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Wednesday, 19 August 2026
समाचार

धारावी में LPG संकट से मजदूर परेशान, 70% रसोई बंद

author
Komal
संवाददाता
📅 02 April 2026, 6:44 AM ⏱ 1 मिनट 👁 740 views
धारावी में LPG संकट से मजदूर परेशान, 70% रसोई बंद
📷 Aaj Tak

धारावी में LPG संकट: रसोइयां बंद, मजदूर हैरान

मुंबई की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी में इन दिनों एक गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी के कारण यहां का पूरा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जो धारावी कभी अपनी भागदौड़ और व्यस्तता के लिए मशहूर थी, वो आज सन्नाटे में डूबी नजर आ रही है।

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां की 70 प्रतिशत रसोइयां बंद हो चुकी हैं और 80 प्रतिशत कैंटीनें काम करना बंद कर चुकी हैं। इस हालत का सबसे ज्यादा असर यहां के दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा है, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए इन्हीं छोटी-मोटी दुकानों और कैंटीनों पर निर्भर रहते थे।

धारावी में LPG संकट से मजदूर परेशान, 70% रसोई बंद

मजदूरों की बढ़ती परेशानी

धारावी के एक मजदूर का कहना है, "कमाई जीरो हो गई है, लेकिन खाने का खर्च और भी ज्यादा हो गया है।" उनकी इस बात में उनकी पूरी पीड़ा छुपी हुई है। पहले जहां वे 20-30 रुपये में पेट भर खाना खा लेते थे, अब उन्हें दूर-दराज के इलाकों में जाकर महंगे दामों पर खाना खरीदना पड़ रहा है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई मजदूर अपने घर वापस लौटने का फैसला कर रहे हैं। जिन लोगों ने बड़े सपने लेकर मुंबई का रुख किया था, वे अब मायूस होकर अपने गांव-कस्बों की राह ले रहे हैं। यह स्थिति कोविड काल की याद दिलाती है, जब लाखों मजदूर काम की तलाश में भटक रहे थे।

छोटे उद्योगों पर प्रभाव

धारावी सिर्फ एक रिहायशी इलाका नहीं है, बल्कि यहां हजारों छोटे-मोटे उद्योग भी चलते हैं। चमड़े की वस्तुओं से लेकर प्लास्टिक रीसाइक्लिंग तक, यहां का कारोबार करोड़ों रुपये का है। लेकिन एलपीजी की कमी से ये सभी धंधे भी प्रभावित हो रहे हैं।

कई छोटी फैक्ट्रियों में उत्पादन धीमा हो गया है क्योंकि वहां काम करने वाले मजदूरों को खाना नसीब नहीं हो रहा। एक स्थानीय व्यापारी ने बताया कि उनकी यूनिट में काम करने वाले 15 में से 8 मजदूर अब तक घर चले गए हैं।

सप्लाई चेन में व्यवधान

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या अचानक से नहीं आई है। पिछले कुछ महीनों से एलपीजी की आपूर्ति में कमी के संकेत मिल रहे थे। लेकिन अब यह स्थिति चरम पर पहुंच गई है। स्थानीय डीलरों का कहना है कि उन्हें समय पर सिलेंडर की सप्लाई नहीं मिल रही है।

| समस्या का क्षेत्र | प्रभाव का प्रतिशत | स्थिति |

---------
रसोइयां70%बंद
कैंटीनें80%बंद
छोटे उद्योग60%धीमे
मजदूर पलायन40%बढ़ता हुआ

सरकारी प्रयास और चुनौतियां

स्थानीय प्रशासन इस समस्या से निपटने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नजर नहीं आया है। एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे एलपीजी कंपनियों से बात कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल हो सके।

लेकिन मुश्किल यह है कि धारावी जैसे घनी आबादी वाले इलाके में एलपीजी की मांग बहुत ज्यादा है। यहां के ज्यादातर परिवार खाना बनाने के लिए एलपीजी पर ही निर्भर हैं क्योंकि लकड़ी या कोयले का इस्तेमाल करना व्यावहारिक नहीं है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति और लंबी चली तो धारावी की आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा। यहां से होने वाला पलायन न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इस समस्या का समाधान केवल एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने से ही नहीं हो सकता, बल्कि वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी पड़ेगी।

फिलहाल धारावी के निवासी उम्मीद की एक किरण का इंतजार कर रहे हैं। जब तक यह संकट हल नहीं होता, यहां के मजदूरों और छोटे व्यापारियों के लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आ रहा है। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे एक छोटी सी कमी पूरे इलाके की जिंदगी को बदल सकती है।