करे।
ट्रंप की चेतावनी के बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों और इजराइल को लगता है कि अमेरिका की कड़ी मुद्रा से ईरान को काबू में रखा जा सकता है। हालांकि, रूस और चीन का कहना है कि दोनों पक्षों को बातचीत के माध्यम से अपने मतभेदों को सुलझाना चाहिए। वे यह भी मानते हैं कि अमेरिका की धमकियां स्थिति को और खराब कर सकती हैं।
आने वाले समय में देखना होगा कि ईरान ट्रंप की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देश एक नए समझौते पर पहुंच सकते हैं। यदि बातचीत विफल होती है तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारी तनाव की स्थिति बन सकती है। विश्व शांति के लिए इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर जल्दी से सकारात्मक समझौता होना बहुत जरूरी है। अभी बातचीत अंतिम चरण में है और आने वाले कुछ हफ्तों में ही फैसला होने की संभावना है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संवेदनशीलता और समझदारी की अपेक्षा करता है ताकि इस संकट को शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जा सके।




