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Friday, 05 June 2026
मौसम

डोडा-किश्तवाड़ में बादल फटा, हाईवे बंद, सैलाब

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Komal
संवाददाता
📅 03 June 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
डोडा-किश्तवाड़ में बादल फटा, हाईवे बंद, सैलाब
📷 aarpaarkhabar.com

जम्मू-कश्मीर के डोडा और किश्तवाड़ जिलों में प्रकृति का प्रकोप देखने को मिला है। भारी बारिश के बाद बादल फटने की घटना से अचानक सैलाब आ गया और क्षेत्र में भारी तबाही हुई है। इस आपदा के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-244 पूरी तरह बंद हो गया है और सड़कों पर भूस्खलन की घटनाएं देखी जा रही हैं। कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं और लोगों का जीवन असामान्य हो गया है।

स्थानीय प्रशासन इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। जिला प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति असुरक्षित स्थानों पर न रहे। सभी लोगों को सुरक्षित इलाकों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

बादल फटने से जिलों में आई भारी तबाही

डोडा और किश्तवाड़ जिलों में बादल फटने की घटना से भारी नुकसान हुआ है। इस अचानक आई बाढ़ में कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और खेतों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसी घटना पिछले कई सालों में नहीं देखी गई। बारिश की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरे इलाके में पानी ही पानी हो गया।

भूस्खलन के कारण सड़कें टूट गई हैं और बहुत सारी जगहों पर मलबा गिरा है। छोटी-बड़ी सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। नगर निगम और ग्राम पंचायत के कर्मचारी तुरंत मलबा साफ करने के लिए निकल गए। लेकिन भारी मात्रा में गिरे मलबे को हटाने में काफी समय लगेगा।

इस आपदा में कई पशुधन भी मारे गए हैं। किसानों के मवेशी बाढ़ में बह गए। कृषि संबंधी नुकसान का आकलन अभी किया जाना बाकी है। प्रशासन जल्द ही क्षति मूल्यांकन दल को भेजेगा ताकि प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा दिया जा सके।

राष्ट्रीय राजमार्ग-244 पर यातायात प्रभावित

राष्ट्रीय राजमार्ग-244 बंद होने से क्षेत्र में यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ है। यह राजमार्ग डोडा और किश्तवाड़ को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण सड़क है। इसके बंद होने से सैकड़ों वाहन दोनों तरफ अटके हुए हैं। लोगों को अपनी यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार सड़क को बहाल करने के लिए बहुत सारे यंत्र लगाए गए हैं। खुदाई, मलबा हटाना और डामर बिछाना - सब कुछ तेजी से किया जा रहा है। फिर भी कम से कम दो से तीन दिन लग सकते हैं सड़क पूरी तरह सुरक्षित बनाने में।

प्रभावित क्षेत्र के लोगों को विकल्प के रूप में पहाड़ी सड़कों का इस्तेमाल करने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन वे भी सुरक्षित नहीं हैं। भारी बारिश के कारण कई पहाड़ी रास्ते भी अवरुद्ध हो गए हैं। पुलिस ने आवाजाही पर कुछ प्रतिबंध लगा दिए हैं ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

प्रशासन द्वारा राहत कार्य तेज किए जा रहे हैं

जिला प्रशासन ने इस आपदा से निपटने के लिए एक विशेष कार्यदल का गठन किया है। सेना के इंजीनियरों को भी सड़क मरम्मत में सहायता के लिए बुलाया गया है। जिला कलेक्टर खुद क्षेत्र का दौरा करके स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

राहत सामग्री के लिए सरकार ने जरूरी बजट आवंटित कर दिया है। प्रभावित परिवारों को भोजन, पीने का पानी, कपड़े और अन्य आवश्यक चीजें दी जा रही हैं। स्कूलों को आश्रय केंद्र के रूप में खोल दिया गया है जहां लोग रात को रह सकते हैं।

चिकित्सा सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सकों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं। यदि किसी को चोट लगी हो या बीमारी हो तो तुरंत इलाज मिल सके।

मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 48 घंटों में बारिश रुक जाएगी। इसके बाद राहत कार्य और भी तेजी से चलेगा। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घर पर ही रहें और सभी सुरक्षा सावधानियों का पालन करें। सरकार इस संकट से उबरने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।