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Thursday, 30 July 2026
राजनीति

जी7 शिखर सम्मेलन: यूक्रेन को हथियार समर्थन

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Komal
संवाददाता
📅 17 June 2026, 7:00 AM ⏱ 1 मिनट 👁 717 views
जी7 शिखर सम्मेलन: यूक्रेन को हथियार समर्थन
📷 aarpaarkhabar.com

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में विश्व के शक्तिशाली देशों के नेताओं ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। इस बयान में यूक्रेन को सैन्य सहायता प्रदान करने, अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते का समर्थन करने और रूस के खिलाफ मजबूत रुख अपनाने की बात कही गई है। जी7 के इस सम्मेलन में दुनिया के सबसे विकसित राष्ट्रों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

जी7 में शामिल देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। इन सभी देशों के नेताओं की उपस्थिति में बयान तैयार किया गया है जो वैश्विक राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस बयान के माध्यम से जी7 ने अपने सदस्य देशों की सामूहिक नीति और दृष्टिकोण को व्यक्त किया है।

यूक्रेन को सैन्य सहायता का समर्थन

जी7 के इस बयान में यूक्रेन को हथियार और सैन्य सहायता प्रदान करने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। यूक्रेन रूस के आक्रमण से जूझ रहा है और इसी संदर्भ में जी7 देशों ने यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी को दोहराया है। बयान में कहा गया है कि यूक्रेन को आवश्यक हथियार प्रणाली, सैन्य उपकरण और तकनीकी सहायता प्रदान करना जारी रखा जाएगा।

इसके अलावा, जी7 नेताओं ने यूक्रेन की ऊर्जा बुनिवादी ढांचे को पुनः निर्माण करने में भी सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। रूस द्वारा यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली को निशाना बनाए जाने से यूक्रेनी जनता को कठोर परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। जी7 ने इस समस्या के समाधान के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करने का वचन दिया है। यूक्रेन की पुनरुद्धार परियोजना को पूरा करने के लिए जी7 देश मिलकर काम करेंगे।

बयान में यह भी कहा गया है कि रूस को अपनी आक्रामक नीति से पीछे हटना चाहिए और यूक्रेन की अखंडता का सम्मान करना चाहिए। जी7 देश रूस पर अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने का दबाव डालेंगे और यूक्रेन के साथ एकतरफा रवैये को छोड़ने के लिए बाध्य करेंगे।

अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते पर समर्थन

जी7 के बयान में अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते (जेसीपीओए) के प्रति मजबूत समर्थन व्यक्त किया गया है। यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी सुनिश्चित करता है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जी7 के नेताओं का मानना है कि इस समझौते को मजबूत किया जाना चाहिए और इसके तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए।

बयान में ईरान को संदेश दिया गया है कि यदि वह परमाणु समझौते की शर्तों का पालन करे और पारदर्शिता बनाए रखे तो जी7 देश आर्थिक प्रतिबंधों में छूट देने पर विचार करेंगे। हालांकि, यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाता है तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय और कड़े कदम उठाने के लिए तैयार है।

यह समझौता मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। जी7 के इस समर्थन से लगता है कि वैश्विक शक्तियां परमाणु प्रसार को रोकने और क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के प्रति गंभीर हैं।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र और अन्य मुद्दे

जी7 के बयान में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, समुद्री सुरक्षा और आजादी के लिए भी मजबूत समर्थन व्यक्त किया गया है। इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और समुद्री विवादों को लेकर जी7 देश चिंतित हैं। बयान में अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार शांतिपूर्ण समाधान की बात कही गई है।

इसके अलावा, बयान में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम, गाजा में मानवीय संकट और पश्चिम एशिया की कई समस्याओं का भी जिक्र किया गया है। जी7 ने घोषणा की है कि वह इन सभी मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के सिद्धांतों पर अमल करने पर जोर देंगे।

फ्रांस में आयोजित इस शिखर सम्मेलन ने दिखाया है कि जी7 देश विश्व के प्रमुख मुद्दों पर एकीभूत दृष्टिकोण रखते हैं। यूक्रेन समर्थन, ईरान समझौता, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और मानवाधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट है। आने वाले समय में जी7 इन मुद्दों पर कोई ठोस कदम उठाएंगे, यह देखना होगा कि विश्व परिस्थितियां कैसे विकसित होती हैं।