मोटापा दिल किडनी बीमारी का मुख्य कारण
नई दिल्ली - स्वास्थ्य जगत में एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है जब विश्व के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञों के संगठन ने पहली बार एक व्यापक गाइडलाइन जारी की है। इस गाइडलाइन में माना गया है कि मोटापा केवल एक कॉस्मेटिक समस्या नहीं है, बल्कि यह दिल और किडनी की गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण बन सकता है। यह खोज उन लाखों लोगों के लिए चेतावनी है जो अपने बढ़ते वजन को नजरअंदाज कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा केवल शरीर के वजन में वृद्धि तक सीमित नहीं है। खासतौर पर जब अतिरिक्त चर्बी पेट के चारों ओर जमा होती है, तो यह शरीर के लिए बेहद हानिकारक साबित होता है। यह पेट की चर्बी (विसरल फैट) सीधे हमारे आंतरिक अंगों को प्रभावित करती है और शरीर में विभिन्न प्रकार की समस्याओं को जन्म देती है।
मोटापा और हृदय रोग का गहरा संबंध
नई गाइडलाइन में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि मोटापा हृदय रोगों के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक है। जब शरीर में अतिरिक्त वजन होता है, तो हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और यह रक्त को पंप करने के लिए अधिक प्रयास करता है। इससे रक्तचाप में वृद्धि होती है और धीरे-धीरे हृदय की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।
पेट की चर्बी विशेष रूप से समस्याग्रस्त होती है क्योंकि यह सूजन के कारकों को स्रावित करती है। ये सूजन के कारक रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में कोलेस्ट्रॉल का जमा होना) का कारण बनते हैं। इससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि मोटे लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होता है और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर भी बढ़ा हुआ होता है। ये दोनों ही कारक हृदय रोग के खतरे को कई गुना बढ़ा देते हैं। साथ ही, रक्त में गाढ़ापन भी बढ़ जाता है, जिससे थक्के बनने का खतरा भी बढ़ जाता है।
किडनी रोग और मोटापे का अप्रत्याशित जुड़ाव
मोटापे और किडनी रोगों के बीच संबंध को लेकर अब तक बहुत कम जागरूकता थी। लेकिन इस नई गाइडलाइन में विशेषज्ञों ने साफ कर दिया है कि मोटापा किडनी के कार्य को भी प्रभावित करता है। जब शरीर में अतिरिक्त वजन होता है, तो किडनी पर दबाव बढ़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पेट की अतिरिक्त चर्बी सीधे किडनी को दबाती है और उसके कार्य को प्रभावित करती है। इसके अलावा, मोटापे से जुड़ी सूजन की समस्या भी किडनी के छोटे फिल्टर को नुकसान पहुंचाती है। मोटे लोगों में उच्च रक्तचाप भी आम होता है, जो किडनी को और भी अधिक नुकसान पहुंचाता है।
गाइडलाइन में यह भी पाया गया है कि मोटापा मधुमेह के खतरे को भी बढ़ाता है, और मधुमेह किडनी रोग का सबसे बड़ा कारण है। इस तरह, मोटापा सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरीकों से किडनी को नुकसान पहुंचाता है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबोलिक समस्याएं
मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच एक दुष्चक्र होता है। जब शरीर में अतिरिक्त चर्बी होती है, तो शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं। इसका मतलब है कि शरीर को सामान्य रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के लिए अधिक इंसुलिन की जरूरत पड़ती है।
इस स्थिति से डायबिटीज टाइप 2 विकसित होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। डायबिटीज न केवल किडनी को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि हृदय रोग का भी एक प्रमुख कारण है। विशेषज्ञों ने अपनी गाइडलाइन में जोर दिया है कि वजन प्रबंधन करके इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम किया जा सकता है।
इसके अलावा, मोटापे से लिपिड प्रोफाइल (रक्त में चर्बी का स्तर) भी खराब हो जाता है। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है और एचडीएल कोलेस्ट्रॉल घट जाता है, जो हृदय के लिए बहुत हानिकारक होता है।
वजन घटाने के महत्व पर जोर
गाइडलाइन में विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भले ही थोड़ा सा वजन घटाना भी महत्वपूर्ण है। यदि कोई अपने शरीर के वजन का पांच से दस प्रतिशत भी कम कर ले, तो उसे स्वास्थ्य सुधार में उल्लेखनीय लाभ मिल सकता है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि नियमित व्यायाम, स्वास्थ्यकर भोजन और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर वजन को नियंत्रित रखा जा सकता है। विशेष रूप से, पेट की चर्बी को कम करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए क्योंकि यह सबसे ज्यादा हानिकारक होती है।
इस नई गाइडलाइन का प्रकाशन स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दुनिया भर में मोटापे की समस्या की गंभीरता को रेखांकित करता है और लोगों को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करता है।




