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Thursday, 21 May 2026
समाचार

अधिक मास 2024: शुभ कार्य बंद, जानें महत्व

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Komal
संवाददाता
📅 21 May 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
अधिक मास 2024: शुभ कार्य बंद, जानें महत्व
📷 aarpaarkhabar.com

# अधिक मास 2024: 15 जून तक शुभ कार्य निषिद्ध

इस बार हमारे धार्मिक कैलेंडर में एक विशेष और महत्वपूर्ण समय आने वाला है। 17 मई से लेकर 15 जून तक का समय अधिक मास के रूप में मनाया जाएगा। यह लगभग 30 दिनों का विशेष काल हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पूरी अवधि के दौरान सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर अधिक मास क्या होता है और इसके दौरान शुभ कार्य क्यों निषिद्ध होते हैं।

अधिक मास का अर्थ और गणना

अधिक मास को हिंदू धर्म के प्राचीन ज्योतिष और कैलेंडर विज्ञान में एक अतिरिक्त महीने के रूप में परिभाषित किया गया है। भारतीय चंद्र कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा की गतिविधियों पर आधारित है। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा होता है। इसी कारण हर दो से तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है ताकि चंद्र कैलेंडर और सौर कैलेंडर में तालमेल बना रहे।

इस बार का अधिक मास, अधिक ज्येष्ठ के नाम से जाना जा रहा है। इसका मतलब यह है कि ज्येष्ठ मास दो बार आ रहा है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक चंद्र महीना 29.5 दिनों का होता है, जबकि एक सौर महीना 30 से 31 दिनों का होता है। इसी अंतर को पूरा करने के लिए अधिक मास की व्यवस्था की गई है। ज्योतिषीय गणना के आधार पर यह समय निर्धारित किया जाता है कि कब अधिक मास आएगा।

शुभ कार्यों पर प्रतिबंध का कारण

हिंदू धर्मशास्त्र और पुराणों में अधिक मास के दौरान शुभ कार्यों को टालने की परंपरा का वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि देवताओं ने स्वयं इस माह को ठुकरा दिया था। पौराणिक मान्यता के अनुसार, अधिक मास के दौरान देवताओं की कृपा और आशीर्वाद का सामान्य प्रवाह बाधित होता है। इसीलिए इस समय विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, नामकरण और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य नहीं किए जाते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि भारतीय हिंदू कैलेंडर देवताओं के साथ सामंजस्य रखता है। माना जाता है कि हर महीने का एक विशेष देवता होता है और उस महीने में किए जाने वाले कार्यों का सीधा संबंध उस देवता से रहता है। जब अधिक मास आता है, तो यह मान्यता है कि इस महीने का कोई निर्धारित देवता नहीं होता। इसलिए इसे अशुभ माना जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि अधिक मास घोषित मास है। इसमें किए गए कार्य पूरे फल नहीं देते। इसी वजह से विद्वानों और पंडितों ने सलाह दी है कि इस समय बड़े और महत्वपूर्ण कार्य स्थगित कर दिए जाएं। हालांकि, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों को इस दौरान विशेष महत्व दिया जाता है।

15 जून के बाद सामान्य स्थिति

15 जून के बाद जब अधिक मास समाप्त हो जाएगा, तो सभी शुभ कार्यों के लिए समय सामान्य हो जाएगा। उस समय से ही विवाह, जन्मदिन की पार्टियां, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य संस्कार किए जा सकते हैं। पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त भी देखे जा सकते हैं।

इस अवधि के दौरान परिवार के सदस्यों को धैर्य रखने की सलाह दी जाती है। यदि कोई महत्वपूर्ण कार्य 15 जून के बाद के लिए स्थगित करना पड़े, तो इसे बुरा नहीं माना जाता। बल्कि यह माना जाता है कि सही समय पर किए गए कार्य हमेशा बेहतर फल देते हैं।

हिंदू धर्म में समय की गणना बहुत महत्वपूर्ण है और अधिक मास की परंपरा इसका ही एक प्रमाण है। यह परंपरा हजारों साल पुरानी है और आज भी लाखों लोग इसका पालन करते हैं। चाहे आधुनिक विज्ञान क्या कहे, हमारी संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान हैं। इसलिए 17 मई से 15 जून तक का यह समय धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण रहेगा।