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Saturday, 04 July 2026
टेक

ट्रंप ने AI से करेगा स्वास्थ्य जांच

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Komal
संवाददाता
📅 22 May 2026, 5:32 AM ⏱ 1 मिनट 👁 489 views
ट्रंप ने AI से करेगा स्वास्थ्य जांच
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जो स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाला है। इस निर्णय के तहत सरकार चैटजीपीटी जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों का उपयोग करके सभी 50 अमेरिकी राज्यों की स्वास्थ्य योजनाओं की ऑडिट रिपोर्ट की गहन जांच करेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में धोखाधड़ी को रोकना और लाखों-करोड़ों डॉलर की सरकारी धनराशि को बचाना है।

यह कदम अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के इतिहास में एक अभूतपूर्व पहल है जहां पहली बार किसी प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य धोखाधड़ी की जांच करने का प्रस्ताव रखा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि एआई तकनीक मानव त्रुटियों को कम करेगी और अधिक सटीकता के साथ धोखाधड़ी को पकड़ने में मदद करेगी।

एआई तकनीक का उपयोग और इसके फायदे

ट्रंप प्रशासन की योजना के अनुसार, चैटजीपीटी और अन्य एआई मॉडल्स का उपयोग करके स्वास्थ्य विभाग की टीम मेडिकेयर और मेडिकेड जैसी बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े सभी प्रकार की ऑडिट रिपोर्ट्स का विश्लेषण करेगी। इन एआई टूल्स का मुख्य काम संदिग्ध लेनदेन, अनुचित दावे और संभावित धोखाधड़ी के मामलों को चिन्हित करना है।

प्रशासन के प्रवक्ता के अनुसार, यह तकनीक हजारों दस्तावेजों को कुछ ही घंटों में प्रोसेस कर सकती है, जो पारंपरिक तरीकों से महीनों लग जाते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि अधिक संख्या में धोखाधड़ी के मामलों को पकड़ा जा सकेगा। यह प्रक्रिया सरकार को प्रतिवर्ष अरबों डॉलर बचाने में मदद कर सकती है जो वर्तमान में स्वास्थ्य धोखाधड़ी के कारण बर्बाद हो जाते हैं।

एआई सिस्टम असामान्य पैटर्न को पहचानने में बेहद कुशल है। उदाहरण के लिए, यह एक ही दिन में किसी मरीज के लिए असामान्य और अत्यधिक महंगी सेवाओं, या ऐसी दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन को चिन्हित कर सकता है जो चिकित्सकीय दृष्टि से किसी विशेष बीमारी के लिए उपयुक्त नहीं हैं। यह मेशीन लर्निंग तकनीक लगातार सीखती है और सुधरती है, जिससे इसकी सटीकता समय के साथ बढ़ती है।

आलोचकों की चिंताएं और संभावित समस्याएं

हालांकि, इस नई पहल की आलोचना भी काफी हो रही है। स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ और नागरिक अधिकार संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि एआई सिस्टम को गलतियां कर सकते हैं। विशेषकर, वे चिंतित हैं कि एआई गलत तरीके से मरीजों को धोखाधड़ी के आरोप में फंसा सकता है, या वास्तविक धोखाधड़ी को भी छोड़ सकता है।

एक प्रमुख आलोचक ने कहा कि एआई के फैसले अक्सर "ब्लैक बॉक्स" होते हैं, जिसका अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति या विशेषज्ञ को यह समझना मुश्किल होता है कि एआई ने कोई विशेष निर्णय क्यों लिया। इससे अन्यायपूर्ण परिणाम हो सकते हैं। साथ ही, एआई सिस्टम को ट्रेनिंग देने के लिए जिन डेटा का उपयोग किया जाता है, उनमें यदि कोई पूर्वाग्रह या भेदभाव हो तो एआई भी वही गलतियां दोहरा सकता है।

चिकित्सक संघों ने भी चिंता व्यक्त की है कि यदि एआई सिस्टम किसी डॉक्टर के सही निर्णय को गलत मानकर झूठे आरोप लगाता है, तो इससे मेडिकल प्रोफेशनल्स की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है। वे मांग कर रहे हैं कि एआई के द्वारा पहचाने गए किसी भी संदिग्ध मामले की समीक्षा एक योग्य इंसान द्वारा अवश्य की जाए।

डेटा सुरक्षा और गोपनीयता की चिंताएं

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि लाखों मरीजों की संवेदनशील स्वास्थ्य जानकारी को एआई सिस्टम में फीड करना होगा। इससे डेटा चोरी या हैकिंग का खतरा बढ़ सकता है। गोपनीयता कार्यकर्ता इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि मरीजों की व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग हो सकता है।

प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि सभी डेटा को उचित सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ संभाला जाएगा और संघीय गोपनीयता कानूनों का पालन किया जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है।

ट्रंप प्रशासन की यह पहल निस्संदेह स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत कर रही है, लेकिन इसकी सफलता इस पर निर्भर करेगी कि कैसे इसे सावधानीपूर्वक और जिम्मेदारी से लागू किया जाता है। सरकार को चाहिए कि वह लगातार इस प्रणाली की निगरानी करे, इसके द्वारा किए गए फैसलों की समीक्षा करे, और यदि आवश्यक हो तो सुधार करे। आने वाले महीनों में इस पहल के परिणाम देखने होंगे कि क्या यह सचमुच स्वास्थ्य धोखाधड़ी को कम करने में मददगार साबित होता है।