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Thursday, 30 July 2026
राजनीति

पीओके में पाक सेना की बर्बरता पर कश्मीरी अलगाववादियों का विरोध

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Komal
संवाददाता
📅 17 June 2026, 5:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 309 views
पीओके में पाक सेना की बर्बरता पर कश्मीरी अलगाववादियों का विरोध
📷 aarpaarkhabar.com

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर असंतोष अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मुखर होने लगा है। कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन के अध्यक्ष डॉ. मुबीन शाह ने वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई, गिरफ्तारियों और मौतों के लिए पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया है। यह विवाद उस समय सामने आया है जब पीओके के विभिन्न इलाकों में लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में जो कुछ हो रहा है वह वाकई चिंताजनक है। यहां की स्थानीय आबादी लंबे समय से पाकिस्तानी सेना और प्रशासन की दमनकारी नीतियों का शिकार रही है। प्रदर्शनकारियों को निर्মমता से दबाया जा रहा है और कई लोगों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई है। इन सब घटनाओं के बावजूद पाकिस्तान सरकार किसी भी तरह की पारदर्शी जांच के लिए राजी नहीं है।

कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो दुनिया भर में बिखरे कश्मीरी लोगों के अधिकारों के लिए काम करता है। डॉ. मुबीन शाह ने अपने बयान में साफ कहा है कि पीओके में जो हिंसा और दमन चल रहा है वह अमानवीय है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान एक लोकतांत्रिक और सभ्य राष्ट्र है तो इन मामलों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की अनुमति दी जानी चाहिए।

पीओके में हिंसा की बढ़ती घटनाएं

पिछले कुछ महीनों में पीओके में हिंसक घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। स्थानीय लोग अपने मौलिक अधिकारों के लिए जब आवाज उठाते हैं तो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा उन पर बर्बर कार्रवाई की जाती है। निर्दोष नागरिकों को गिरफ्तार किया जाता है, उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और कई बार जेल में ही उनकी रहस्यमय मौत हो जाती है।

आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष पीओके में कम से कम पचास से अधिक लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। इनमें से अधिकांश मामलों में पाकिस्तान सरकार ने कोई जवाबदेही नहीं दी है। स्थानीय मीडिया को भी इन मामलों की रिपोर्टिंग करने से रोका जाता है। जो भी पत्रकार सच सामने लाने की कोशिश करते हैं उन्हें धमकाया और परेशान किया जाता है।

मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार पीओके में यातना की घटनाएं भी आम हो गई हैं। पुलिस हिरासत में कई लोग अपनी चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं। इनमें से कुछ आजीवन के लिए विकलांग हो जाते हैं। बच्चों और महिलाओं को भी इस दमन से नहीं बख्शा गया है। यह स्थिति पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के प्रति अपने वचनों का सीधा उल्लंघन है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका

कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन पीओके में हो रहे इन अत्याचारों के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। डॉ. मुबीन शाह ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद से अपील की है कि वह पीओके की स्थिति की स्वतंत्र जांच करे। उन्होंने कहा है कि यह मामला किसी एक देश का नहीं बल्कि मानवता का है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई देशों ने पीओके में मानवाधिकारों के हनन पर अपनी असंतुष्टि व्यक्त की है। यूरोपीय संघ की एक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पाकिस्तान अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा नहीं कर रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार किसी भी आलोचना को खारिज कर देती है और कहती है कि यह भारत की साजिश है।

हालांकि, अब पीओके के स्थानीय लोग और अलगाववादी नेता भी पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। यह तस्वीर बदल रहा है। जब खुद पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र के लोग सरकार के खिलाफ बोलने लगें तो यह पाकिस्तान के लिए गंभीर समस्या है।

स्वतंत्र जांच की मांग और भविष्य

डॉ. मुबीन शाह और कश्मीर डायस्पोरा कोएलिशन की मांग न्यायसंगत है। पीओके में हो रहे अत्याचारों की एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। इस जांच को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की निगरानी में होना चाहिए ताकि पाकिस्तान सरकार किसी प्रकार की हेराफेरी न कर सके।

जो लोग पीओके में अपने परिवारों की मौत का कारण जानना चाहते हैं उनका यह अधिकार है कि उन्हें सच का पता चले। जिन परिवारों के सदस्य गायब हो गए हैं उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके प्रिय जन कहां हैं और उनके साथ क्या हुआ।

भविष्य में पीओके की स्थिति में सुधार के लिए पाकिस्तान सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव लाना होगा। दमनकारी नीतियों को छोड़कर स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित करना होगा। केवल तभी इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता आ सकती है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि पीओके में जो हो रहा है वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मानकों के अनुसार स्वीकार्य नहीं है। पाकिस्तान सरकार को इन मामलों की पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की अनुमति देनी चाहिए। मानवता के नाम पर पीओके के लोगों को न्याय दिलाया जाना चाहिए। केवल तभी पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय में एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्वीकार किया जा सकेगा।