कानपुर अस्पतालों में किडनी का काला कारोबार, 60 ऑपरेशन
कानपुर में खुला किडनी का काला बाजार: 60 अवैध ऑपरेशन का सनसनीखेज खुलासा
30 मार्च की शाम लगभग 7 बजे जब कानपुर के कल्याणपुर इलाके में पुलिस की छापेमारी हुई, तो एक ऐसे अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। आजतक की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि यहां के अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट का एक संगठित काला कारोबार चल रहा था, जिसमें गरीबों को फंसाकर उनके अंगों की बिक्री की जा रही थी।
दो दिनों की गहन पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली है। सिर्फ एक अस्पताल में ही 60 किडनी ट्रांसप्लांट के मामले सामने आए हैं, जिससे इस काले धंधे का पैमाना समझा जा सकता है।

कैसे काम करता था यह सीक्रेट नेटवर्क
जांच से पता चला है कि यह पूरा खेल बेहद सुव्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा था। इस नेटवर्क में कई स्तरों पर लोग काम कर रहे थे:
- डोनर की तलाश: गरीब इलाकों में दलाल भेजे जाते थे जो आर्थिक तंगी में फंसे लोगों को बड़ी रकम का लालच देकर फंसाते थे
- फर्जी रिश्तेदारी: कानूनी दिक्कतों से बचने के लिए डोनर और रिसीवर के बीच फर्जी रिश्तेदारी के कागजात तैयार किए जाते थे
- अस्पताली मिलीभगत: निजी अस्पतालों में संचालन की व्यवस्था की जाती थी जहां सवाल नहीं पूछे जाते थे
गरीबों का शोषण और लालच का जाल
इस काले कारोबार में सबसे दुखद पहलू यह है कि गरीब और मजबूर लोगों का शोषण किया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि:
- डोनर्स को 2-5 लाख रुपए तक का लालच दिया जाता था
- उन्हें बताया जाता था कि किडनी दान करने से कोई नुकसान नहीं होगा
- ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल नहीं की जाती थी
- कई मामलों में वादा किया गया पूरा पैसा भी नहीं मिलता था
दूसरी ओर, मरीज़ों से 15-25 लाख रुपए तक वसूले जा रहे थे। इस तरह बीच का मोटा मार्जिन अस्पताल और दलालों की जेब में जा रहा था।
कानूनी उल्लंघन और नियमों की अनदेखी
भारत में अंग प्रत्यारोपण को लेकर सख्त कानून हैं। ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एक्ट 1994 के तहत:
| नियम | आवश्यकता |
| ------- | ---------- | |
|---|---|---|
| डोनर की योग्यता | निकट रिश्तेदार या भावनात्मक रिश्ता | |
| अनुमति समिति | राज्य प्राधिकरण से मंजूरी | |
| मेडिकल बोर्ड | स्वतंत्र डॉक्टरों की जांच | |
| दस्तावेज़ीकरण | पूर्ण कानूनी प्रक्रिया |
लेकिन इस नेटवर्क में इन सभी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। फर्जी दस्तावेज़ बनाकर और रिश्वत देकर अनुमतियां हासिल की जा रही थीं।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की राह
कानपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई से इस नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और संबंधित अस्पतालों की जांच जारी है। स्वास्थ्य विभाग ने भी कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
यह मामला न सिर्फ कानपुर बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। यह दिखाता है कि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था में कितनी खामियां हैं और कैसे कुछ लालची तत्व गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।
इस घटना से यह सबक मिलता है कि अंग प्रत्यारोपण की निगरानी और भी सख्त करनी होगी। साथ ही गरीब तबके को जागरूक करना होगा ताकि वे ऐसे लालच के जाल में न फंसें। केवल सख्त कानून और उनके पूर्ण पालन से ही इस तरह के काले कारोबार को रोका जा सकता है।




