भीषण गर्मी में बर्फ देखने सैलानियों की भीड़
भीषण गर्मी से बचने के लिए हजारों सैलानी पहाड़ों की ओर दौड़ पड़े हैं। इस बार हिमाचल प्रदेश के रोहतांग पास और शिंकुला में देखने लायक भीड़ जुटी है। वीकेंड के दिनों में तो यहां का दृश्य ही कुछ और हो गया है। सैलानियों की अंतहीन कतार से सड़कें पूरी तरह जाम हो गई हैं। गर्मी के मौसम में बर्फ का नजारा देखने की चाहत रखने वाले लोगों का यह बड़ा समूह अब पहाड़ों की ओर रुख कर गया है।
इस वीकेंड पर जो दृश्य देखने को मिला, वह सचमुच ही दिल कांप जाने वाला था। सड़कों पर गाड़ियों की एक लंबी कतार थी जो कई किलोमीटर तक फैली हुई थी। छोटी से लेकर बड़ी सभी तरह की गाड़ियां इस भीड़ में शामिल थीं। बसें, कारें, स्कूटर और बाइकें सब कुछ एक दूसरे के पीछे लगी हुई थीं। ड्राइवर और यात्री दोनों ही गर्मी और ट्रैफिक की मार झेल रहे थे। कुछ यात्रियों को तो इस यात्रा में आठ से दस घंटे तक का समय लग गया, जबकि आमतौर पर यह दूरी दो घंटे में तय हो जाती है।
ग्रीष्मकाल में बर्फ की खोज का बढ़ता चलन
ग्रीष्मकाल के दौरान जब पूरे देश में तापमान तेजी से बढ़ता है, तब हिमालय की ठंडी वादियों की ओर पर्यटकों का रुझान बढ़ता है। रोहतांग पास और शिंकुला दर्रा हिमाचल प्रदेश में सबसे लोकप्रिय स्थान बन गए हैं। ये जगहें समुद्र तल से लगभग तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित हैं। गर्मी के मौसम में भी यहां तापमान काफी कम रहता है और बर्फ भी देखने को मिलती है। शहर की गर्मी से परेशान परिवार यहां आकर राहत पाना चाहते हैं।
इस साल गर्मी की तीव्रता देश के अलग-अलग हिस्सों में असामान्य रही है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में तापमान पचास डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच गया है। इसी कारण हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई है। हर कोई बर्फीले पहाड़ों पर जाना चाहता है, हर कोई ठंडी हवाओं को महसूस करना चाहता है। लेकिन इसी वजह से सड़कों पर भीड़ भी बहुत बढ़ गई है।
प्रशासन की चिंता और सुरक्षा के मुद्दे
हिमाचल प्रदेश का प्रशासन इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए काफी चिंतित है। पहाड़ी सड़कें संकरी हैं और ये इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए डिजाइन नहीं की गई थीं। ट्रैफिक जाम के कारण लोगों को घंटों रास्ते में खराब समय बिताना पड़ता है। गर्मी में यह परिस्थिति और भी कठिन हो जाती है। कई यात्रियों को पानी की कमी का भी सामना करना पड़ा। बुजुर्ग और छोटे बच्चों के लिए यह यात्रा काफी कठिन साबित हुई।
सड़क सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। जब इतनी ज्यादा गाड़ियां एक साथ सड़क पर होती हैं, तो दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। पहाड़ी इलाकों में तो यह खतरा और भी ज्यादा होता है क्योंकि सड़कें टेढ़ी-मेढ़ी होती हैं। प्रशासन को इस बात की चिंता भी रहती है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए।
आने वाले दिनों के लिए सुझाव और समाधान
इस समस्या का समाधान करने के लिए कई सुझाव दिए जा रहे हैं। सबसे पहले तो सैलानियों को विकल्प दिए जाने चाहिए। अन्य पहाड़ी इलाकों को भी विकसित किया जा सकता है ताकि भीड़ फैल सके। दूसरा, सड़कों को चौड़ा करने की जरूरत है। तीसरा, परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि निजी वाहनों की संख्या कम हो सके। चौथा, पर्यटकों को सप्ताहांत के बजाय हफ्ते के दूसरे दिनों पर आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
रोहतांग पास और शिंकुला की यह भीड़ एक ओर तो पर्यटन के विकास को दर्शाती है, लेकिन दूसरी ओर यह प्रशासनिक चुनौतियां भी पेश करती है। हिमाचल प्रदेश को इस अवसर का सदुपयोग करना चाहिए और भविष्य के लिए बेहतर योजना बनानी चाहिए। आने वाले समय में ऐसी भीड़ और भी बढ़ेगी, इसलिए पहले से ही तैयारी जरूरी है।




