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Sunday, 04 October 2026
मनोरंजन

गदर की कहानी: निर्देशक अनिल शर्मा का एक्सक्लूसिव साक्षात्कार

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Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 8:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
गदर की कहानी: निर्देशक अनिल शर्मा का एक्सक्लूसिव साक्षात्कार
📷 aarpaarkhabar.com

गदर एक पेम कथा की रिलीज को आज 25 साल पूरे हो गए हैं। यह फिल्म सिर्फ एक सिनेमाई रचना नहीं है, बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का एक जीवंत अध्याय है। निर्देशक अनिल शर्मा द्वारा निर्देशित इस महाकाव्य फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल की शानदार परफॉर्मेंस को दर्शकों ने खूब सराहा था। इस विशेष अवसर पर हमने अनिल शर्मा से एक विस्तृत साक्षात्कार लिया जिसमें उन्होंने गदर की पूरी निर्माण प्रक्रिया और सेट पर घटी रोचक घटनाओं के बारे में विस्तार से बताया।

अनिल शर्मा ने अपने साक्षात्कार की शुरुआत करते हुए कहा कि गदर की कहानी उनके मन में कई सालों से थी। पाकिस्तान विभाजन और भारत-पाकिस्तान के बीच परिवारों के टूटने की पीड़ा को दिखाना उनका मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने बताया कि यह फिल्म केवल एक प्रेम कथा नहीं है, बल्कि देश प्रेम और पारिवारिक रिश्तों की गहराई को दर्शाती है। फिल्म के हर दृश्य को बनाने में अनिल शर्मा ने अपना पूरा दिल और आत्मा झलकाया।

सनी देओल को कास्ट करने का फैसला

जब बात आई सनी देओल को फिल्म के लिए कास्ट करने की, तो अनिल शर्मा ने बताया कि यह एक सहज निर्णय था। सनी देओल के अभिनय की क्षमता और उनकी शारीरिक मजबूती को देखते हुए अनिल शर्मा को लगा कि वही इस भूमिका के लिए परफेक्ट हैं। उन्होंने कहा कि सनी देओल का अपने किरदार के प्रति समर्पण अद्भुत था। वह हर दृश्य को बहुत गंभीरता से लेते थे और पूरी फिल्म के दौरान अपने चरित्र में ही रहते थे।

अनिल शर्मा ने याद करते हुए कहा कि फिल्म की शूटिंग के दौरान सनी देओल कई बार अपने किरदार में इतने डूब जाते थे कि उन्हें बाहर निकालना भी मुश्किल हो जाता था। उन्होंने एक्शन सीन्स को इतनी शिद्दत से किया कि कई बार सेट के अन्य सदस्य चिंतित भी हो जाते थे। लेकिन यही तो था सनी देओल का अभिनय का जादू जिसने गदर को एक अमर फिल्म बना दिया।

सेट पर बुजुर्ग बाबा के आंसू

अनिल शर्मा के अनुसार फिल्म की शूटिंग के दौरान एक ऐसी घटना भी हुई जो सबको भावुक कर गई। गदर फिल्म में एक दृश्य था जहां सीमा पार के विषय पर बातचीत होती है। उस सीन को शूट करते समय सेट पर एक बुजुर्ग बाबा थे जो कुछ कला के काम में लगे हुए थे। जब यह भावुक दृश्य फिल्माया जा रहा था, तो वह बुजुर्ग व्यक्ति बस अपना काम करता हुआ रो पड़े।

अनिल शर्मा ने बताया कि उन बुजुर्ग बाबा की आंखों में असली आंसू थे। वह विभाजन के दौर से गुजरे व्यक्ति थे और उन्हें इस फिल्म की कहानी में अपनी ही कहानी नजर आई। यह पल अनिल शर्मा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे साबित हुआ कि उन्होंने अपनी फिल्म में लोगों के दिलों को छू सकने वाली कहानी बना दी है। यह भी एक संकेत था कि गदर फिल्म सही दिशा में जा रही है।

अमीषा पटेल और अन्य कास्ट मेंबर्स

अनिल शर्मा ने अमीषा पटेल के बारे में भी बहुत प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अमीषा पटेल पहली फिल्म में ही इतना शानदार परफॉर्म किया कि दर्शक उनके प्रेम दृश्यों को बहुत पसंद करते थे। अमीषा की मासूमियत और सनी देओल की ताकत का कॉम्बिनेशन ही गदर को एक सफल फिल्म बना गया।

फिल्म में अन्य कास्ट मेंबर्स जैसे रजीन्द्रप्रसाद, मुखेश खन्ना और अन्य कलाकारों ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अनिल शर्मा ने कहा कि हर एक कलाकार अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध था और यही कारण था कि फिल्म को इतनी व्यापक सफलता मिली।

संगीत और तकनीकी पहलू

गदर की एक और खासियत थी इसका शानदार संगीत। अनिल शर्मा ने बताया कि ए.आर. रहमान का संगीत फिल्म की रूह थी। हर गीत फिल्म के कथानक के साथ इतनी सटीकता से जुड़ा हुआ था कि संगीत ही फिल्म का एक अभिन्न अंग बन गया।

तकनीकी पहलू से भी गदर को बनाना एक चुनौती थी। 1997 में भारत में सिनेमा टेक्नोलॉजी उतनी एडवांस नहीं थी जितनी आज है। अनिल शर्मा ने अपनी टीम के साथ मिलकर फिल्म के हर फ्रेम को सजीव बनाया। विभाजन के समय का माहौल, घबराहट और उम्मीद सब कुछ फिल्म में दिखता है।

फिल्म की विरासत

25 साल बाद आज भी गदर को दर्शक उसी सम्मान के साथ याद करते हैं। अनिल शर्मा को गर्व है कि उन्होंने ऐसी फिल्म बनाई जो समय के साथ और भी ज्यादा प्रासंगिक होती गई। देश के विभाजन की पीड़ा और उसके बाद के रिश्तों की जटिलता को दिखाने में गदर पूरी तरह सफल रही।

अनिल शर्मा का मानना है कि गदर की सफलता का मुख्य कारण थी फिल्म की सत्यता। वह फिल्म कमर्शियल सिनेमा था लेकिन उसमें सामाजिक संवेदनशीलता भी थी। यही कारण है कि गदर सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी अपनी जगह बना गई। अनिल शर्मा के लिए गदर सिर्फ एक फिल्म नहीं है, वह उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।