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Monday, 14 September 2026
धर्म

बेड़ी हनुमान मंदिर की रहस्यमयी कहानी – पुरी

author
Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 12:20 AM ⏱ 1 मिनट 👁 581 views
बेड़ी हनुमान मंदिर की रहस्यमयी कहानी – पुरी
📷 Aaj Tak

बेड़ी हनुमान मंदिर: जहां आज भी स्वर्ण बेड़ियों में कैद हैं बजरंगबली

2 अप्रैल को देशभर में हनुमान जयंती का पावन त्योहार मनाया जाएगा। इस अवसर पर हनुमान जी के मंदिरों में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ेगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर के पास ही एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां बजरंगबली आज भी स्वर्ण बेड़ियों में बंधे हुए हैं? जी हां, यह है बेड़ी हनुमान मंदिर, जिसकी कहानी उतनी ही रहस्यमयी है जितनी दिलचस्प।

पुरी धाम के इस प्रसिद्ध मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति को सोने की जंजीरों से बांधा गया है। यह दृश्य देखने में जितना अजीब लगता है, इसके पीछे की कहानी उतनी ही रोचक है। स्थानीय लोग इसे लेकर कई किंवदंतियां सुनाते हैं, जो आज भी लोगों के मन में जिज्ञासा जगाती हैं।

बेड़ी हनुमान मंदिर की रहस्यमयी कहानी - पुरी

पुरी में क्यों है यह अनोखा मंदिर

ओडिशा का पुरी शहर चार धामों में से एक माना जाता है और यहां भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण यहां अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। इसी पवित्र स्थल के निकट स्थित है बेड़ी हनुमान मंदिर, जो अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।

यह मंदिर जगन्नाथ मंदिर से मात्र कुछ मीटर की दूरी पर स्थित है। हजारों वर्षों से यहां हनुमान जी की मूर्ति को सोने की बेड़ियों से बांधा जाता रहा है। यह परंपरा आज भी उसी रूप में जारी है और भक्तगण इसे बड़ी श्रद्धा से देखने आते हैं।

क्यों बांधे गए हैं हनुमान जी को बेड़ियों में

बेड़ी हनुमान मंदिर की इस अनोखी परंपरा के पीछे एक रोचक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार हनुमान जी अपनी अपार शक्ति के कारण इतने उत्साह में आ गए कि वे जगन्नाथ मंदिर में जाकर अपने आराध्य श्रीराम के रूप में भगवान जगन्नाथ से मिलने का प्रयास करने लगे।

पुराणों के अनुसार, हनुमान जी की इस तीव्र भक्ति और उत्साह को देखकर भगवान जगन्नाथ ने उन्हें समझाया कि कलियुग में उनकी अपार शक्ति से कई समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए उन्होंने प्रेम से हनुमान जी को स्वर्ण बेड़ियों में बांधने का निर्णय लिया। यह बंधन प्रेम का था, दंड का नहीं।

मंदिर की विशेषताएं और परंपराएं

बेड़ी हनुमान मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति को देखने से पहले भक्तों को एक अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। यहां बजरंगबली के हाथों और पैरों में सोने की मोटी जंजीरें बंधी हुई हैं। ये बेड़ियां समय-समय पर बदली जाती रहती हैं और पुरानी बेड़ियों को प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है।

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की विशेष भीड़ होती है। हनुमान जयंती के दिन तो यहां का नजारा देखने लायक होता है।

आधुनिक समय में मंदिर का महत्व

आज के युग में भी यह मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं को बनाए हुए है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। विशेषकर हनुमान जयंती के अवसर पर यह स्थान भक्ति की गंगा में डूब जाता है।

मंदिर की व्यवस्था को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि यहां की परंपराएं केवल अंधविश्वास नहीं बल्कि गहरी आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि हनुमान जी की यह स्वीकृति उनकी भगवान जगन्नाथ के प्रति अनन्य भक्ति का प्रतीक है।

बेड़ी हनुमान मंदिर की यह अनूठी कहानी हमें यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति में समर्पण की भावना सबसे महत्वपूर्ण है। यहां बंधे हुए हनुमान जी वास्तव में प्रेम के बंधन में बंधे हैं, जो हर भक्त के लिए एक प्रेरणा है।