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Wednesday, 19 August 2026
समाचार

अनीता आडवाणी का दर्द: 14 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ

author
Komal
संवाददाता
📅 01 April 2026, 10:15 PM ⏱ 1 मिनट 👁 289 views

न्याय की राह में 14 साल: अनीता आडवाणी का टूटा सपना

14 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद भी अनीता आडवाणी को वह इंसाफ नहीं मिल सका, जिसकी उम्मीद में वह अदालत के चक्कर लगाती रहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ अपने रिश्ते को कानूनी विवाह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी।

अमर उजाला के साथ हुई विशेष बातचीत में अनीता आडवाणी का दर्द साफ दिखाई दे रहा था। उन्होंने कहा, '14 साल घसीटा... सुनवाई तक नहीं की, अब कह रहे मेरा वजूद नहीं।' इन शब्दों में छुपा गुस्सा और निराशा किसी से छुप नहीं रही थी।

अनीता आडवाणी का दर्द: 14 साल बाद भी नहीं मिला इंसाफ

हाईकोर्ट का फैसला और अनीता की प्रतिक्रिया

बॉम्बे हाईकोर्ट के इस फैसले ने अनीता आडवाणी के सपनों पर पानी फेर दिया है। वह अभिनेत्री जो कभी राजेश खन्ना जैसे महान कलाकार के साथ अपना भविष्य देखती थीं, आज न्यायपालिका से निराश हैं। उनका कहना है कि अदालत ने उनकी बात सुनने तक की जहमत नहीं उठाई।

अनीता ने इंटरव्यू के दौरान बताया कि यह सिर्फ पैसे या प्रॉपर्टी का मामला नहीं है, बल्कि उनकी पहचान और सम्मान का सवाल है। "मैं 14 साल से इस उम्मीद में हूं कि न्याय मिलेगा, लेकिन आज लगता है कि व्यवस्था ही गलत है," उन्होंने दुख भरे लहजे में कहा।

राजेश खन्ना के साथ रिश्ते का दावा

अनीता आडवाणी का दावा है कि उनका राजेश खन्ना के साथ live-in relationship था, जो कानूनी तौर पर विवाह के बराबर था। उन्होंने अदालत में कई सबूत पेश किए थे, जिसमें उनके साथ बिताए गए वक्त की तस्वीरें और दस्तावेज शामिल थे।

राजेश खन्ना की 2012 में मृत्यु के बाद से ही यह मामला चर्चा में रहा है। अनीता का कहना है कि वह राजेश खन्ना के अंतिम दिनों में उनकी देखभाल करती रहीं, लेकिन आज उनके अस्तित्व को ही नकारा जा रहा है।

कानूनी लड़ाई का सफर

यह मामला 2012 से अदालतों में चल रहा था। अनीता ने राजेश खन्ना की प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी की मांग करते हुए यह केस दायर किया था। उनका कहना था कि वह राजेश खन्ना की दूसरी पत्नी हैं और उन्हें कानूनी अधिकार मिलने चाहिए।

| केस की जानकारी | विवरण |

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मामला दायर2012 (राजेश खन्ना की मृत्यु के बाद)
अदालतबॉम्बे हाईकोर्ट
मांगविवाह की कानूनी मान्यता
अवधि14 साल
नतीजायाचिका खारिज

भविष्य की योजनाएं

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सवाल यह है कि अनीता आडवाणी आगे क्या करेंगी। उन्होंने संकेत दिया है कि वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने पर विचार कर रही हैं। "अगर यहां इंसाफ नहीं मिला तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगी," उन्होंने कहा।

अनीता का कहना है कि यह सिर्फ उनका मामला नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं का मामला है जो live-in relationship में रहती हैं और बाद में उनके अधिकारों को नकारा जाता है। "मैं हार नहीं मानूंगी, क्योंकि यह सच्चाई की लड़ाई है," उन्होंने दृढ़ता से कहा।

अनीता आडवाणी की यह कहानी दिखाती है कि कभी-कभी न्याय पाने का रास्ता कितना लंबा और कठिन हो सकता है। 14 साल की लंबी लड़ाई के बाद भी जब इंसाफ नहीं मिलता, तो व्यक्ति की निराशा समझी जा सकती है।