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Saturday, 03 October 2026
शिक्षा

CBSE के नए चेयरमैन लोखंडे प्रशांत सीताराम

author
Komal
संवाददाता
📅 03 June 2026, 6:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
CBSE के नए चेयरमैन लोखंडे प्रशांत सीताराम
📷 aarpaarkhabar.com

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नेतृत्व में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार को केंद्र सरकार ने CBSE के पुराने चेयरमैन राहुल सिंह को हटाते हुए लोखंडे प्रशांत सीताराम को इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया है। यह निर्णय भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।

लोखंडे प्रशांत सीताराम की नियुक्ति से लेकर उनके पूर्व कार्यकाल तक, इस पूरी प्रक्रिया को समझना बेहद जरूरी है। CBSE भारत का सबसे प्रमुख शिक्षा बोर्ड है जो देश भर में लाखों छात्रों की शिक्षा के लिए जिम्मेदार है। इसलिए इस पद पर किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति एक बहुत ही संवेदनशील विषय है।

CBSE के नए चेयरमैन कौन हैं?

लोखंडे प्रशांत सीताराम एक अनुभवी शिक्षा प्रशासक हैं। उन्होंने अपने कैरियर में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और कार्य अनुभव उन्हें इस पद के लिए योग्य बनाता है। उनके नेतृत्व में CBSE को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

प्रशांत सीताराम ने अपने पूरे कैरियर में शिक्षा सुधार पर विशेष ध्यान दिया है। वे भारतीय शिक्षा प्रणाली की आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनके पास विद्यार्थियों की मानसिकता को समझने और उनके विकास के लिए सही रणनीति बनाने का कौशल है। यह गुण एक अच्छे शिक्षा प्रशासक के लिए अत्यंत आवश्यक होता है।

उनकी नियुक्ति से पहले कई अन्य नामों पर विचार किया गया था, लेकिन अंततः सरकार ने प्रशांत सीताराम को ही इस जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया। यह निर्णय उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर लिया गया है।

राहुल सिंह की अवधि और उनके योगदान

राहुल सिंह ने CBSE के चेयरमैन के रूप में काफी लंबे समय तक कार्य किया है। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कई सुधारात्मक कदम उठाए। हालांकि, हर प्रशासक की तरह उनके फैसलों पर विभिन्न विचार भी थे।

राहुल सिंह के समय में CBSE ने परीक्षा प्रणाली में कई बदलाव किए। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल की गई। महामारी के दौरान ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी उनके कार्यकाल में लिए गए। इस प्रकार उन्होंने CBSE को आधुनिक समय के साथ तालमेल बिठाने में मदद की।

उनके प्रशासनिक कार्य को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों से अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं मिली थीं। कुछ ने उनके कार्यों की प्रशंसा की तो कुछ ने आलोचना भी की। लेकिन यह कहा जा सकता है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में CBSE को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

भारतीय शिक्षा व्यवस्था का भविष्य

लोखंडे प्रशांत सीताराम के नेतृत्व में CBSE के लिए कई चुनौतियां और अवसर दोनों ही हैं। भारतीय शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती है। साथ ही छात्रों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना भी एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है।

नई शिक्षा नीति के तहत CBSE को अपनी परीक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम में आवश्यक बदलाव लाने होंगे। कौशल विकास और व्यावहारिक शिक्षा पर अधिक बल देना होगा। बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा देना भी एक महत्वपूर्ण कार्य है।

डिजिटल विभाजन को कम करते हुए सभी छात्रों को समान शिक्षा के अवसर देने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना एक बड़ी जिम्मेदारी है। प्रशांत सीताराम के नेतृत्व में CBSE से उम्मीद की जाती है कि वे इन सभी चुनौतियों का सामना करते हुए भारतीय शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

कुल मिलाकर, यह नियुक्ति भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम है। लोखंडे प्रशांत सीताराम का CBSE के चेयरमैन बनना देश की शिक्षा के भविष्य के लिए एक अच्छा संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में उनके कार्यकाल में CBSE किन-किन सुधारों को लागू करता है, यह देखना दिलचस्प होगा।