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Saturday, 06 June 2026
मनोरंजन

श्वेता त्रिपाठी एक्सक्लूसिव: थिएटर डिटॉक्स

author
Komal
संवाददाता
📅 01 June 2026, 7:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 916 views
श्वेता त्रिपाठी एक्सक्लूसिव: थिएटर डिटॉक्स
📷 aarpaarkhabar.com

मिर्जापुर की गली से लेकर बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म तक की सफलता की यात्रा तय कर चुकी अदाकारा श्वेता त्रिपाठी इन दिनों एक बार फिर से थिएटर की दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। वह अपने नए नाटक 'एक्सटर्नल अफेयर्स' में नजर आने वाली हैं, जिसे लेकर वह काफी उत्साहित हैं। हालांकि फिल्मों और वेब सीरीज में उनकी व्यस्तता कम नहीं है, लेकिन थिएटर के लिए उनके प्रेम में कोई कमी नहीं आई है। आर्पार खबर के साथ एक विशेष साक्षात्कार में श्वेता त्रिपाठी ने अपने करियर, थिएटर की महत्ता और वर्तमान समय में नाटकों की प्रासंगिकता पर विस्तार से बातचीत की।

थिएटर को लेकर गहरा लगाव

श्वेता त्रिपाठी ने अपने साक्षात्कार की शुरुआत में ही थिएटर के प्रति अपने लगाव को प्रकट किया। वह कहती हैं कि थिएटर उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है और वह इसे कभी भूल नहीं सकतीं। उनके शब्दों में, "थिएटर डिटॉक्स जैसा लगता है।" इस कथन का अर्थ यह है कि जब वह नाटकों के मंच पर उतरती हैं तो उन्हें एक विशेष तरह की शुद्धता और मानसिक शांति मिलती है। फिल्में और वेब सीरीज के कैमरे के सामने अभिनय करते समय चाहे कितना भी तनाव हो, लेकिन जैसे ही वह थिएटर के मंच पर जाती हैं, सारा दबाव हल्का हो जाता है।

श्वेता ने आगे कहा कि थिएटर में एक लाइव दर्शक होता है, जो दूसरे माध्यमों में नहीं मिलता। लाइव परफॉर्मेंस में कलाकार और दर्शक के बीच एक सीधा संबंध बनता है, जो फिल्मों में संभव नहीं है। इसीलिए थिएटर का अनुभव बिल्कुल अलग होता है। जब दर्शकों की हंसी, तालियां और प्रतिक्रियाएं सीधे मंच पर सुनाई देती हैं, तो अभिनेता के अंदर एक अलग ऊर्जा आ जाती है। यह ऊर्जा किसी और माध्यम से नहीं मिल सकती।

नई परियोजना 'एक्सटर्नल अफेयर्स'

श्वेता त्रिपाठी इन दिनों अपने नए नाटक 'एक्सटर्नल अफेयर्स' के लिए काफी व्यस्त हैं। इस नाटक के बारे में बात करते हुए वह कहती हैं कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर आधारित है। नाटक की कहानी आधुनिक समय के रिश्तों और उनकी पेचीदगियों को दर्शाती है। समाज में बदलाव आ रहा है और लोगों की सोच भी बदल रही है। इन्हीं सब बातों को इस नाटक में दिखाया गया है।

इस नाटक में उन्हें एक ऐसी भूमिका निभानी है जो चुनौतीपूर्ण है और साथ ही दर्शकों को सोचने के लिए बाध्य करती है। श्वेता कहती हैं कि जब भी वह कोई नई भूमिका चुनती हैं, तो वह यह देखती हैं कि क्या यह भूमिका कुछ अलग है, क्या इसमें कुछ नया सीखने का अवसर है। 'एक्सटर्नल अफेयर्स' में उन्हें ये सभी चीजें मिली हैं। नाटक का निर्देशन एक प्रसिद्ध निर्देशक द्वारा किया जा रहा है, जो इसे और भी खास बना देता है।

वह आगे बताती हैं कि नाटक की तैयारी में उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी है। चरित्र को समझने के लिए उन्होंने कई किताबें पढ़ी हैं और विभिन्न लोगों से बातचीत की है। इस नाटक के जरिए वह दर्शकों को एक संदेश देना चाहती हैं कि आधुनिक समय में रिश्तों को कितनी सावधानी से संभालना होता है।

बदलते दौर में थिएटर की अहमियत

श्वेता त्रिपाठी एक महत्वपूर्ण बात कहती हैं कि आज का समय तेजी से बदल रहा है। लोग स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर फिल्मे देखना ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन इसके बावजूद थिएटर की अहमियत में कोई कमी नहीं आई है। वास्तव में, थिएटर आज और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है।

आज की युवा पीढ़ी को फिर से थिएटर की ओर लाने की जरूरत है। थिएटर न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह एक सामाजिक माध्यम भी है। नाटकों के जरिए महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिए जा सकते हैं। श्वेता कहती हैं कि उन्हें लगता है कि थिएटर को और भी लोकप्रिय बनाने के लिए नई पीढ़ी को इसमें आना चाहिए।

नई तकनीकों का भी थिएटर में प्रयोग हो रहा है। प्रकाश, ध्वनि और दृश्य सज्जा में नई तकनीकों का इस्तेमाल दर्शकों को और भी बेहतर अनुभव दे रहा है। लेकिन इन सभी चीजों के बावजूद, थिएटर का मूल आकर्षण वही है - अभिनेता और दर्शक के बीच का जीवंत संबंध। यह संबंध हर बार अलग होता है, हर बार नया होता है। इसीलिए थिएटर कभी बूढ़ा नहीं होता।

अपने साक्षात्कार के अंत में श्वेता त्रिपाठी एक बार फिर से थिएटर के प्रति अपने समर्पण को व्यक्त करती हैं। वह कहती हैं कि भले ही फिल्में और ओटीटी प्लेटफॉर्म उन्हें बड़ी सफलता दे गई हों, लेकिन थिएटर उनकी जड़ें हैं। जड़ों से जुड़े रहना बेहद जरूरी है। थिएटर उन्हें एक अभिनेत्री के रूप में बेहतर बनाता है और उन्हें अपने कला को और भी निखारने का अवसर देता है। इसलिए वह हमेशा थिएटर में लौटती हैं।