पेट्रोल-डीजल दाम 10 दिन में चौथी बार बढ़े
देशभर में ईंधन की कीमतें आम जनता के लिए बड़ी समस्या बन गई हैं। पिछले दस दिनों में यह चौथी बार है जब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। इस लगातार बढ़ोतरी से आम आदमी का बजट बिगड़ता जा रहा है और परिवहन के खर्च में भारी वृद्धि हुई है। सरकार और तेल कंपनियों की यह नीति लोगों को परेशान कर रही है।
इस बार दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है। ये कीमतें पिछले महीने की तुलना में काफी अधिक हैं। कार मालिकों, ऑटो चालकों और ट्रक ड्राइवरों के लिए यह खबर निराशाजनक है क्योंकि इससे उनका परिचालन खर्च बढ़ेगा।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें
देश के विभिन्न शहरों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग हैं। कोलकाता में पेट्रोल 104.67 रुपये और डीजल 97.45 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 106.31 रुपये और डीजल 98.76 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में भी ईंधन महंगा हुआ है जहां पेट्रोल 103.28 रुपये और डीजल 96.89 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।
बेंगलुरु में पेट्रोल 104.84 रुपये और डीजल 97.23 रुपये प्रति लीटर है। हैदराबाद में भी ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं। पंजाब के प्रमुख शहरों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि देखी गई है। यह स्पष्ट है कि महानगरों में ईंधन की कीमतें सबसे अधिक हैं।
राजस्थान जैसे राज्यों में भी ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं। जयपुर में पेट्रोल 103.90 रुपये और डीजल 96.45 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पेट्रोल 101.89 रुपये और डीजल 94.56 रुपये प्रति लीटर है। यह बढ़ोतरी सभी राज्यों में समान नहीं है क्योंकि स्थानीय करों में अंतर है।
लगातार बढ़ोतरी के कारण और प्रभाव
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि एक मुख्य कारण है। विश्व बाजार में तेल की मांग बढ़ने से कीमतें ऊपर जा रही हैं। साथ ही रुपये की कमजोरी भी ईंधन को महंगा बना रही है क्योंकि भारत को तेल आयात के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।
यह लगातार बढ़ोतरी आम जनता पर सीधा असर डाल रही है। ऑटो और ट्रक चालकों को किराया बढ़ाना पड़ रहा है जिससे यात्रियों को भी नुकसान हो रहा है। सार्वजनिक परिवहन के किराये भी बढ़ने के कगार पर हैं। छोटे व्यापारियों और डिलीवरी सेवाओं को भी इसका असर दिख रहा है।
घर पर डिजल जनरेटर चलाने वाले लोगों के बिजली के खर्च में भी इजाफा हुआ है। किसानों को भी ईंधन के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है जिससे कृषि की लागत बढ़ रही है। यह महंगाई का दुष्प्रभाव खाद्य पदार्थों की कीमत पर भी दिखेगा।
भविष्य के लिए उपभोक्ताओं की चिंता
इस गति से अगर पेट्रोल-डीजल महंगे होते रहे तो आने वाले महीनों में कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर सभी क्षेत्रों को भारी नुकसान हो सकता है। सड़क परिवहन, रेलवे, विमानन सभी पर इसका असर पड़ेगा।
सरकार को इस मामले में कदम उठाने चाहिए। ईंधन पर सब्सिडी या कर में कमी से आराम मिल सकता है। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना होगा ताकि भविष्य में तेल पर निर्भरता कम हो सके।
इस समय सरकार को उपभोक्ताओं की पीड़ा समझनी चाहिए और तदनुसार नीति बनानी चाहिए। पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब सामान्य आदमी की क्रय क्षमता से बाहर जा रही हैं। महंगाई नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय सरकार को तत्काल कदम उठाने होंगे।
वर्तमान परिस्थिति में उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे ईंधन की बचत पर ध्यान दें। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। साथ ही, वाहनों का नियमित रखरखाव करें ताकि ईंधन की खपत कम हो। आने वाले समय में हरित ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख करना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।




