शिवसेना UBT के छह सांसदों को वाई-प्लस सुरक्षा मिली
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से तनाव की स्थिति देखने को मिल रही है। शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट (UBT) के छह सांसदों को सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण वाई-प्लस सुरक्षा दी गई है। यह घटना पार्टी के अंदर विभाजन को लेकर बढ़ती अफवाहों के बीच हुई है। माना जा रहा है कि ये सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल होने की तैयारी में हो सकते हैं।
इस संदर्भ में शिवसेना UBT के प्रमुख नेता संजय राउत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरी घटना को "ऑपरेशन तुड़वा" का नाम दिया है। राउत के अनुसार यह एक सुनियोजित प्रयास है जो पार्टी को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने उन सांसदों को सीधे तौर पर निशाना साधा है जो शिंदे गुट में शामिल होने की सोच रहे हैं। राउत का कहना है कि जो लोग पार्टी को छोड़ रहे हैं वे वास्तव में शिवसेना के असली आदर्शों से दूर जा रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था में हुई बदलाव
मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में शिवसेना UBT के इन छह सांसदों को वाई-प्लस सुरक्षा दी गई है। यह सुरक्षा व्यवस्था आमतौर पर तब दी जाती है जब किसी को संभावित खतरे का अंदेशा होता है। पुलिस के अनुसार इन सांसदों को कुछ ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों से धमकियां मिली हैं। कुछ पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक भी इन सांसदों के विरुद्ध आक्रोश प्रदर्शन कर रहे हैं।
वाई-प्लस सुरक्षा का अर्थ है कि इन सांसदों के साथ सशस्त्र पुलिस जवान रहेंगे। उनके आवास, कार्यालय और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। यह सुरक्षा उनके परिवार के सदस्यों को भी प्रदान की जा रही है। इसके अलावा इन सांसदों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा देने का निर्णय लेने से पहले पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने इन सांसदों से विस्तार से बात की थी। उन्होंने जो खतरे की जानकारी दी थी उसके आधार पर ही यह निर्णय लिया गया। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पुलिस ने इसका कारण स्पष्ट नहीं किया है कि ये खतरे किस वजह से हैं। लेकिन माना जा रहा है कि ये खतरे इन सांसदों के पार्टी से अलग होने की अफवाहों से संबंधित हो सकते हैं।
संजय राउत की टिप्पणी और पार्टी की चिंता
संजय राउत की सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणी यह है कि उन्होंने इसे "ऑपरेशन तुड़वा" कहा है। "तुड़वा" शब्द का अर्थ है तोड़ना या विभाजन करना। राउत के अनुसार यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है जिसका उद्देश्य शिवसेना UBT को आंतरिक रूप से कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पार्टी के शक्तिशाली नेताओं को लालच देकर पार्टी को छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
राउत की आलोचना का केंद्र बिंदु एकनाथ शिंदे और उनकी सरकार है। उन्होंने कहा कि शिंदे सरकार पार्टी को तोड़ने के लिए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रही है। राउत के अनुसार यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो लोग पार्टी को छोड़ेंगे उन्हें पार्टी के कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
शिवसेना UBT के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की टिप्पणियां की हैं। उन्होंने कहा है कि उद्धव बालासाहेब ठाकरे की विरासत को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी के अंदर एक बड़ा गुस्सा है कि कुछ सांसद पार्टी को छोड़ने के लिए तैयार हो रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता इन सांसदों के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
शिंदे गुट में शामिल होने का कार्यक्रम टला
दिलचस्प बात यह है कि जिन छह सांसदों को वाई-प्लस सुरक्षा दी गई है, उनमें से कुछ को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल करने का एक कार्यक्रम भी तय किया गया था। लेकिन सुरक्षा कारणों और पार्टी से विरोध के कारण यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार यह कार्यक्रम मुंबई में आयोजित किया जाना था। इसमें एकनाथ शिंदे और अन्य प्रमुख नेताओं को भी शामिल होना था। लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध और सुरक्षा चिंताओं के कारण यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। अब कहा जा रहा है कि यह कार्यक्रम कुछ दिन बाद आयोजित किया जा सकता है।
इस पूरी घटना से महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई गतिविधि देखने को मिली है। शिवसेना के विभाजन के बाद से ही इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। इसका असर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भी पड़ रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।




