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Thursday, 04 June 2026
धर्म

तुंगनाथ मंदिर पंडित ने चंद्रशिला को बताया पितरों का स्थान

author
Komal
संवाददाता
📅 03 June 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 364 views
तुंगनाथ मंदिर पंडित ने चंद्रशिला को बताया पितरों का स्थान
📷 aarpaarkhabar.com

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में तुंगनाथ मंदिर के एक पुजारी लोगों से कह रहे हैं कि तुंगनाथ मंदिर के ऊपर स्थित चंद्रशिला घूमने की जगह नहीं है। चंद्रशिला पितरों का स्थान है। वहां पितरों का तर्पण होता है और पुजारी भी सिर्फ पूजा करने के उद्देश्य से वहां नंगे पांव जाते हैं। इस महत्वपूर्ण संदेश को लेकर पंडित जी ने सभी लोगों से आग्रह किया है कि वह इस पवित्र स्थान का सम्मान करें।

हाल ही में यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ है जहां तुंगनाथ मंदिर के पुजारी ने बहुत ही गंभीर बातें कहीं हैं। उन्होंने समझाया कि चंद्रशिला केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत पवित्र और धार्मिक स्थान है। यहां पर हमारे पूर्वज और पितर बसे होते हैं। इसलिए यह स्थान पूरी तरह से सम्मान और श्रद्धा के साथ देखा जाना चाहिए।

तुंगनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व

तुंगनाथ मंदिर हिमालय के प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है और समुद्र तल से लगभग 3,640 मीटर की ऊंचाई पर है। इस मंदिर को भारतीय संस्कृति और धर्म के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। तुंगनाथ मंदिर पंचकेदार में सबसे ऊंचा और सबसे पवित्र मंदिर है। यहां पर भगवान शिव की पूजा की जाती है और माना जाता है कि भगवान शिव के भुजाएं यहां गिरी थीं।

यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर हजारों साल पुराना माना जाता है और इसका निर्माण पंडवों के समय में हुआ था। प्राचीन काल से ही यह मंदिर तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य रहा है। हर साल हजारों पर्यटक और भक्त इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं।

चंद्रशिला की पवित्रता और महत्व

चंद्रशिला तुंगनाथ मंदिर के ऊपर स्थित एक पवित्र स्थान है जहां पर पितरों का तर्पण किया जाता है। हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार, चंद्रशिला वह स्थान है जहां पर लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। यह स्थान पितृ पक्ष के समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। चंद्रशिला को चंद्रमा की चट्टान भी कहा जाता है क्योंकि यह हिमालय की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है।

पुजारी के अनुसार, चंद्रशिला पर पहुंचना एक पवित्र कार्य है और यह केवल धार्मिक उद्देश्य के लिए किया जाना चाहिए। वहां जाने वाले लोगों को पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ वहां तक पहुंचना चाहिए। नंगे पांव जाना, शुद्ध मन से जाना और किसी भी प्रकार की अशुद्धता से बचना चाहिए। पुजारी जी ने बताया कि वह स्वयं भी सिर्फ पूजा करने के उद्देश्य से वहां नंगे पांव जाते हैं।

पुजारी का संदेश और आम पर्यटकों के लिए अपील

इस वायरल वीडियो में तुंगनाथ मंदिर के पुजारी ने पर्यटकों और भक्तों से एक अहम अपील की है। उन्होंने कहा है कि जो लोग केवल घूमने के उद्देश्य से चंद्रशिला जाते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि वह कोई साधारण पर्यटन स्थल नहीं है। यह एक पवित्र धार्मिक स्थान है जहां पर हमारे पूर्वज विद्यमान हैं। इसलिए यहां की पवित्रता को बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है।

पुजारी जी ने यह भी कहा है कि यदि कोई व्यक्ति केवल घूमने के लिए चंद्रशिला जाता है तो उसे समझना चाहिए कि वह धार्मिक मानदंडों का उल्लंघन कर रहा है। चंद्रशिला पर कोई भी भोजन नहीं करना चाहिए, कोई भी प्रकार की गंदगी नहीं फैलानी चाहिए और किसी भी तरह की अशुद्ध गतिविधि नहीं करनी चाहिए।

इस वीडियो के माध्यम से पुजारी जी का संदेश बहुत स्पष्ट है कि हमारी पवित्र धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। उत्तराखंड के इस प्राचीन और पवित्र मंदिर की गरिमा को बनाए रखना सभी धार्मिक व्यक्तियों का दायित्व है। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह संदेश लाखों लोगों तक पहुंचा है और लोग इस बारे में सोचने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

आधुनिक समय में जहां पर्यटन का मतलब केवल फोटो खिंचवाना और सोशल मीडिया पर पोस्ट करना रह गया है, वहां यह संदेश बहुत महत्वपूर्ण है। हमें यह समझना चाहिए कि हर धार्मिक स्थान के पीछे एक गहरा अर्थ है और हमें उन स्थानों का सम्मान करना चाहिए। तुंगनाथ मंदिर के पुजारी का यह संदेश सभी धार्मिक पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा है।