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Wednesday, 19 August 2026
समाचार

रामपुर में दिव्यांग की मौत: गैस सिलिंडर की लाइन में खड़े होकर मरा

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Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 6:17 AM ⏱ 1 मिनट 👁 708 views

रामपुर में गैस सिलिंडर की लाइन में दिव्यांग की मौत से उजागर हुई व्यवस्था की कलई

उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक दिल दहलाने वाली घटना ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है। गैस सिलिंडर की कतार में खड़े होकर प्रतीक्षा कर रहे एक दिव्यांग किसान की मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ मानवीयता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारी सामाजिक व्यवस्था की असंवेदनशीलता को भी उजागर करती है।

घटना का दुखदायी विवरण

रामपुर में मंगलवार की सुबह गैस एजेंसी पर एक आम दिन की तरह लंबी कतारें लगी थीं। इन्हीं कतारों में एक दिव्यांग किसान भी अपने गैस सिलिंडर का इंतजार कर रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह करीब दो घंटे से लाइन में खड़ा था। दोपहर के समय अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा।

रामपुर में दिव्यांग की मौत: गैस सिलिंडर की लाइन में खड़े होकर मरा

मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसकी मदद करने की कोशिश की। जब उसकी हालत में सुधार नहीं आया तो एंबुलेंस को सूचना दी गई। एंबुलेंस आने में भी काफी समय लगा, जिससे स्थितियां और भी गंभीर हो गईं। आखिरकार जब एंबुलेंस पहुंची और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, तो वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

गैस सिलिंडर की बढ़ती समस्या

रामपुर में गैस सिलिंडर की समस्या कोई नई बात नहीं है। यहां के स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से गैस सिलिंडर की आपूर्ति में काफी कमी आई है। इसकी वजह से लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए यह स्थिति और भी कष्टकारी हो जाती है।

एजेंसी मालिकों का कहना है कि उन्हें कंपनी से पर्याप्त मात्रा में सिलिंडर नहीं मिल रहे। जितने सिलिंडर आते हैं, वे मांग के मुकाबले काफी कम होते हैं। इसकी वजह से वे मजबूरी में रोजाना सीमित संख्या में ही सिलिंडर बांट पाते हैं।

समाज की संवेदनहीनता का दर्दनाक चेहरा

इस घटना से जो सबसे दुखदायी बात सामने आई है, वह है दिव्यांगजनों के लिए किसी विशेष व्यवस्था का न होना। गैस एजेंसी पर न तो कोई अलग काउंटर था और न ही कोई प्राथमिकता की व्यवस्था। दिव्यांग होकर भी उस किसान को सामान्य लाइन में ही खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना हमारे समाज की संवेदनहीनता को दर्शाती है। दिव्यांगजनों के अधिकारों की बात तो बहुत होती है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर उनके लिए कोई सुविधा नहीं दिखती।

प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

इस दुखद घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर गैस की समस्या का समाधान समय पर हो जाता, तो यह दिन नहीं देखना पड़ता। साथ ही एंबुलेंस की देरी भी चिंता का विषय है।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि गैस एजेंसियों को दिव्यांगजनों के लिए अलग व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही गैस की आपूर्ति बढ़ाने के लिए भी कंपनी से बात की जाएगी।

जरूरी सुधार की मांग

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने कई मांगें उठाई हैं। पहली मांग यह है कि सभी गैस एजेंसियों पर दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था हो। दूसरी मांग गैस की आपूर्ति बढ़ाने की है ताकि लोगों को घंटों लाइन में न खड़ा रहना पड़े।

इसके अलावा लोगों की मांग है कि एजेंसियों पर बैठने की व्यवस्था हो। पानी पीने की सुविधा हो और छाया का प्रबंध हो। खासकर गर्मी के मौसम में यह जरूरी हो जाता है।

निष्कर्ष

रामपुर की यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह हमारी पूरी व्यवस्था की नाकामी का प्रतीक है। यह दिखाती है कि हम एक संवेदनशील समाज बनाने में कितने असफल हैं। दिव्यांगजनों के अधिकारों की बात करने वाले नेता और अधिकारी जमीनी स्तर पर उनके लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा पा रहे।

यह घटना एक चेतावनी है कि अगर हमने अपनी व्यवस्था में सुधार नहीं किया, तो ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं और भी होंगी। जरूरत है संवेदनशीलता के साथ व्यावहारिक कदम उठाने की, न कि सिर्फ बयानबाजी करने की।