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Thursday, 28 May 2026
टेक

किंग चार्ल्स की मौत की खबर रेडियो पर गलती से प्रसारित

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Komal
संवाददाता
📅 22 May 2026, 7:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
किंग चार्ल्स की मौत की खबर रेडियो पर गलती से प्रसारित
📷 aarpaarkhabar.com

ब्रिटेन के एक प्रमुख रेडियो स्टेशन ने एक बेहद शर्मनाक घटना को अंजाम दिया है जिसमें वह गलती से किंग चार्ल्स III की मौत की खबर प्रसारित कर गया। यह घटना इंटरनेट पर वायरल हो गई और सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा का विषय बन गई। रेडियो स्टेशन ने बाद में इस घटना के लिए माफी मांगी और स्पष्ट किया कि यह एक तकनीकी खराबी की वजह से हुआ था।

यह घटना तब घटी जब रेडियो स्टेशन की ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम में एक अप्रत्याशित समस्या आ गई। स्टेशन के अधिकारियों के अनुसार, डेथ ऑफ मॉनार्क सिस्टम जो कि एक आपातकालीन प्रोटोकॉल है, गलती से सक्रिय हो गया। यह सिस्टम विशेष परिस्थितियों में राजघराने के सदस्यों की मौत की खबर को तुरंत प्रसारित करने के लिए तैयार रहता है।

जब यह खबर प्रसारित हुई तो सोशल मीडिया पर तुरंत हड़कंप मच गया। लोगों ने इस खबर को शेयर करना शुरू कर दिया और कई अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों तक यह सूचना पहुंच गई। हालांकि, कुछ ही मिनटों में स्टेशन ने इस खबर को झूठ करार दिया और साफ किया कि किंग चार्ल्स III बिल्कुल ठीक हैं।

तकनीकी खराबी कैसे हुई?

रेडियो स्टेशन के तकनीकी दल ने जांच करने के बाद पाया कि एक सॉफ्टवेयर में एक बग था जिसकी वजह से डेथ ऑफ मॉनार्क सिस्टम को सक्रिय करने वाली कमांड गलती से दी गई। यह सिस्टम आमतौर पर केवल राजघराने के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ही सक्रिय होना चाहिए था। लेकिन तकनीकी विफलता की वजह से यह अपने आप ही कार्य करने लगा।

ब्रिटेन में रॉयल प्रोटोकॉल के अनुसार, राजशाही के किसी महत्वपूर्ण सदस्य की मौत की खबर को सबसे पहले पार्लियामेंट को सूचित किया जाता है। उसके बाद इसे जनता को सूचित किया जाता है। इसलिए, रेडियो स्टेशनों के पास एक पूर्व निर्धारित प्रणाली होती है ताकि ऐसी खबरों को सही तरीके से और सही समय पर प्रसारित किया जा सके।

रेडियो स्टेशन ने अपने बयान में कहा कि उसके तकनीकी दल ने सिस्टम को तुरंत बंद कर दिया था और इस घटना की जांच की जा रही है। स्टेशन के प्रबंधन ने किंग चार्ल्स III और ब्रिटिश जनता से माफी मांगी है और आश्वस्त किया है कि ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।

सोशल मीडिया पर हड़कंप

यह घटना जितनी तेजी से घटी, उससे भी तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गई। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हजारों लोगों ने इस खबर को शेयर किया। कुछ लोगों ने इसे एक गंभीर समस्या माना जबकि कुछ लोगों ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में लिया।

ब्रिटिश मीडिया ने इस घटना को व्यापक कवरेज दिया। कई समाचार चैनलों ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्टिंग की कि कैसे एक तकनीकी खराबी से इतनी बड़ी घटना हो सकती है। कुछ आलोचकों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसी महत्वपूर्ण प्रणाली अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय नहीं होनी चाहिए।

प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

इस घटना के बाद सवाल उठने लगे कि क्या ब्रिटिश रेडियो स्टेशनों की प्रणाली पर्याप्त सुरक्षित है। रेडियो नियामक संगठन ने भी इस मामले में एक जांच शुरू की है। स्पष्ट है कि ऐसी महत्वपूर्ण प्रणाली में बेहतर सुरक्षा उपाय और जांच के तरीके होने चाहिए।

ब्रिटेन में रॉयल फैमिली से जुड़ी सभी जानकारी को बेहद संवेदनशीलता के साथ संभाला जाता है। इसलिए, ऐसी प्रणालियों को अतिरिक्त सुरक्षा और सत्यापन के साथ तैयार किया जाना चाहिए। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि डेथ ऑफ मॉनार्क सिस्टम को कई स्तरों पर अनुमोदन प्राप्त करना चाहिए इससे पहले कि कोई भी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रसारित की जाए।

यह घटना यह भी दिखाती है कि डिजिटल युग में कितनी तेजी से गलत सूचना फैल सकती है। एक छोटी सी तकनीकी खराबी से पूरे देश में अफरा-तफरी मच सकती है। इसलिए, मीडिया संस्थानों को अपनी प्रणालियों को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना चाहिए।

कुल मिलाकर, यह घटना एक चेतावनी है कि तकनीकी प्रणालियां कितनी महत्वपूर्ण हैं और उन्हें कितनी सावधानी से संभाला जाना चाहिए। रेडियो स्टेशन के अधिकारियों को न केवल माफी मांगनी चाहिए बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।