🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Sunday, 05 July 2026
राजनीति

राम रहीम को 16वीं बार मिली पैरोल, पुलिस काफिले के साथ जेल से निकला

author
Komal
संवाददाता
📅 26 May 2026, 7:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 922 views
राम रहीम को 16वीं बार मिली पैरोल, पुलिस काफिले के साथ जेल से निकला
📷 aarpaarkhabar.com

हरियाणा सरकार ने एक बार फिर से विवादास्पद धार्मिक नेता गुरमीत राम रहीम सिंह को पैरोल प्रदान किया है। इस बार उन्हें तीस दिनों की पैरोल मंजूर की गई है। रोहतक की सुनारिया जेल से राम रहीम को रिहा किया गया है। यह उनकी सोलहवीं बार पैरोल है, जो सुरक्षा के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील मामला बना हुआ है। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय तक भेजा गया है।

राम रहीम के बार-बार पैरोल मिलने से लेकर उनकी रिहाई तक का सफर काफी विवादास्पद रहा है। हर बार उनकी पैरोल को लेकर सामाजिक माध्यमों पर तीखी बहस होती है। कुछ लोग मानते हैं कि उन्हें बार-बार पैरोल देना न्याय व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है, तो वहीं दूसरे पक्ष का तर्क है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है।

पैरोल का इतिहास और विवाद

गुरमीत राम रहीम को पहली बार पैरोल देने की शुरुआत कई साल पहले हुई थी। तब से लेकर अब तक उन्हें सोलह बार पैरोल दिया जा चुका है। प्रत्येक बार पैरोल अवधि अलग-अलग रही है। कभी पনीस दिन तो कभी तीस दिन की पैरोल दी गई है। राम रहीम की पैरोल के खिलाफ विभिन्न महिला संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता आवाजें उठाते रहे हैं।

इसके पीछे का कारण यह है कि राम रहीम पर कई गंभीर आरोप हैं। उन पर अनैतिक संबंधों, यौन शोषण और हिंसा के मामले दर्ज हैं। पिछले दशक में कई महिलाएं उनके खिलाफ आवाज उठा चुकी हैं। लेकिन इन सभी विवादों के बावजूद भी हरियाणा सरकार द्वारा उन्हें नियमित रूप से पैरोल दिया जाता रहा है। इसी बात को लेकर मानवाधिकार संगठन और महिला संगठन अक्सर सवाल उठाते हैं।

राम रहीम को पहली बार जेल की सजा 2017 में मिली थी। तब से लेकर अब तक उनकी कानूनी लड़ाई जारी रही है। वकीलों का तर्क है कि कानूनी प्रक्रिया में पैरोल देना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें कोई अनुचित नहीं है। लेकिन समाज के बड़े हिस्से को लगता है कि उन्हें इतनी बार पैरोल देना न्याय व्यवस्था में विश्वास कम करता है।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस तैयारी

इस बार जब राम रहीम को पैरोल दिया गया, तो हरियाणा पुलिस ने अत्यंत कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। सुनारिया जेल से उनकी निकासी के समय पूरे इलाके में पुलिस की मजबूत मौजूदगी रही। भारी पुलिस काफिले के साथ उन्हें डेरा सच्चा सौदा के मुख्यालय तक भेजा गया।

पुलिस प्रशासन को इस बात की चिंता थी कि राम रहीम की रिहाई को लेकर जनता में विरोध हो सकता है। विभिन्न महिला संगठन और नागरिक समाज के लोगों ने पहले भी उनकी पैरोल के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। इसलिए पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के साथ कोई जोखिम लेने से बचना पसंद किया।

रोहतक शहर में उनकी निकासी का समय पहले से ही निर्धारित किया गया होगा ताकि आम जनता को परेशानी न हो और किसी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न आए। पुलिस की टीम ने संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनाई होगी।

कानूनी और सामाजिक पहलू

राम रहीम के मामले में कानूनी और सामाजिक दोनों ही पहलू महत्वपूर्ण हैं। कानूनी दृष्टिकोण से देखें तो भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता में सजा काट रहे कैदियों को पैरोल देने का प्रावधान है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अच्छे आचरण वाले कैदियों को सुधारने का मौका मिल सके।

लेकिन सामाजिक दृष्टिकोण से यह मामला काफी संवेदनशील है। राम रहीम के मामले में यौन शोषण के आरोप हैं और महिलाएं उन्हें एक खतरनाक व्यक्तित्व मानती हैं। महिला संगठनों का मानना है कि उन्हें बार-बार पैरोल देना यौन शोषण के पीड़ितों के साथ न्याय नहीं है।

हरियाणा सरकार का तर्क है कि वह केवल कानूनी प्रक्रिया का पालन कर रही है। जेल प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर अगर किसी कैदी को पैरोल देने की सुपारिश की जाती है, तो सरकार उसे मंजूर कर देती है। लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या केवल कानूनी प्रक्रिया का पालन ही काफी है, या सामाजिक न्याय की भी परवाह करनी चाहिए।

राम रहीम के सोलहवीं बार पैरोल दिए जाने से साफ है कि न्याय व्यवस्था में इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। आने वाले समय में भी उन्हें पैरोल मिलने की संभावना है। लेकिन यह भी सच है कि इस मामले में भारतीय न्याय प्रणाली और सामाजिक मूल्यों के बीच एक अंतराल दिखता है। समाज को लगता है कि कानून एक तरफ है और न्याय दूसरी तरफ।

आगे आने वाले समय में देखना होगा कि इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और राम रहीम को कितनी और पैरोल दी जाती हैं।